मोदी और आज के भारत में महाभारत :--
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महाभारत में यह वर्णन आता है कि किस तरह पांडवों ने सशरीर स्वर्गारोहण के लिए हिमालय को प्रयाण किया था , कहा जाता है कि युधिष्टिर के अलावा सभी पांडव एक-एक करके अथाह हिम के समुद्र में गलते चले गए किंतु अंततोगत्वा मात्र अपने अंगूठे के गले हुए नाखून के साथ युधिष्टिर सशरीर स्वर्ग पहुंचे ।
यदि अन्य पांडवों का हश्र देखा जाए तो यह अनावश्यक और निश्चित असफलता देने वाला कार्य लगता है लेकिन यदि युधिष्टिर को देखा जाए तो लगेगा कि यह एक अत्यंत गौरवशाली धार्मिक अतिकार्य था !
जवाहरलाल नेहरू ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते एवं अपने निजी अहम को तुष्ट करने के लिए राष्ट्र की सुरक्षा ,सम्मान एवं सीमाओं के साथ खिलवाड़ करते हुए अंतर्राष्ट्रीय नेता बनने का असफल प्रयास किया , अक्सर कहा जाता है कि उन्होंने नोबेल प्राप्ति के लिए ऐसा किया ।
उन्होंने ऐसा क्यों किया, वे असफल क्यों हुए, उससे परे एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या ऐसा किया जाना अपने आप में ही एक गलत अवधारणा है ??
क्या भारत के किसी नेता को विश्व नेता नहीं होना चाहिए ?
क्या विश्व नेता होने का केवल एक ही अर्थ होता है "नोबेल शांति पुरस्कार" और क्या हमेशा विश्व नेता बनने के लिए भारत के राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता करना आवश्यक शर्त है ??
निजी रूप से मेरा यह मानना है कि ऐसा आवश्यक नहीं है । विश्व नेता बनने का प्रयास यदि भारत के हितों के संवर्धन के लिए किया जाता है तो इसमें कोई बुराई नहीं वरन यह अत्यंत गौरव और राष्ट्रहित का महामार्ग है !
यदि जॉर्डन और इजराइल की सेनाएं एवं सरकार मिलकर मोदी को फिलिस्तीन पहुंचाने के लिए राजकीय व्यवस्था करते है , बारी बारी से मोदी अलग-अलग स्वतंत्र फिलिस्तीन ,इजराइल दौरा करते हैं और तब भी वे लोग अपेक्षा करते हैं कि इस विवाद को निपटाने में मोदी अहम किरदार निभा सकते हैं तो मैं समझता हूं कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है ।
मैं मोदी को विश्वनेता बनते देखना चाहता हूं जिसका मार्ग जवाहरलाल नेहरु वाला ही है किन्तु मोदी की तैयारी , तरीका और शस्त्र बिल्कुल अलग है ।
मोदी विश्व नेता बनना चाहते हैं राष्ट्र हित के लिए जैसा कि उनकी 6 साल की विश्व राजनीति एवं कूटनीतिक सफलता को देखते हुए स्पष्ट प्रतीत होता है ।
मोदी अभी चीन गए और एक महत्वपूर्ण शिखर वार्ता करके आए ,मोदी ने चीन के साथ पंचशील के आधुनिकरण की बात की है , सुनने में तो यह नेहरू पार्ट-2 के जैसा ही साउंड करता है किंतु यदि हम दूसरी तरफ देखें तो भारत की रक्षा तैयारियां , युद्ध को लेकर भारत की सामरिक एवं अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक तैयारियां नेहरू से बिल्कुल विपरीत एवं पर्याप्त आक्रामक है ।
भारत तेजी से अपनी सामरिक शक्ति बढ़ा रहा है जो कि सर्वांगीण है । यह बात उन्हें जवाहरलाल नेहरू से बिल्कुल अलग खड़ा कर देती है , तो यदि मोदी भारत के हितों के लिए विश्व नेता बनते हैं तो इसमें मुझे कोई बुराई नजर नहीं आती ।
अक्सर लोग मोदी की इन महत्वकांक्षाओं को भी नोबेल से जौड़कर देख लेते हैं जो कि सर्वथा अनुचित एवं निराधार प्रतीत होता है ।
अब आप विचार कीजिये कि क्या विश्व नेता बनने का सामर्थ्य एवं इच्छाशक्ति रखने वाला व्यक्ति सीधे-सीधे किसी धर्म विशेष का दमन करता हुआ दिखाई दे सकता है ??
क्या कोई विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का मुखिया प्रजा-प्रजा मे धर्म के आधार पर स्पष्ट दृष्टिगोचर अंतर कर सकता है ??
नही ! बिल्कुल नही ! ऐसा व्यक्ति विश्वनेता निश्चित रूप से नहीं बन सकता । ज्यादातर उग्र राष्ट्रवादी एवं तात्कालिक प्रतिक्रिया देने वाले शार्ट टेंपर एवं आत्मघाती लड़ाके अक्सर इस बात को नहीं समझ पाते की आज यदि नरेंद्र मोदी को विश्व नेता बनना है तो "सबका साथ सबका विकास " का प्रदर्शन तो कम से कम करना ही होगा ।
मोदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सिद्ध करना होगा कि भारत में धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेद नहीं किया जाता । यह न केवल अंतर्राष्ट्रीय मानवीय अवधारणाओं के मानदंड के लिए भी आवश्यक है बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं अन्य कल्याणकारी वैश्विक संगठनों की पात्रता के लिए भी आवश्यक है ।
अब विचार कीजिये कि रोड़े कौन अटकाना चाहता है और क्यों ??
मोदी द्वारा 4 साल में किए गए कार्यों में कोई सीधा-सीधा घोटाला नही मिला या सार्थक आलोचना नहीं कर पाने की वजह से विपक्ष मोदी की इन महत्वाकांक्षी योजना को फेल करने के लिए भारत की छवि बिगाड़ने के निकृष्टतम दावपेच पर भी उतर आया है ।
कठुआ कांड इसका ज्वलंत उदाहरण है ।वे सभी लोग/संस्थाएं जिन्होंने कठुवा कांड की आड़ लेकर भारत का अपमान किया है वस्तुतः उनका मुख्य नैरेटिव है मोदी को विश्व नेता बनने से रोकना है ।
इससे अधिक दुखद बात यह है की जाने अनजाने मैं हिंदुत्व के योद्धा कहे जाने वाले साइबर सैनिकों ने विपक्षियों के इस भ्रमजाल को फैलाने में उनका जी भर के सहयोग कर दिया और अभी तक किए जा रहे हैं।
सांप्रदायिक गालियां ,लक्षित सांप्रदायिक विरोध हमारे पक्ष को कमजोर कर रहे हैं । विरोधियों ने स्पष्ट रूप से एक दुष्टतापूर्ण नैरेटिव बनाने का लगभग सफल प्रयास किया है कि भारत में इस समय एक हिंदूवादी सरकार है जो ऐसे रेडिकल कट्टर हिंदूवादी सैनिकों को संरक्षा प्रदान करती है जो किसी भी अन्य धर्म को भारत में अब रहने नहीं देना चाहते हैं।
आप यदि पिछले कुछ समय से baised मीडिया ,रवीश कुमार जैसे पत्तलकार एवं वामपंथी बुद्धिजीवीयो का स्टैंड देखेंगे तो स्पष्ट समझ पाएंगे कि वह विश्व के सामने मोदी को ऐसा क्यों सिद्ध करना चाह रहे हैं ??
और अब इन सभी षडयंत्रो को व्यवस्थित एवं अधिक प्रभावी तरीके से संपादित करने के लिए "कैंब्रिज एनालिटिका " जैसी " ब्रिटिश " एजेंसी की मदद ली जा रही है जिसे भारत में "फूट डालो राज करो " का सर्वांगीण अनुभव है इसीलिए मेरा यह मानना है कि अब हमें बहुत संभल कर खेलना होगा ।
एक बात को अच्छी तरह से समझ लीजिए कि इस्लाम ने जिस तरह से आज की तारीख में विश्वव्यापी पकड़ बना रखी है और जो वर्षों/ दशकों से इसके लिए प्रयासरत हैं उनके समक्ष हमने आज की तारीख में केवल भारत में कुल जमा यह पहली सरकार अपने बूते पर बनाई है जिसपर भी हमे एक ही टर्म मे "विश्वगुरु विथ भगवा महाशक्ति " बनने से कम कुछ स्वीकार नही है ??
यह व्यवहारिक नही है , गंभीरता से सोचिये और विचार कीजिये कि क्या इतनी जल्दी इतने बड़े विश्वव्यापी मुद्दों पर उचित हैं??
तो आखिर क्या किया जाए ??
यही सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि आखिर फिर किया क्या जाए ??
क्या हिंदुत्व पर होने वाले दुष्प्रचारपूर्ण आक्रमण सहर्ष स्वीकार किए जाएं ??
क्या "विकृत इस्लामिक" आक्रमणों का प्रतिकार नही किया जाए ??
मैं कहूँगा ,बिल्कुल प्रतिकार किया जाना चाहिए ,अवश्य किया जाना चाहिए किन्तु "छछुंदर " नीति से !
अर्थात पैर की चमड़ी कुतर भी दीजिये और फूँक भी मारते जाइये । (इससे अधिक खुलकर नही लिख सकता )
उपसंहार - मोदी के विश्वनेता बनने से हमे क्या लाभ ??
आज हिंदुत्व एवं भारत का प्रत्यक्ष शत्रु हैं "विकृत इस्लाम " विकृत इस्लाम मतलब इस्लाम का वह संस्करण जिसे हिंदुत्व से अकारण नफरत है ,जो उनकी संपत्ति संसाधनों पर अधिकार चाहता है ,जो लोकतंत्र में विश्वास नही रखता , जो भारतविरोधी गतिविधियों से परहेज नही करता ,जिसे फिर से भारत के टुकड़े चाहिए ............आदि इत्यादि ।
इस विकृत इस्लाम को शक्ति देता है भारत का सबसे निकट शत्रु पाकिस्तान !
बहुत साधारण सी बात है कि यदि भारत से विकृत इस्लाम का सफाया करना है जो कि हिंदुत्व का सबसे बड़ा शत्रु है तो पाकिस्तान का सफाया करना इसका एकमात्र निदान है ।
ना केवल भारत बल्कि संपूर्ण विश्व में इस्लाम के सबसे विकृत संस्करण को पोषित करने वाला पाकिस्तान है ,ऐसे में पाकिस्तान को नेस्तनाबूत करने के लिए एक वैश्विक अभियान की आवश्यकता थी जिसका नेतृत्व नरेंद्र मोदी ने विश्व नेता के रूप में किया और जिसे नाम दिया गया वैश्विक आतंकवाद उन्मूलन अभियान !
भारत के नेतृत्व में इस अभियान के बहाने पाकिस्तान को चारों ओर से घेरा गया । आर्थिक ,कूटनीतिक, सामरिक एवं आंतरिक चहुँओर से ! परिणाम आज हम देख ही रहे हैं ।यह सब संभव हुआ मोदी के बढ़ते वैश्विक कद से एवं भारत की आक्रमक कूटनीति से । आज भारत ने अमेरिका, रूस ,फ्रांस, जापान , वियतनाम ,ऑस्ट्रेलिया , सऊदी अरब, ईरान, इजराइल एवं अन्य खाड़ी एवं अन्य महत्वपूर्ण शक्तिशाली राष्ट्र सभी को एक साथ बहुत संतुलित तरीके से साधा हुआ है । पाकिस्तान के विरुद्ध चीन को अफगानिस्तान के माध्यम से साधने की भी बहुत सार्थक पहल अभी हाल ही मे की जा चुकी है ।
आतंकवाद के बहाने तुर्की जैसे पाकिस्तान परस्त एवं ओपन भारत विरोधी राष्ट्र को भी अब अपने पक्ष में काफी हद तक न्यूट्रलाइज कर लिया गया है यदि आपकी रुचि वैश्विक कूटनीति में है तो इन सब सामान्य बातों को आप बहुत आसानी से समझ सकता है।
अंततोगत्वा मेरा अत्यंत सहज निवेदन है मोदी जी की वैश्विक महत्वकांक्षाओं की पूर्ति के लिए ,जिसमें भारत का दीर्घकालिक व्यापक हित सीधे जुड़ा हुआ है ,हिंदुत्व का उत्कर्ष जुड़ा हुआ है कि श्रेष्ठतम सफलता के लिए मोदी जी का साथ दें !
ना केवल सोशल मीडिया पर यह माहौल बनाएं कि भारत में धार्मिक आधार पर किसी से कोई भेदभाव नहीं किया जाता और ना ही "मानवीय मुस्लिमों " के लिए भारत असुरक्षित है । हमे यह "सत्य" स्थापित करने की आवश्यकता मात्र है कि इस्लाम के "मानवीय" संस्करण के यापन के लिए भारत सर्वश्रेष्ठ मातृभूमि है जिससे दुष्ट विरोधियों द्वारा कुप्रचारित इस झूठे नैरेटिव को ध्वस्त किया जा सके कि भारत मे कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी सरकार है जो अन्य धर्मों के भारतीयों से सौतेला व्यवहार करती है । इस झूठ का खंडन हर हाल में होना चाहिए यह अपरिहार्य है ।
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