मैं सुन्दरता से प्रेम करता हूँ..
मेरे आस पास जो भी सौंदर्य आप देख रहे हो,,
वह तुम्हारी वजह से सहज सरल और स्वाभाविक है....
ताजे खिले गुलाब के फूल की तरह
तुम्हारी मुस्कान रुह में एक ताजगी जगाती है......
मैं तुम्हारी सुन्दरता का पुजारी हूँ.....
वह सुन्दरता चाहें तुम्हारी आँखों में हो,
लबों में हो या चेहरे में हो,
रंग बिरंगे खुशबू बिखेरती जुल्फों में हो,
हवा में मस्ती में झूमते तुम्हारी लटों में हो,
अकारण गीत गाते तुम्हारे सुंदर लबों में या
अँधेरी रात में चमकते असंख्य दातों में हो....
कल कल करती तुम्हारी चुलबुली बातों में हो.....
या शांत झील में चांद का प्रतिबिंब दिखता हो.....
वैसे नयनों से बोलती तुम्हारी आवाज की मौज हो.....
इस जहाँ में जीतना सौंदर्य है तुम्हारा रुप यौवन है,
और
वहाँ मेरा अस्तित्व अपने को प्रगाढ़ रूप से
अभिव्यक्त कर रहा है.....
तुम सुन्दर हो क्योंकी तुम निर्दोष भोले भाले,
ध्यान पूर्ण, शांत और आत्मकेंद्रित हो...
प्रेमपूर्ण निर्दोष सौंदर्य अस्तित्व की
तुम एकलौती ईश्वर के हाथों बनी
सुन्दरतम कृति हो....!✍🏻
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