गाड़ी का ड्राइवर कुशल व्यक्ति है। आराम से सीट पर बैठे रहो और सफर का आनंद लो। हर दिन .....हर वर्ष ....हर दशक .....राष्ट्र को उन्नति करते देखो।
एक रोज़ दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहा था। सीट पर बैठा ही था के सामने बैठा व्यक्ति जाना पहचाना सा लगा। गौर से देखा तो हमारा एक परिचित व्यापारी था।
उससे दुआ सलाम हुई और उसने बताया के वह बिज़नेस के सिलसिले में दिल्ली आया है और उसे "कश्मीरी गेट" मेट्रो स्टेशन पर उतरना है।
कुछ देर बातचीत होती रही और फिर सीट से उठ कर खड़ा हो गया।
मैंने उससे कहा के वह अभी से क्यों खड़ा हो गया है। कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन तो अभी दूर है।
बोला " मैं ज़रा जल्दी में हूँ "
मैंने कहा भले मानुष तू जल्दी में है ये मान लिया ......परंतु मेट्रो जल्दी में नहीं है भाई। वह अपनी स्पीड से ही चलेगी और स्टेशन जिस समय आना है .....उसी समय आयेगा।
परंतु वह ना माना। हम दोनों ने कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर ही उतरना था। मैं आराम से अपनी सीट पर बैठा रहा और वह सीट से उठ कर दरवाजे के पास जा कर खड़ा हो गया। यह तो स्पष्ट था के वह जल्दी में है परंतु उसकी जल्दबाजी का मेट्रो की गति से क्या लेना देना था......यह मेरी समझ में नहीं आया। सारे रास्ते वह परेशान होकर खड़ा रहा और मैं अपनी सीट पर आराम से बैठा रहा।
कश्मीरी गेट स्टेशन आया तो हम दोनों एकसाथ मेट्रो से उतर गये।
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2014 के बाद से देख रहा हूँ एक बहुत बड़ा वर्ग राष्ट्र की प्रगति को लेकर बहुत "जल्दी" में है। वह वर्ग चाहता है के कोई जादू की छड़ी घूमे और दिनों दिनों में राष्ट्र का रूपांतरण हो जाये। अमेरिका जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बन जाये .....सिंगापोर जैसे स्कूल और हॉस्पिटल बन जायें। जापान जैसी रेलवे कनेक्टिविटी बन जाये.......और यह सब 5 - 10 वर्ष में संभव हो जाये।
यह तो वोट मांगने के लिये नेतागण सब्ज़बाग दिखा देते हैं।
आज भी किसी ईमानदार निष्पक्ष इकोनॉमिस्ट से बात कीजिये तो वह राष्ट्र के रूपांतरण की प्रक्रिया का समय "वर्षों" में "दशकों" में गिनवायेगा।
जिन विकसित सभ्यताओं के उदाहरण लेकर हम बढ़ना चाहते हैं उन्हें विकसित होने में दशकों लगे हैं। कोई 2 - 5 साल की प्रक्रिया नहीं है।
परंतु एक वर्ग विशेष "जल्दी" में है। उसे सब कुछ इंस्टेंट नूडल्स की तरह तैयार चाहिये।
...........और यह वर्ग बड़ा बेचैन है। राष्ट्र रूपी गाड़ी चल रही है .....सही दिशा पर चल रही है.....सही ट्रैक पर चल रही है और सबसे बड़ी बात सही स्पीड से चल रही है।
गाड़ी अपने गंतव्य पर अपने समय से ही पहुंचेगी बंधु और समय वर्षों का नहीं दशकों के लगेगा क्योंकि गाड़ी में 130 करोड़ यात्री सवार हैं।
इसलिये बेवजह की भसड़ ना मचाओ। गाड़ी का ड्राइवर कुशल व्यक्ति है। आराम से सीट पर बैठे रहो और सफर का आनंद लो। हर दिन .....हर वर्ष ....हर दशक .....राष्ट्र को उन्नति करते देखो।🙏🙏
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