अपना सा अचानक ज़िन्दगी में कभी ,
एक अन्जान सा शख्स आता है,
जो दोस्त नहीं, रिश्तेदार नही,हमसफ़र भी नही,
फिर भी दिल को सबसे बहुत अच्छा लगता है,
ढेरों बाते होती हैं उस से,हज़ारों दुख सुख भी बंटते हैं,
जो बातें किसी से नहीं करते थे ,वो भी उस से करते हैं..!!
है तो वो अनजाना सा,पर दिल को बहुत वो,
जाना पहचाना सा लगता है,कोई रिश्ता नहीं उससे ,
फिर भी उसकी हर बात,मानने का दिल करता है,
कोई हक नहीं है उस पर हमारा,
फिर भी उस पर हक जताना,हमको अच्छा लगता है..!!
जब कुछ भी सुनने का मन ना हो तब भी ,
उसको सुनना अच्छा लगता है ,
अजीब बात है कोई रिश्ता नहीं है उससे ,
फिर भी वो अपनो से भी ज्यादा अपना लगता है,
ना होती ख्वाहिश कि किसी बन्धन में बँध जाये हमसे,
फिर भी साथ एक दूजे का मन को बहुत भाता है...!!
अजीब सा आत्मिक रिश्ता दोनो में बन जाता है,
जिसे कोई नाम देने का दिल नहीं करता है ,
पर वो हमारी ज़िन्दगी में एक अहम हिस्सा रखता है,
ये कैसा दिल है हमारा जो साथ उसका चाहता है..!!
मोहब्बत के बिना एहसासों की रवानी क्या होगी,
प्यार नही किया तो जिंदगी की कहानी क्या होगी,
एक मात्र एफ.बी.का दरिया ही ऐसा प्यार का सागर हैं,
जहां बिना देखे,बिना मिले प्यार का रिश्ता बन जाता हैं,
ताउम्र न टूटने वाले एक अटूट बंधन में बंध जाते हैं,
हर सुख दुख बाँटते मोहब्ब्त के कैसे प्यारे रिश्ते हैं....✍️
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