*उस स्थिति का नाम ही ध्यान है।*

*सुबह की शांति से परिचय लें*

*सुबह - सुबह जब तुम लंबी गहरी नींद के बाद ताजा उठे हो* और पूरा जगत जाग रहा है -- पक्षियों ने गाना शुरू कर दिया है, सूर्य उदय हो रहा है -- ऐसे में तुम्हें लगता है कि शांति का कोई क्षण तुम्हें घेर रहा है, तुम्हारे भीतर मौन का कोई अवकाश पैदा हो रहा है, तो उसमें डूब जाओ। किसी वृक्ष के नीचे, किसी नदी के किनारे, या अपने कमरे में ही मौन बैठ जाओ... कुछ भी करना नहीं है। बस भीतर की स्पेस का, अवकाश का मज़ा लो, और यह प्रयास न करो कि यह स्थिति लंबी चले। जब यह स्थिति विदा हो जाये तो उठ जाओ; उसके विषय में भुल जाओ। फिर अपने दूसरे काम में लगो। फिर उसके बाद उस स्थिति की कामना मत करो -- वह अपने आप ही फिर आएगी; वह सदा बिना निमंत्रण के ही आती है। यदी तुम उसके पीछे भागते हो, तो वह गायब हो जाती है। *उस स्थिति का नाम ही ध्यान है।*

एक बार तुम्हें उसका गुर आ गया, तो वह स्थिति फिर-फिर आयेगी। फिर तुम उसके साथ लयबद्ध होने लगते हो। फिर मौन, शांति, स्थिरता की उस अवस्था के साथ तुम्हारा एक प्रेम संबंध बनने लगता है। अंततः यह स्थिति हमेशा बनी रहती है।

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