***भगवान् का पेंटिंग्स***

***भगवान् का पेंटिंग्स***

एक बार भगवान् का पेंटिंग्स बनाने का मन हुआ तो उन्होंने सभी देवताओं को बुलाया और अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए जरुरी इंतजाम करने का आदेश दिया।
अब चूँकि भगवान् पेंटिंग बनाने वाले है तो कैनवास भी बड़ा होना चाहिए और बाकी का सामान भी अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए, इसीलिए पृथ्वी, हवा, जल और अग्नि देवता को सारी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी और सारा सामान विधिवत भगवान् के कमरे में पहूंचा दिया गया।
भगवान ने उत्तर प्रदेश नाम का कैनवास निकाल के उसमें गंगा यमुना सरयू नदियां बनायीं, खुले मैदान बनाये, दूर दूर तक लहलहाते खेत बनाये, फलों से लदे पेड़ बनाये, तालाब बनाये, सर्दी गर्मी बारिश को बराबर से मिलाकर अच्छे मौसम बनाये, और प्रकति के सुन्दर रंग भर के पेटिंग को कम्पलीट कर दिया।
सब देवताओं ने ठेठ गोरखपुरिया भाषा में स्तुति गाकर भगवान् की इस रचना के लिए भूरी भूरी सराहना की, भगवान् ने भी गर्व महसूस करते हुए बलिया, बनारस, जौनपुर की भोजपुरी भाषा में आशीर्वाद भी दिया।
कुछ समय पश्चात् भगवान् का अपनी रचना को फिर से देखने का मन हुआ, रचना निकाली गयी परंतु ये क्या.. नदियां यूँ ही बह रहीं हैं, खेत सूख गए हैं, फल जमीन पर गिर के सड़ गए हैं, प्रकृति के सारे गुणों का ग़ाज़ियाबाद बन गया है। भगवान् को बहुत पीड़ा हुई, ब्रश उठाके जीवों की रचना करने लगे जो बनायीं गयी सारी रचना का उपभोग भी करें और उसका ख्याल भी रखें। सबसे पहले मनुष्य बनाया, उसके खाने के लिये गुटखा खैनी तंबाकू और पीने के लिए बीड़ी चिलम हुक्का आदि की सुन्दर रचना की। ये मनुष्य भगवान् की बाकि सारी पेटिंग्स से जरा हटके था, दिल से तो आजाद था पर गमछे से सदैव ही बंधा हुआ था। इसके गले में गालियों का विशेष प्रबंध किया गया था ताकि ये अपना प्यार दुलार गुस्सा सम्मान सबको बराबर भाव से व्यक्त कर सके।
उसके बाद दूसरे सभी जीव गाय भैंस सांप बिच्छु आदि आदि की रचना की और उनके आवास प्रवास का प्रबंध भी किया, और तो और मनुष्यों को अपना विकास सुनिश्चित करने के लिए समाजवाद के हाथ से बहुजन को कमल चुनने का सुनहरा अवसर भी दिया।
अब चूँकि सारी सामिग्री उत्तर प्रदेश को सँवारने में खर्च हो गयी तो भगवान ने बड़ा दिल रखते हुए अपने खुद के रहने के लिए फटा हुआ तिरपाल चुन लिया, और अपनी रचना पर गर्व करते हुए ध्यान में मग्न हो गए।
कुछ सदियों पश्चात जब भगवान् का जब ध्यान खुला तो उत्साह के साथ अपनी रचना को पुनः देखने लगे, तस्वीर जरा सी मैली जरूर थी पर बड़ी बड़ी इमारतें, पुल, फ्लाईओवर, हाइवेज, रेलवे आदि नये परिवर्तनों से सुसज्जित भी थी। 
सब ठीक ही लग रहा था कि भगवान की नजर कुछ सूअरों पर पड़ी जो पूरे समाजवाद के साथ हाथ मिलाते हुए बड़े धूम धाम से गू खा रहे थे, भगवान् को घोर आश्चर्य हुआ कि मैंने इतनी अच्छी अच्छी चीजें खाने के लिए बनाई हैं फिर भी ये सूअर क्यों खा रहे हैं..?
भगवान् ने अपनी इस शंका के समाधान के लिए उन सूअरों को बुलावा भेजा, सभी सूअर पूरे समाजवाद/नमाजवाद के साथ हाथ थामे हुए उपस्थित हुए और मुलायम स्वर में कभी ना समझ में आने वाली भाषा में नमाज पढ़ी। भगवान् ने अपने क्रोध पर काबू रखते हुए बड़े ही प्रेम से पुछा, भाई इतना सब कुछ मैंने तुम्हे दिया फिर भी तुम सूअर ही क्यों खा रहे हो?
एक सूअर अपने कुर्ते (जिसकी जेब फटी हुई थी)की बाँहें चढ़ा कर बोला, प्रभु हम घोर सांप्रदायिक शक्ति मोदी और योगी को रोकना चाहते हैं और उसके लिए हम हमेशा सूअर भी खाने को तैयार हैं।
और इस बार भगवान् अपनी हंसी नहीं रोक पाये और पेट पकड़ कर हँसते हँसते बिलकुल ठेठ ब्रजभाषा में बोले, लल्लू तू रहन दे तेरे वश की नाएँ और आजीवन टोंटिचोर चुराता फिर और जिहादियों को चाटने का तथास्तु बोल कर अन्तर्ध्यान हो गये 
#यूपीचुनाव #महागठबंधन

Comments