जो हमें दिखाई पड़ रहा है, वह सिर्फ एक्वेनटेंस है, कामचलाऊ, सत्य नहीं है।

लीबनिज हुआ एक बहुत बड़ा गणितज्ञ और विचारक। उसने आदमी के लिए एक शब्द दिया है, मोनोड। वह कहता है, हर अदमी एक बंद मकान है, जिसमें कोई द्वार-दरवाजा खिड़की भी नहीं है। मोनोड का मतलब है, विंडोलेस सेल-एक बंद मकान, जिसमें कोई खिड़की नहीं है, जिसमें से घुस जाओ और भीतर जाकर जान लो कि क्या हो रहा है। आप प्रेम से भरे हैं। क्या करें  कि हम आपके प्रेम को जान लें बाहर से? कोई उपाय नहीं है। कोई उपाय नहीं है। निर-उपाय है।
तो बर्ट्रेंड रसेल ने दो शब्द बनाये हैं। एक को वह कहता है नालेज, और एक को कहता है एक्वेनटेन्स। एक को कहता है ज्ञान, और एक को कहता है परिचय।
 एक मजाक मैने सुनी है। एक वैज्ञानिक ने एक बहुत सुंदर स्त्री से विवाह किया। और जा कर अपने मित्रोँ से, वैज्ञानिकोँ से कहा कि बहुत सुंदर स्त्री से प्रेम किया है। वैज्ञानिकोँ ने कहा, ठीक से देख भी लिया है? खुर्दबीन लगाई थी कि नहीँ? क्योंकि भरोसा क्या है! उसने कहा, क्या पागलपन की बात करते हो? कहीं स्त्री के सोंदर्य को खुर्दबीन लगा कर देखा जाता है! उन्होंने कहा, तुम ले आना अपनी सुंदर स्त्री को। 
मित्र सिर्फ, मजाक में, मिलाने ले आया। उन सबने एक बड़ी खुर्दबीन रखी, सुन्दर स्त्री को दूसरी तरफ बिठाया। उसके पति को बुलाया कि जरा यहाँ से आकर देखो। देखा तो एक चीख निकल गई उसके मुह से! क्योंकि उस तरफ तो खाई-खड्डे के सिवाय कुछ दिखाई नहीं पड़ता था। सुन्दर स्त्री के चेहरे पर इतने खाई-खड्डे!
जो हमें दिखाई पड़ रहा है, वह सिर्फ एक्वेनटेंस है, कामचलाऊ, सत्य नहीं है। सत्य का दिखाई देने से कुछ लेना देना नहीं है।

ठाकुर की कलम से

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