"कौन सी चीज है जो हमें बांधे हैं जिसके कारण हम पशु हो जाते हैं?"🏵️🙏•••°°•••🙏🏵️

"कौन सी चीज है जो हमें बांधे हैं जिसके कारण हम पशु हो जाते हैं?"🏵️🙏•••°°•••🙏🏵️

आदमी भी होना कठिन है, परमात्मा तो दूर की मंजिल है। लेकिन यह भी आपसे कहूं, जो आदमी हो जाता है उसके लिए परमात्मा की मंजिल भी बहुत निकट हो जाती है। कौन सी चीज है जो हमें बांधे हैं जिसके कारण हम पशु हो जाते हैं?

एक छोटी सी कहानी से शायद इशारा ख्याल में आ सके कि कौन सी चीज हमें बांध हुए है, कौन चीज के इर्द गिर्द हम जीवन भरी घूमते हैं और नष्ट हो जाते हैं। कुछ ऐसी चीज है जिसके पीछे हम पागल की तरह चक्कर लगाते हैं और व्यर्थ नष्ट हो जाते हैं।:

-:•:-  एक जंगल के पास एक छोटा सा गांव था।

और एक दिन सुबह एक सम्राट शिकार खेलने में भटक गया और उस गांव में आया। रात भर का थका मांदा था और उसे भूख लगी थी। वह गांव के पहले ही झोपड़े पर रुका और उसे झोपड़े के बूढ़े आदमी को कहा, क्या मुझे दो अंडे उपलब्ध हो सकते हैं?

थोड़ी चाय मिल सकती है? उस बूढ़े आदमी ने कहा: जरूर, स्वागत है आपका! आइए! वह सम्राट बैठ गया उस झोपड़े में। उसे चाय और दो अंडे दिए गए। नाश्ता कर लेने के बाद उसने पूछा कि इन अंडों के दाम कितने हुए उस बूढ़े आदमी ने कहा: ज्यादा नहीं, केवल सौ रुपये। सम्राट तो हैरान हो गया।

उसने बहुत महंगी चीजें खरीदी थीं, लेकिन कभी सोचा भी नहीं था कि दो अंडों के दाम भी सौ रुपये हो सकते हैं। उस सम्राट ने उस बूढ़े आदमी को पूछा: क्या इतना कठिन है अंडे का मिलना यहां?

वह बूढ़ा आदमी बोला: नहीं, अंडे तो बहुत मुश्किल नहीं हैं, बहुत होते हैं, लेकिन राजा मिलना बहुत मुश्किल है।

राजा कभी कभी मिलते हैं। उस सम्राट ने सौ रुपये निकाल कर उस बूढ़े को दे दिए और अपने घोड़े पर सवार होकर चला गया।

उस बूढ़े की औरत ने कहा, कैसा जादू किया तुमने कि दो अंडे के सौ रुपये वसूल कर लिए। क्या तरकीब थी तुम्हारी?

उस बूढ़े ने कहा, मैं आदमी की कमजोरी जानता हूं। जिसके आसपास आदमी जीवन भर घूमता है वह खूंटी मुझे पता है। और खूंटी को छू दो और आदमी एकदम घूमना शुरू हो जाता है।

मैंने वह खूंटी छू दी और राजा एकदम घूमने लगा।

उसकी औरत ने कहा, मैं समझी नहीं। कौन सी खूंटी? कैसा घुना? उस बूढ़े ने कहा, तुझे मैं एक और घटना बताता हूं अपनी जिंदगी की। शायद उससे तुझे समझ में आ आए।

जब मैं जवान था तो मैं एक राजधानी गया। मैंने वहां एक सस्ती सी पगड़ी खरीदी जिसे के दाम तीन चार रुपये थे।

लेकिन पगड़ी बड़ी रंगीन और चमकदार थी। जैसी कि सस्ती चीजें हमेशा रंगीन और चमकदार होती हैं।

जहां बहुत रंगीनी हो और बहुत चमक हो, समझ लेना भीतर सस्ती चीज होनी ही चाहिए।

सस्ती थी लेकिन तब भी बहुत चमकदार थी, बहुत रंगीन थी। मैं उस पगड़ी को पहनकर सम्राट के दरबार में पहुंच गया।

 सम्राट की आंख एकदम से उस पगड़ी पर पड़ी। क्योंकि दुनिया में ऐसे लोग बहुत कम हैं जो कपड़े के अलावा कुछ और देखते हों। आदमी को कौन देखता है?

आत्मा को कौन देखता है? पगड़ियां भर दिखाई पड़ती हैं। उस सम्राट की नजर एकदम पगड़ी पर गई और उसने कहा, कितने में खरीदी है?

 बड़ी सुंदर रंगीन है। मैंने उस सम्राट से कहा, पूछते हैं कितने में खरीदी है? पांच हजार रुपए खर्च किए हैं इस पगड़ी के लिए।

सम्राट तो एकदम हैरान हो गया लेकिन इससे पहले कि सम्राट कुछ कहता, वजीर ने उसके सिंहासन के पास झुककर सम्राट के कान में कुछ कहा।

उसने सम्राट के कान में कहा कि सावधान! आदमी धोखेबाज मालूम होता है। दो चार पांच रुपए की पगड़ी के पांच हजार दाम बता रहा है।

बेईमान है। लूटने के इरादे हैं।

उस बूढ़े ने अपनी पत्नी को कहा: मैं फौरन समझ गया कि वजीर क्या कह रहा है।

 जो लोग किसी को लूटते रहते हैं वे दूसरे लूटने वाले से बड़े सचेत हो जाते हैं। लेकिन मैं भी हारने को राजी नहीं था। मैं वापस लौटने लगा। मैंने उस सम्राट को कहा कि मैं जाऊं?

क्योंकि मैंने जिस आदमी से यह पगड़ी खरीदी है उसने मुझे यह वचन दिया है कि इस पृथ्वी पर एक ऐसा सम्राट भी है जो इस पगड़ी के पचास हजार भी दे सकता है।

 मैं उसी सम्राट की खोज में निकला हुआ हूं? तो मैं जाऊं? आप वह सम्राट नहीं हैं। यह राजधानी वह राजधानी नहीं है। यह दरबार वह दरबार नहीं है जहां यह पगड़ी बिक सकेगी। लेकिन कहीं बिकेगी, मैं जाता हूं।

उस सम्राट ने कहा: पगड़ी रख दो और पचास हजार रुपए ले लो। वजीर बहुत हैरान हो गया। जब और कहा हद कर दी। हम भी बहुत कुशल हैं लूटने में लेकिन यह तो जादू हो गया।

मामला क्या है? तो मैंने वजीर के कामन मग कहा कि तुम्हें पता होगा कि पगड़ियों के दाम कितने होते हैं, लेकिन मुझे आदमियों की कमजोरियां का पता है।

मुझे उस खूंटी का पता है जिसको छू दो और आदमी एकदम घूमने लगता है।

पता नहीं वह बूढ़ी समझा पाई अपने पति की यह बात या नहीं। लेकिन आप समझ गए होंगे। आप पहचान गए होंगे कि आदमी किस खूंटी से बंधा है।

अहंकार के अतिरिक्त आदमी के जीवन में और कोई खूंटी नहीं है। और जो अहंकार से बंधा है वह और हजार तरह से बंध जाएगा।

और जो अहंकार से मुक्त हो जाता है वह और सब भांति भी मुक्त हो जाता है। एक ही स्वतंत्रता है जीवन में, एक ही मुक्ति है, एक ही मोक्ष है और एक ही द्वार है प्रभु का और वह वह है अहंकारी की खूंटी से मुक्त हो जाना।

एक ही धर्म है, एक ही प्रार्थना है, एक ही पूजा है और वह है अहंकार से मुक्त हो जाना।

एक ही मंदिर है, एक ही मस्जिद है, एक ही शिवालय है। जिस हृदय में अहंकार नहीं वही मंदिर है, वही मस्जिद है, वही शिवालय है।

🙏🏵️•{{जय श्री कृष्णा }}•🏵️🙏
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