बाजार में एक चपरासी 15000 में मिलता है सरकार चपरसी को 50000 देती है जब तक ये बराबरी नहीं आएगी नेहरू गांधी की फ़ौज और इसके प्रतीक्षार्थी दोनों रेलों को आग लगाते रहेंगे और रविश कुमार जैसों की रोटियां सेंकती रहेंगी।
● सरकारी नौकरी 😭
सरकारी नौकरी का एक छोटा सा गणित
भारत की कुल सरकारी नौकरियां = 3 करोड़
रिटायरमेंट = नयी भर्ती (जिनमे ज्यादातर कोर्ट केस में फंसी रहती है ) = 3 करोड़ का 10% = 30 लाख
भारत के कुल कामगार (काम करने योग्य लोग ) = 130 करोड़ के 70% = 91 करोड़
सारा भारत इस 91 करोड़ को छोड़कर रोजगार का मतलब इस 30 लाख को ही समझता है
और रविश कुमार जैसों ने इन 30 लाख की बातें कर कर के करोड़ों रुपये बनाये है
नेता आपको इन 30 लाख के लिए रोजाना बेवकूफ बनाते है
सरकारी उपक्रमों के प्राइवेटाइजेशन का विरोध भी इन्ही चुटकीभर नौकरियों के लिए होता है
आरक्षण के लिए और उसके विरोध में आंदोलन करनेवाले इन्हीं 30 लाख के लिए करते है
इन्ही ३० लाख के लिए कोचिंग का बड़ा उद्योग चल निकला है, पेपर लीक का उद्योग भी इन्हीं के कारन है
कारन केवल एक ही है सरकारी नौकरी में कम काम के बदले ज्यादा पैसा और सुविधा मिलना
और इसका इलाज भी एक ही है सरकारी नौकरी में तनख्वा बाजार आधारित होनी चाहिए
बाज़ार में एक ड्राइवर 20000 में मिलता है सरकार ड्राइवर को 70000 देती है
बाजार में एक चपरासी 15000 में मिलता है सरकार चपरसी को 50000 देती है
जब तक ये बराबरी नहीं आएगी नेहरू गांधी की फ़ौज और इसके प्रतीक्षार्थी दोनों रेलों को आग लगाते रहेंगे और रविश कुमार जैसों की रोटियां सेंकती रहेंगी।🙏🙏
ठाकुर की कलम से
Comments
Post a Comment