"" सेक्युलरिज्म से पीड़ित हिंदू समाज""

स्नेही मित्रों!
         यदि किसी इंसान के पेट में लोहे की सरिया घुसकर आर-पार हो जाए तो ये आप भी जानते हो कि...

यदि उस सरिया को एक झटके में खींच कर बाहर निकाल दिया जाए तो वह व्यक्ति तुरंत मर जाएगा।

क्योंकि, सरिया के निकलते ही उसके शरीर के बाहर एवं अंदरूनी भाग से ब्लीडिंग होने लगेगी और उसे बचाना असंभव की हद तक मुश्किल हो जाएगा।

लेकिन, यदि उस सरिया को कोई सिद्धहस्त शल्य चिकित्सक निकालेगा तो सरिया निकल जाएगा और व्यक्ति की जान भी बच जाएगी।

लेकिन, यह काम तुरंत एक झटके में नहीं होगा बल्कि इसमें कुशलता की आवश्यकता होगी और इसमें समय भी लगेगा।

क्योंकि, मरीज को ऑपरेशन थियेटर में ले जाकर सरिया निकालनी होगी और डैमेज अंगों को तत्काल प्रभाव से दुरुस्त करना होगा।

यही काम करने का तरीका है... जिसे आप और हम सिस्टम कहते है।

ठीक इसी प्रकार.... हिंदुस्तान में और यहां की सोच सहित पाठ्य पुस्तकों/इतिहास पुस्तकों में खूनी जेहादी वामपंथी सरिया गहरे तक धंसी हुई हुई है और सेक्युलरिज्म से infect हो चुकी है।

ऐसे में...  यदि इस खूनी जेहादी वामपंथी सरिया अर्थात नैरेटिव को एक झटके में बाहर कर दिया जाए तो देश भर में उथल-पुथल मच जाएगी... 

और, जो वामपंथी नहीं भी है लेकिन वामपंथ के बाउंड्री पर खड़े हैं वे भी वामपंथी खेमे में कूद जाएंगे।

इसीलिए, दाढ़ी वाले बाबा जी माननीय प्रधानमंत्री जी धीरे धीरे हीं इसकी शल्यक्रिया कर रहे है।

हालांकि, इसमें समय लग रहा है लेकिन यही उचित भी है।
 
और हाँ.... आप चिंता मत कीजिए क्योंकि, यह सरकार वामपंथ के इस जहरीले नैरेटिव (सरिया) को उखाड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

समय जरूर ज्यादा लग सकता है लेकिन इतना यकीन जानिए कि दाढ़ी वाले बाबा जी निश्चित ही वामपंथ के नैरेटिव को जड़ समेत उखाड़ कर फेंकेंगे और यदि थोड़े बहुत ये वामपंथी कीड़े बच भी गए तो योगी जी के कार्यकाल में सुसाइड कर लेंगे।

यहाँ एक बेसिक सिद्धांत ये काम करता है कि.... नैरेटिव न तो एक दिन में बनता और न ही एक दिन में मिटता है।

क्योंकि, त्रेता और द्वापर युग में भी धर्मस्थापना हेतु स्वयं भगवान राम और कृष्ण तक को महीनों एवं वर्षों तक तैयारियाँ करनी पड़ी थी।

फिर तो यहाँ एक मानव ही लगा है इस काम में..!

और, हाँ.... धर्मस्थापना का कोई भी काम अकेले नहीं होता है इसमें आप सभी राष्ट्र भक्तों का योगदान आवश्यक है।

रामायण में भी आमजन की सहायता ली गई थी और महाभारत में भी।

इसीलिए, इतिहास को भूलकर आत्मघाती होना... खुद के लिए ही घातक है।

और जहाँ तक बात रह गई ट्रेंड की तो ट्रेंड बताने की आवश्यकता नहीं है बल्कि वो खुद ही दिख रहा है।

कल तक जो भगवान राम को काल्पनिक बताते थे, हिन्दुओं को आतंकी बताते थे, राम सेवकों पर गोलियाँ चलवाते थे और जिनकी नानी बताया करती थी कि विवादित जगह पर मंदिर बनने में भगवान राम खुश नहीं हो सकते।

आज उन सब में होड़ लगी है खुद को सच्चा हिन्दू साबित की, दत्तात्रेय गोत्र का हिन्दू बताने का और दौड़ के अयोध्या में भगवान राम के दर्शन करने का।

ये परिवर्तन तो महज 7 साल में हुआ है।

इसीलिए से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब महज 7 साल में इतना कुछ बदल गया तो 27 साल में क्या हो सकता है।

इसीलिए, धैर्य रखें...

क्योंकि, धीरज का फल मीठा होता है
अन्यथा आप भी जानते है तुनकमिजाज दम्पति का घर कभी नही बसता।

अतः अगर घर बसाने के लिए गंभीर हों तो तुनकमिजाजी से परहेज करें।

जय भवानी
जय शिवाजी
#जय_हिंदू_राष्ट्र
ठाकुर की कलम से🙏

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