खूनी इस्लामिक आतंकवादियों/ जेहादियों/आक्रांताओं से त्रस्त _*Kashmir*_
कल कश्मीर के पीर पंजाल क्षेत्र में 5 भारतीय सैनिकों की शहादत हुई
इससे पहले इस सप्ताह में श्रीनगर में आंतकवादियों ने 7 गैर मुस्लिम लोगों की हत्या की जिनमें स्कूल की प्राधानाध्यापिका सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की करीब से गोली मारकर हत्या कर दी थी. कौर श्रीनगर की रहने वाली सिख थीं,
जबकि चंद जम्मू निवासी हिंदू थे. कौर और चंद के अलावा प्रमुख कश्मीरी पंडित और श्रीनगर में सबसे चर्चित दवा की दुकान के मालिक और बिहार के रहने वाले उस व्यक्ति की हत्या कर दी जिसने दशकों तक कश्मीर में कश्मीरी लोगों के लिए सबसे सस्ती और अच्छी दवा उपलब्ध करा कर लाखों कश्मीरियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखा , श्रीनगर रेहड़ी लगाने वाले व्यक्ति की भी आतंकवादियों ने इस सप्ताह की शुरुआत में हत्या कर दी थी.
प्रश्न यह उठता है कि अचानक एकाएक कश्मीर का माहौल फिर से खूनी क्यों हो गया???
इसका जवाब है कि कश्मीर में जो था वह तूफान से पहले आने वाली खामोशी थी
25 फरवरी को पाकिस्तान ने बॉर्डर पर संघर्ष विराम का स्वांग रचा
हुआ भी यही कई महीनों से बॉर्डर पर एक भी गोली नहीं चली लेकिन इसी शांति का फायदा उठाकर पाकिस्तान ने अपनी सेनाओं को अफगानिस्तान में सक्रिय कर दिया और जब वहां तालिबान सरकार बना दी गई तो फिर पुन्हः पाकिस्तान कश्मीर में सक्रिय हो गया
अगर यह बोले कि भारतीय हुक्मरान फिर से गुमराह हो गए तो यह गलत न होगा है
अगर भारतीय सेना पाकिस्तान को उसके पूर्वी बॉर्डर पर इंगेज्ड रखती तो शायद पाकिस्तान अपनी पश्चिमी सीमा पर ज्यादा ध्यान ना दे पाता
इसी दौरान पाकिस्तान ने कश्मीर में पुनः अपना आतंकी नेटवर्क नई योजना के तहत तैयार कर लिया किस योजना में भारतीय सेना के साथ साथ मुख्यधारा में आने वाले कश्मीरी पंडित और गैर मुस्लिमों को शामिल कर घाटी में भय का माहौल उत्पन्न करने की योजना बना ली
बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि हमारे देश के नीति निर्माता , बुद्धिजीवी यह भूल जाते हैं कि हम एक विचारधारा के विरुद्ध युद्ध लड़ रहे हैं
किसी व्यक्ति या देश के विरुद्ध नहीं
हमने सदियों से अपने राष्ट्र में एक जहरीला सर्प को पोषित किया है और जब जब मौका आएगा वह हमें डसने से कभी नहीं चूक सकता
व्यक्ति बदल सकते हैं देश बदल सकते हैं लेकिन वह जहरीली विचारधारा कभी नहीं बदल सकती जो आज विश्व के लगभग एक तिहाई राष्ट्रों की मूल संस्कृति का समूल नाश कर चुकी है
👉किसी ने सच ही कहा है जो अपने इतिहास को नजरअंदाज करता है उसका वर्तमान और भविष्य दोनों ही अंधकारमय रहता है
सिख धर्मावलंबियों ने कट्टर इस्लामिक विचारधारा से ग्रसित शासकों के सामने कुर्बानियां देने के बाद भी
गुरु गोविंद सिंह जी ने औरंगजेब के मरने के बाद बहादुर शाह का साथ दिया और सहिष्णुता की भावना रखते हुए अपने नौकरों में मुस्लिमों को भी रखा इसका परिणाम यह हुआ की एक पठान नौकर ने ही गुरु गोविंद सिंह की हत्या कर दी
भारत तो वह देश है जिसने विषैले सर्पो को भी दूध पिलाया है
फिर इंसानों की बात तो छोड़ ही दीजिए
भारत में गैर हिंदुओं की भावना और उनकी ख्वाहिशों का हमेशा ध्यान रखा गया
जिसका एक छोटा सा उदाहरण है नए-नए मध्य प्रदेश राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने हिंदी वर्णमाला में 'ग' से गणेश हटाकर 'ग' से गधा कर दिया क्योंकि वह बच्चों की हिंदी पाठ्यपुस्तक में धर्मनिरपेक्षता ला कर पंथ विशेष को खुश करना चाहते थे
डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे और वहां किसी हिंदू देवी देवता का पाठ्यक्रम में होना उचित नहीं माना जाता था
और उन्हें लगता था कि 'गणेश' शब्द से अल्पसंख्यकों की भावना आहत होंगी
भारतीय नीति निर्माताओं ने धर्म के आधार पर अगर किसी की धार्मिक भावनाओं से उदासीनता रखी है तो वह बहुसंख्यक है ना कि अल्पसंख्यक लेकिन उसका परिणाम क्या हुआ?
आजादी के 24 घंटे पूर्व भी इस देश के दो टुकड़े हो गए
लाखों लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी दी
देश की सेना 7 दशकों से एक अघोषित युद्ध लड़ रही है
अपने ही राष्ट्र में कश्मीरी पंडित निर्वासितों की जिंदगी जी रहे हैं
आज जो भी घटनाएं देश में घट रही है उसके जिम्मेदार हम स्वयं हैं
हमें अपनी राष्ट्रवादी भावना और संस्कृति के साथ कभी समझौता नहीं करना चाहिए
कश्मीर में हमें 1:5 की नीति का पालन करना चाहिए
अगर कश्मीर में हमारा कोई एक सैनिक शहीद होता है
तो उसी दिन कम से कम एक पाकिस्तान का सैनिक , कम से कम एक आतंकवादी, एक आतंकवादियों का समर्थक, एक आतंकवादी विचारधारा का समर्थक, एक आतंकवादी विचारधारा का समर्थक राजनीतिक खत्म कर देना चाहिए
याद रखना होगा कि अगर हम सुरक्षात्मक ही बने रहे तो विषैली विचारधारा हमारे ऊपर हमेशा आक्रमक रहेगी हमें सुरक्षात्मक नहीं हमें आक्रामक होना पड़ेगा
अगर हमें अपने राष्ट्र को बचाना है तो निश्चित ही हमें राष्ट्रवादी भावना का अनुसरण फ्रांसीसी और इजराइलियों की तरह करना पड़ेगा
हमें अपनी संस्कृति का पोषण इजराइल की तरह करना होगा
एक राष्ट्र के रूप में 500 वर्ष कुछ नहीं होते और विगत 500 वर्षों में हमने अपने राष्ट्र के कई टुकड़े होते देखे हैं
अगर हम अपने इतिहास से कुछ नहीं सीखें तो आने वाले 100 - 200 वर्ष बाद हमारी संतति एक ऐसे देश में रहने के लिए मजबूर होंगे
और वह भी उन्हीं हिंदुओं की तरह अपने भाग्य और अपने पूर्वजों को कोसेंगी जैसे आज हिंदू पाकिस्तान , अफगानिस्तान , बांग्लादेश में अपने भाग्य और पूर्वजों को कोस रहें है
बहुत-बहुत धन्यवाद
🚩जय श्री राम🚩
_जय हिंद जय भारत_
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