अगर पोरस ने सिकंदर को भागने देने के बजाए... उसे मार दिया होता तो आज इतिहास दूसरा होता.
अगर जयचंद ने मुहम्मद गोरी का साथ ना दिया होता...
तो, आज भारत का इतिहास दूसरा होता.
अगर पृथ्वीराज चौहान ने गोरी को माफ न कर के पहले ही युद्ध में मार दिया होता...
तो, भी इतिहास दूसरा होता.
अगर राणा सांगा ने युद्ध में बाबर को मार दिया होता...
तो, भी इतिहास दूसरा होता.
अगर ... सुभाषचंद्र बोस ने अंग्रेजों से युद्ध जीत लिया होता..
तो, भी इतिहास दूसरा होता.
इतना ही क्यों... देश के बंटवारे के बाद अगर गांधी जी ने समझौते के अनुसार सभी मुसलमानों को पाकिस्तान भेज दिया होता और वहां से सारे हिन्दुओं को भारत बुला लिया होता..
तो, भी आज ये मुसीबत नहीं हुई होती.
आजादी के बाद अगर नेहरू की जगह पटेल प्रधानमंत्री बने होते..
तो भी, आज ये मुसीबत ना हुई होती.
अगर संविधान में सिर्फ एक लाइन... " India that is called bharat is a Hindu Rashtra" भी लिख दिया होता.. तो, सारे मुसीबत ही समाप्त हो गए होते.
लेकिन, दुर्भाग्य ये सब कुछ नहीं हो सका.. और, उन सबका परिणाम हमारे सामने है कि 20 करोड़ भेड़िए हमारे सिर पर चढ़ के नाच रहे हैं.
हम इतिहास को बदल तो नहीं सकते हैं और न ही किसी टाइम मशीन में जाकर उस परिस्थिति को बदल सकते हैं.
साथ ही ... हमें ये नहीं समझ है कि उस समय की क्या परिस्थिति रही थी और किस परिस्थिति में हमारे नायकों ने ऐसा फैसला लिया था...
लेकिन, हाँ... हम अपने इतिहास में की गई गलतियों/लापरवाहियों से सीख सकते हैं कि उस समय की छोटी-छोटी गलतियों की आज तक कितनी बड़ी कीमत चुका रहे हैं हमलोग.
और... आज हमारे इतिहास को रिव्यु समझने का समय है.
आज देश बदल रहा है...
आज प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति आवास में इफ्तार की जगह कन्या पूजन हो रहा है..
और, नवरात्र के उपवास रखे जा रहे हैं.
स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हज सब्सिडी बन्द कर दी गई है.
पिस्लामी जबड़े से ... कश्मीर और अयोध्या को छीन लिया गया है.
असम में मदरसे बन्द करने के आदेश पारित हो चुके हैं.
सारे कटेशरों और उनके समर्थकों में खलबली मची हुई है...!
ये ठीक वैसा ही है...जब हेमू... अकबर से युद्ध में काफी भारी पड़ रहा है और अगर युद्ध जारी रहा तो निश्चय ही जीत हेमू की ही होगी और मुगलिया सल्तनत के पैर उखड़ जाएंगे...!
लेकिन, इन सबके बीच सिर्फ... एक ही डर लग रहा है कि... कहीं अपनों के ही उतावलेपन के कारण हेमू के आंख में तीर ना लग जाये...
और, हम हम जीतता हुआ युद्ध कहीं हार ना जाएँ...!
और, जहाँ तक बात रह गई कि मोदी ने ये नहीं किया... वो नहीं किया.
तो, उसका बहुत ही आसान सा जबाब है कि.... आप ग्लास को आधा खाली देख रहे हो और मैं ग्लास को आधा भरा हुआ.
इसीलिए, अगर कोई इस युद्ध में सहयोग न कर सकता है...
तो, ना सही..
लेकिन, उतावलेपन में हेमू की आंख में तीर मारने की गलती ना करें.
क्या पता कि... अभी वर्तमान में हम कुछ बातों को लेकर मोदी का विरोध कर रहे हैं और उन्हे हराने की बात कर रहे हैं...
लेकिन, भविष्य में फिर कोई लिखेगा कि "अगर भारत में मोदी /BJP की सरकार 10-15 साल और रह गई होती तो आज भारत का इतिहास दूसरा होता."
क्योंकि, जो चीज बड़ी होती है वो नजदीक से सम्पूर्ण रूप में नहीं दिखती है.
बड़ी चीज को पूरी तरह सम्पूर्ण रूप में देखने के लिए दूरी की जरूरत होती है.
और, देश एवं धर्म के संदर्भ में वो दूरी... *"समय"* है!
🙏
वाह, बहुत बढ़िया लिखे हो।
ReplyDeleteएक बार मेरे ब्लॉग पर भी नजर डालिए।
rashtrachintak.blogspot.com
जी धन्यवाद मित्र
DeleteAll the contents narrated are complete reality.
ReplyDeleteThanks Sir
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