मेढंकी की जीवन रक्षा :----
महाराष्ट्र के शेर, हिन्दू हृदय सम्राट छत्रपति शिवाजी के राज्य में एक बार भयंकर अकाल पड़ा। पेड़-पौधे, नदी-तालाब सूखने लगे। फसलें नष्ट हो गईं।
★(वैसे ही आज भारत में कोरोना महामारी फैलने का अंदेशा है।)
प्रजा जनों के कष्ट को देखते हुए, छत्रपति शिवाजी ने काम के बदले अनाज की योजना प्रारम्भ की। कुएँ तालाब खुदवाए जाने लगे। नदियों पर बांध बनवाये जाने लगे। काम करने वालों को बदले में भंडार से अन्न दिया जाने लगा।
★ ( उसी प्रकार आज राज्य सरकारों ने मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, क्वारंटाइन, लॉक डाउन, ट्रेन,बस, हवाई जहाज तक बंद कर दिया )( आगे भी वही करने वाले हैं )
चारों ओर छत्रपति शिवाजी की जयजयकार होने लगी। प्रशंसा होने लगी कि महाराज कितने दयालु हैं अगर ये न होते तो हजारों लोग इस भयंकर अकाल में मृत्यु को प्राप्त हो जाते। धन्य हैं महाराज छत्रपति शिवाजी जिन्होंने सबकी प्राणरक्षा की।
( आज भी, राज्यों के मुख्यमंत्री, अस्पताल, पुलिस-प्रशासन - कोरोना वारियर्स की जय जयकार हो रही है )
यह प्रशंसा धीरे धीरे महाराज के कानों तक पहुँचने लगी। महाराज सुनते थे, मन ही मन आत्मसंतोष होता चलो मेरे द्वारा इतने लोगों की प्राणरक्षा हुई।
प्रशंसा होती रही, महाराज के कानों तक पहुँचती भी रही। अब छत्रपति शिवाजी के मन मे ये बात बैठ गयी कि यदि मैं न होता, मैंने काम के बदले अनाज योजना न शुरू की होती तो हजारों लोग मृत्यु के ग्रास बन गए होते।
आत्मसंतोष का भाव कब आत्मप्रशंसा से बढ़ते बढ़ते अहंकार में परिणित हो गया, पता ही न चला।
एक दिन महाराज दरबार मे बैठे थे तभी द्वारपाल ने आकर सूचना दी, " महाराज ! आपके गुरुदेव, समर्थ स्वामी रामदास जी पधार रहे हैं। "
महाराज तुरंत सिंघासन से उतर कर, महल के द्वार पर गुरुदेव की अगवानी के लिए पहुँचे।
चरणस्पर्श कर आदरपूर्वक दरबार में ले कर आये और समर्थ स्वामी रामदास जी को राजसिंहासन पर बैठा दिया। स्वयं समीप के आसन पर विराजमान
हो गए।
समर्थ स्वामी ने कुशल समाचार पूछा, " कहो शिवा ! सब कुशल मंगल है न ? तुम्हारे राज्य में प्रजाजन कुशल से हैं न ? "
छत्रपति शिवाजी, राज्य में फैले अकाल के विषय में बताने लगे कि कैसे चारों ओर सूखा और अकाल के चलते फसलें नष्ट हो गयी थीं, कैसे उन्होंने प्रजा को भुखमरी से बचाने के लिए काम के बदले अनाज की योजना शुरू की थी।
कुएँ- तालाब खुदवाए, नदियों पर बाँध बनवाये जिससे हजारों लोगों की प्राणरक्षा हुई थी। यह बताते हुए छत्रपति के चेहरे पर कुछ गर्व- अहंकार भी झलक रहा था।
समर्थ स्वामी रामदास यह समझ गए कि शिष्य के अहंकार को दूर करना आवश्यक है अन्यथा यह अहंकार उसके पतन का कारण बन जायेगा।
बोले, " शिवा ! ये तो तुमने बहुत प्रशंसनीय कार्य किया है, तुमने हजारों लोगों की प्राणरक्षा की है। चलो तो देखें तुमने कौन कौन से तालाब, बाँध इत्यादि बनवाये हैं।
महाराज, अपने मंत्रियों , कुछ सैनिकों को लेकर गुरुदेव के साथ चल दिये। एक बाँध पर सब लोग चले जा रहे थे। शिवाजी उसके विषय में बता रहे थे। तभी
गुरुदेव की नजर बाँध के एक किनारे पड़े एक बड़े से पत्थर पर पड़ी।
तुरंत शिवाजी से बोले, " शिवा ! देखो तो ! उस बड़े पत्थर को तुड़वाओ जरा। "
एक सैनिक हथौड़ा ले आया। हथौड़े से पत्थर तोड़ने लगा। 5 --7 हथौड़ा मारने पर पत्थर बीच से दो टुकड़े हो गया ।
पत्थर टूटते ही सब आश्चर्य में पड़ गए !
पत्थर भीतर से खोखला था, उसमें थोड़े पानी में एक मेंढकी तैर रही थी।
गुरु बोले, " शिवा !! इस मेंढकी की प्राणरक्षा भी तुम्हीं ने की होगी ???? "
★ छत्रपति शिवाजी का हजारों लोगों की प्राणरक्षा करने का अहंकार रूपी भ्रम टूट गया।
★ जीवन-मृत्यु सब ईश्वरीय चेतना के खेल हैं। सब की प्राणरक्षा करने वाला वह परमात्मा ही है जिसने पत्थर के उस खोखले स्थान में जल पहुँचा कर उस मेंढकी की प्राणरक्षा की थी। हम सब तो निमित्त मात्र हैं। कर्त्तव्य पालन के लिए।
छत्रपति शिवाजी सद्गुरु के श्री चरणों मे नतमस्तक हो गए ।
★छत्रपति शिवाजी तो ये बात समझ गए थे पर आज के प्रधानमंत्री, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों के मुख्यमंत्री ये बात नहीं समझते।
★वे स्वयं को भगवान माने बैठे हैं, मानो उनके न होने पर, देश की जनता का विनाश हो जाएगा।
★इसीलिये मास्क के नाम पर 500 से ले के 2000 ₹ जुर्माना, जेल ( क्वारन्टीन), बाजार बंद, मंदिर बंद, दशहरा, दीवाली बंद, लाठी डंडों से पिटाई से लेकर गोली चलाने तक ( मुंगेर में दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर गोली चलाना ) आम जनता पर तरह तरह के अत्याचार कर रहे हैं। जनता के जीवन के ठेकेदार बने हुए हैं।
अब बहुत हो गया !!!!!
जबकि जिस परमात्मसत्ता ने हजारों साल से श्री जन जन की रक्षा की है, वही आगे भी करेगा, करता रहेगा क्योंकि वो वचनबद्ध है -
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत,
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम ।
जय सनातन धर्म।
पुनश्च........
★ कोरोना के नाम पर देश की आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक गतिविधियों को लॉक डाउन के नाम पर बंधक बना दिया गया ट्रेन,बस, हवाई जहाज , कल कारखाने सब बंद होगये करोड़ों की रोजी रोटी मारी गयी ,
कुछ नहीं बहुत गड़बड़ है !!!!
★ कोरोना को इन निकम्मी राज्य सरकारों ने महामारी बना दिया।
★पाकिस्तान में कोई लॉक डाउन, सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क के बिना महामारी नहीं फैली ???
जरा सोचियेगा !!!!!
★अगर मास्क कारगर है तो 6 फिट की दूरी क्यों ?
★अगर 6 फिट की दूरी कारगर है तो मास्क क्यों ?
★अगर यह दोनो कारगर है तो लाक डाउन क्यों ?
★अगर यह तीनो कारगर है तो वेक्सिन क्यों ?
★अगर वेक्सिन कारगर है तो फिर वेक्सिन से मौत क्यों ?
★वैक्सीनेशन के बाद भी कोविड पॉजिटिव क्यों ?★वैक्सीनेशन के बाद मौत होने पर जिम्मेदारी किसकी ?
★अगर इसके बाद भी वैक्सीन सच में कारगर है तो फिर से लाक डाउन , नाइट कर्फ्यू क्यों ?
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