*""सेकुलर सोच वालों की कायरों वाली मौत सुनिश्चित""*
#जो व्यक्ति सायनाइड को रक्त दान कर रहा था और यह अपेक्षा रखता है की सायनाइड कल को पवित्र वस्तु बन जाएगी उसकी यही गति होनी है। मुझे रिंकु जी के परिवार से कोई सहानुभूति नहीं है और उन सभी लोगों से जो सायनाइड से रोज़मर्रे का व्यवहार रखते हैं और उनको अपने बेड रूम में घुसाते रहते हैं।
आपके हमारे घर में यदि वे घुसेंगे तो हमारी आपकी दादी से लेकर हमारे आपकी पोती तक सुरक्षित नहीं है । यह अतिशयोक्ति नहीं लिख रहा। मुझे उस संस्था के भोले भाले लोगों पर तरस आता है जो स्वंयम व्यक्तिगत रूप से सहज और सरल हैं पर उनकी संस्था, सायनाइड से चंदा लेकर, गंगा जमुनी तहज़ीब की नयी झंडाबरदार बन रही है।
पृथ्वी राज चौहान की सीख,अपने जीवन में उतारने के लिए है , पोथी की वस्तु बनाने के लिए नहीं । अत: क्षमा करना मित्रों! सोए को तो जगाया जा सकता है पर सेकुलरता के चूरन चाटे को नहीं बचाया जा सकता।
कल हो सकता है कि कोई वैज्ञानिक विधि निकल आए जो सायनाइड का भी स्वाद बता पाए और उसको खाद्य भी बना पाए पर उस अरबी विकृति का कोई निदान नहीं है सिवाय उनकी संपूर्ण उपेक्षा करके उनकी कमर तोड़ने के और स्वयम् संगठित होकर प्रबल प्रतिकार करने से -
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