।। फ़ासीवाद आ रिया है ।।

।। फ़ासीवाद आ रिया है ।।

चरस को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
मदक को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
मदकचिओं को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 

चिलम को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
चमेलियों को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
बाटली को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
नमकीन को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 

हरामख़ोरीयों को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
हरामुद्दहर को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 

अनजान यात्रियों पर पत्थरबाज़ी को 
फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
शहर में आग लगाते अमनपसंदों को  
फ़ासिस्टों से ख़तरा है  
भारत की बर्बादी के स्वप्नदर्शियों को 
फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
महल्ले के हर शोहदे को 
फ़ासिस्टों से ख़तरा है 

कान में फुसफुसाते अय्यारों को 
फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
कैमरे पर थूकते पत्रकारों को 
फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
चुप्पी लगाए हर्राफ़ों को 
फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
लश्करों को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
तस्करों को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 

एड़ों को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
चिकनों को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
बुलबुलों को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
बुलबुली को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
बुद्धिजीवियों को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
बुद्धिबीवियों को फ़ासिस्टों से ख़तरा है 

क्या यही लोग 
लोग हैं 
क्या यही लोग 
देश हैं 
क्या इन्हीं की मनुष्यता 
मनुष्यता है 
क्या इन्हीं का कुकर्म 
लोकतंत्र है 

अब तो बच्चे पूछने लगे हैं 
अम्मा 
जब इन सबको फ़ासिस्टों से ख़तरा है 
तो फ़ासिस्ट होते कैसे होंगे ?

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