उसके होंठो की लिपस्टिक में
जहर बसता है
या ख़ुदा..
मेरे होंठ चूमे जाने के इंतजार में
हर रोज़ मरता है
उसके होंठो का लगाया
ग्रहण कभी हटा नहीं
कि मेरे सीने में अटका सूरज
फ़िर क़भी जला नहीं
मेरा न होना तुम्हें किस कदर परेशान करेगा
जैसे किसी दिन सुबह जगो और न मिले व्हाट्सएप्प पे मेरा कोई मैसेज
कॉल लॉग में स्क्रॉल करने पे भी न दिखे मेरा नंबर
तुम्हारे गैलरी में रखे मेरे तमाम फ़ोटो में धुंधला हो जाये मेरा चेहरा
और याद न आये तुम्हें फेसबुक पे रखा गया मेरा फेक नाम
कांटेक्ट लिस्ट में मैं तुम्हें दिखु किसी ख़ाली जगह सा,
जिन्हें तुम अक्सर भर नहीं पाती हो
अचानक से तुम भूल जाओ प्रेम में डूबे उन संबोधनों को
जिनसे तुम मुझे बुलाती हो
मेरा न होना तुम्हें किस कदर परेशान करेगा
जब अलग-अलग शहरों से देखते हुए एक ही चाँद
हम गुजार दिया करेंगे अपने-अपने हिस्से की रात
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