प्रतिकार करो

एक प्रयोग करके देखिए । स्वंयम पर ही करके देख लीजिए ।

ठंड पड़ ही रही है भारत में , नहाना बंद कर दीजिए ।

जितने दिन बिना नहाए रह सकते हों रहिए और कपड़े भी गंदे पहनने लगिए । दाढ़ी पीढ़ी भी बढ़ा लीजिए  ( जे एन यू के टुकड़े टुकड़े गैंग टाईप ) । आप सात आठ दिन में कहीं पर गंदगी होगी तो आपको दिखनी बंद हो जाएगी । आपका बिस्तर भी बहुत साफ़ है या नहीं आपको नहीं पता चलेगा कुछ दिनों में ।

यह स्वरूप है , भौतिक गंदगी का । और यही थोड़ा थोड़ा कब व्यक्ति को पतित कर देता है पता नहीं चलता ।

जब शोले सिनेमा में मंदिर में लड़की छेड़ी गयी तो हमने ताली बजायी ।

जब दीवार सिनेमा में नास्तिक हीरो ने बिल्ला नम्बर 786 पहना तो हम उस सिनेमा की गोल्डेन जुबली मना रहे थे ।

जब मक़बूल फ़िदा हमारे देवी देवताओं की फूहड़ चित्रकारी कर रहे थे तो हम कलाकार की कला पर मुग्ध हो रहे थे ।

ध्यान रहे , थोड़ी सी चोरी या थोड़ा तो चलता है वाला एटीट्यूड है तो पतन निश्चित है ।

#तांडव , इन्ही सत्तर वर्षों के हमारे ; चलता है ; सिनेमा है ; अभिव्यक्ति की आज़ादी है ; इत्यादि जुमलों का परिणाम है ।

क्योंकि उनका उद्देश्य यदि समाज सुधार होता तो मुताह हलाला बुर्क़ा बकरी बकरे की जान पर भी सिनेमा बनता या सुबह सुबह के ध्वनि प्रदूषण पर भी वे कभी कुछ दिखाते या बहन से निकाह के बाद पैदा हो रहे पागल संतानों पर भी वेब सीरिज़ बनाते , परन्तु उनका उद्देश्य हमारे अंदर धीरे धीरे कुंठा भरना है ।झूठ परोसना है ।

अभी भी समय है । प्रतिकार हो । और प्रतिकार की गूंज पूरे देश को सुनायी पड़े ।

Comments