हरक्यूलिस की धरती से मिले सिक्के

ये सिक्के भारत से प्राप्त नहीं हुए थे। ये हरक्यूलिस की धरती से मिले थे। वही हरक्यूलिस, जिसके चरित्र की विशेषताएं श्रीकृष्ण की विशेषताओं से मेल खाती है।
गौधन का सम्मान तो सनातन ही कर सकता है।
एक सिक्के में बैल दिखाया गया है। बैल का श्रृंगार देख मुझे दीपावली के बाद के दिनों की स्मृति हो आई, जब गौधन को सजा-सँवार कर गाँव में घुमाया जाता है।
दूसरे सिक्के में गौमाता के दर्शन होते हैं।
इस सिक्के में तो स्वस्तिक भी दिख रहा है।
जब आर्कटिक प्रदेश की भूमि से देव तुल्य अज्ञात रहस्यमयी व्यक्तियों ने वेदों का ज्ञान मौखिक रूप से सुनाया, तो उस ज्ञान को लेकर सनातनी संपूर्ण विश्व में फ़ैल गए थे। पृथ्वी का मूल धर्म सनातन ही था। वह प्रकृति से जुड़ा हुआ था, उसमे कृत्रिमता नहीं थी।
पृथ्वी के नियमों के अनुरूप इस धर्म को विकसित किया गया था।
ये अलिखित नियम था कि इस धरा के सभी प्राणियों का एक ही धर्म होगा।
आज सनातन की बहुत सी फोटोकॉपी आप देख पा रहे हैं लेकिन वे प्राण विहीन है।
आर्कटिक प्रदेश में फूटा सनातन का पहला सोता नितांत दैवीय था।
ये पहली और आखिरी घटना थी, जब सनातन धर्म के पालक इस तरह प्रत्यक्ष रूप से सामने आए थे।
ये बात लोकमान्य तिलक अपने शोध के बाद लिख गए थे।
सिक्के पहली शताब्दी के हैं इसलिए उनका आकार पूर्ण गोल नहीं है। मशीनरी के अभाव में हाथों से ढाले गए चाँदी के सिक्के।
#जय_हिंदू_राष्ट्र

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