#धन्यवाद_सोशलमीडिया।
सन 2013-14 वो चुनावी वर्ष था जब पहली बार देश के सामान्य लोगों के पास सोशल मीडिया जैसा प्लेटफॉर्म मौजूद था, जहाँ वो अपने मन की बातें बेधड़क लिखने लगे थे। पहली बार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया का इस चुनाव में भरपूर उपयोग किया।
देश विदेश से करोड़ों लोगों ने मोदी के पक्ष में माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई और इसी फेसबुक ने देश विदेश में बैठे परिचित, अपरिचित लोगों को आपसी समझ, विश्वास और प्रेम की डोर से बाँध दिया।
जिनसे कभी संपर्क नहीं हो सकता था वो सब आज फेसबुक के माध्यम से एक दूसरे के अभिन्न मित्र, यहाँ तक कि भाई बहन भी बन चुके थे।
देश की जनता यूपीए के निरंकुश रोबोटिक शासन और लूट से त्रस्त थी और मोदी के रूप में उन्हें अपना 'नायक' मिल चुका था। सिर्फ यही नहीं देश के इन्हीं सामान्य लोगों ने गांधी लंपट नेहरू परिवार और कांग्रेस के अनेक कुकर्मों की पोल खोलनी शुरू कर दी। साथ ही कांग्रेस द्वारा पोषित तमाम बुद्धिजीवियों, फिल्मकारों, पत्रकारों की भी पोल खोलनी शुरू कर दी।
जो लिख सकते थे उन्होंने लिखा और जो लिख नहीं सकते थे उन्होंने कॉपी पेस्ट के जरिये व्हाट्सएप से जन जन तक अपनी बात पहुँचानी शुरू कर दी।
जहाँ कांग्रेस प्रियंका की नाक दादी से मिलवाने में लगी थी वहीं देश के ये सामान्य लोग कांग्रेस की ही नाक काटने में दिन रात जुटे हुए थे।
चूँकि सोशल मीडिया पर किसी का कंट्रोल नहीं है तो सही गलत सूचनाएँ, संदेश भी प्रसारित होते रहे लेकिन इससे लाभ ये हुआ कि स्कूल कॉलेज के छात्र हों, गृहिणी हो, किसान हो, छोटे बड़े व्यापारी हों, सामान्य से लेकर ऊँचे पदों पर बैठे लोग हों सभी को समझ आने लगा कि कांग्रेस ने हमसे बहुत कुछ छिपाकर रखा और इतने लंबे शासनकाल में उसके लिए ये कर पाना बेहद आसान भी रहा।
जहाँ देश की जनता कांग्रेस के हिंदू विरोधी कार्य, धर्म परिवर्तन, मुस्लिम तुष्टिकरण, इसाई मिशनरियों को धर्म परिवर्तन की छूट ऐसे अनसुने, अनजान कारगुजारियों को जान रही थी वहीं कांग्रेसी समर्थक तब भी और आज भी केवल गाँधी परिवार का ही झंडा लिए घूम रहे हैं क्योंकि इससे ज़्यादा की न तो उनमें समझ है और न ही इससे आगे जाने की अनुमति है।
बहुत से लोग कभी कांग्रेसी हुआ करते थे लेकिन उन्होंने जब कांग्रेस के इन कारनामों को जाना, कांग्रेस की,गांधी परिवार की कुटिलता को समझा तो उन्होंने भी इनसे किनारा कर लिया। लेकिन जिन्हें गांधी परिवार के सिवाय कुछ समझ नहीं आता वो आज भी चरण चाटने में जुटे हुए हैं।
राहुल गांधी का मखौल खुद राहुल गांधी जानें कितनी ही बार उड़ा चुके हैं और आगे भी उड़ाएंगे इसमें कोई संदेह नहीं है। उसे ये चरणचाट समर्थक देश का प्रधानमंत्री केवल इसलिए बनाने पर आमादा हैं क्योंकि वो गांधी परिवार से है और यही एकमात्र गुण राहुल गांधी में है।
कांग्रेस ने अक्साई चिन भी दे दिया, कश्मीर भी दे दिया, लेकिन कुछ नहीं दिया तो वो है कांग्रेस अध्यक्ष का पद।
कांग्रेस के कारनामें परत दर परत सामने आते जा रहे हैं और इनसे बौखलाए अधिकांश कांग्रेसी सोशल मीडिया पर बेहद हताशा की स्थिति में हैं।
'शाइनिंग इंडिया' की हवा अपने टुकड़ों पर पलने वाले पत्तलकारों से निकलवाने के बाद कांग्रेस ने मोदी से भिड़ने के लिए, उन्हें बदनाम करने के लिए सिर्फ अपनी चरण वंदना के कारण कृपापात्र बनाये गए बुद्धिजीवियों, फिल्मकारों, साहित्यकारों का साथ लिया और अवॉर्ड वापसी जैसा कार्यक्रम चलाया जिसकी बड़ी बेदर्दी से हवा मोदी समर्थकों या तथाकथित 'भक्तों' ने निकाल दी।
इसके बाद भी कांग्रेस ने ऐसे अनेक प्रायोजित कार्यक्रम चलाये लेकिन हर कार्यक्रम के गुब्बारे में छेद मोदी भक्तों ने कर डाला। ये भक्त और कोई नहीं देश के वो लोग थे जो देश के सिस्टम को, कार्यप्रणाली को, राजनीति को बदलते देखना चाहते थे। जो आज भी भाजपा के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं लेकिन अपनी जेब से नेट और अपना समय खर्च करके भाजपा/मोदी के लिए लिखते हैं जिन्हें कांग्रेस समर्थक और खुद कांग्रेस पार्टी भी भाजपा आईटी सेल का कोई सदस्य मानती है जो कि पैसा लेकर ये काम करता है।
देश के इन्हीं सामान्य लोगों ने खुद को सत्ता का केंद्र समझने वाले मेनस्ट्रीम मीडिया यानी न्यूज़ चैनलों और अखबारों के मालिकों, पत्रकारों तक को हिला डाला। देश के कोने कोने से अपनी लेखनी और खोजी दिमाग के चलते लोगों ने इन सबकी असलियत जनता के सामने बतानी शुरू की, जिसका नतीजा ये हुआ कि अब यही मेनस्ट्रीम मीडिया देश के इन लोगों से घबरा उठा।
पिछले दिनों अमेरिका के प्रतिष्ठित (?) अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के दो पत्रकारों न्यूली पुरनेल और जेफ होरविट्ज़ ने एक एक रिपोर्ट छापी जिसमें उन्होंने दावा किया कि फेसबुक भाजपा नेताओं, पार्टी का समर्थन करता है और उनके नेताओं की हेट स्पीच को फेसबुक हटाता नहीं है। यहाँ ये उल्लेखनीय है कि न्यूली पुरनेल भारत में भी कुछ समय के लिए नौकरी कर चुके हैं लेकिन इनका कांग्रेस से कोई लिंक फिलहाल सामने नहीं आया है।
चूँकि फेसबुक पर लिखने वाले अधिकांश भाजपा मोदी समर्थक है इसलिए इसे एकतरफा रिपोर्टिंग मानी जाए तो गलत नहीं होगा।
सोशल मीडिया से जली भुनी कांग्रेस के लिए ये रिपोर्ट किसी संजीवनी बूटी की तरह थी और जैसे ही रिपोर्ट छपी कांग्रेस ने इसे हाथोंहाथ उठाया और इस पर खूब प्रेस कॉन्फ्रेंस की, फेसबुक को जमकर कोसा और हर बार की तरह अपना सारा दोष फेसबुक के मत्थे मढ़ दिया।
अपने गिरेबान में झाँकने की बजाय कांग्रेस ने खुद को शुतुरमुर्ग बना लिया जिसने रेतीले तूफान से बचने के लिए रेत में अपना सिर घुसा दिया है और मन ही मन सोच लिया है कि तूफान नाम की कोई चीज़ है ही नहीं।
आज कांग्रेस के तमाम नेता अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं, अक्सर टीवी चैनलों पर गरमगरम बहसों को भी देखा जाए तो आप पाएंगे कि कांग्रेस प्रवक्ताओं या कांग्रेस समर्थित प्रवक्ताओं के पास सिर्फ कुतर्क और झूठ ही होते हैं।
यही वजह है कि अधिकांश न्यूज़ एंकर भी जब उनसे सवाल जवाब करते हैं तो उन्हें लगता है कि वो भी भाजपा के पक्ष में बात कर रहे हैं लेकिन ये समझने को तैयार नहीं है कि उनकी बातों, तर्कों में कोई दम नहीं है और कई उम्रदराज नेताओं को भी टीवी डिबेट्स में बगलें झाँकनी पड़ती है, मुँह की खानी पड़ती है।
कांग्रेस के 70 वर्षों के तिलिस्म को देश के बेहद सामान्य लोगों ने मात्र 7 वर्षों में ही तोड़कर रख दिया है।
लेकिन कुछ सीखने, समझने, सुधार करने की बजाय कांग्रेस ने हर उस संस्था, व्यक्ति पर ही सवालिया निशान लगाने का प्रयास किया जिसने उससे सवाल पूछे या उस पर निशाना साधा।
देश के सबसे गद्दार, भ्रष्ट शक्तिशाली परिवार और देश की सबसे पुरानी पार्टी और उसके बनाये 'इको सिस्टम' की चूलें हिला देने वाले तमाम सोशल मीडिया वीरों को धन्यवाद, नमन। साथ ही देश विदेश के अनेकों राष्ट्रवादी मित्रों से मिलाने के लिए और अपने मन की बात बेधड़क फेसबुक पर लिखने का अवसर देने के लिए मार्क जुकरबर्ग/फेसबुक के लिए भी एक धन्यवाद तो बनता ही है।
ठाकुर की कलम से
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