*""जिहादियों और वामपंथियों द्वारा प्रधानमंत्री का विरोध का एकमात्र कारण समाज में इनकी घटती रूतबा है।""*
*""जिहादियों और वामपंथियों द्वारा प्रधानमंत्री का विरोध का एकमात्र कारण समाज में इनकी घटती रूतबा है।""*
ये जहरीले नाग समाज के लिए जहर बन गए हैं। समाज इन्हें अस्वीकार कर रहा है। अपनी घटती रूतबा से परेशान ये भारत के गौरव पर सीधा हमला कर रहें हैं।
Winston Churchill जो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे....उन्होंने एक बार कहा था कि... Indians are not fit to rule, they are fit to be ruled....मतलब हम भारतीय राज करना नहीं जानते...और हम गुलामी के लिए ही पैदा हुए हैं...उनका मानना था कि हम आपस में लड़ते रहेंगे...और अपने अपने फायदों के ऊपर नेशनल इंटरेस्ट की बात ही नहीं करेंगे....
चर्चिल के इन विचारों का एक कारण ये भी हो सकता है कि जब अंग्रेज इस देश में आये हम तब भी आपस में लड़ रहे थे....और जब गए...हम तब भी आपस में ही लड़ रहे थे...
हम टैलेंटेड तो थे...पर ग्लोबली उतने कॉंफिडेंट नहीं थे...याद है क्रिकेट में जब दादा कप्तान बने थे...तब सिर्फ टीम की ही नहीं...मैच देखते देखते हमारी भी बॉडी लैंग्वेज बदल सी गयी थी...जब 18 साल के सचिन ने देश विदेश के मैदानों पर दिग्गज फ़ास्ट बोलरों को धुलाई शुरू किया था....तब हमको भी यकीन हो गया था कि हम भी किसी से कम नहीं.......ठीक वैसा ही फील दिया था हमको प्रधानमंत्री मोदी ने....जब वो 2009 से 2014 के बीच भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गयी लंपट नेहरू गांधी परिवार की सरकार को उखाड़ कर दिल्ली आये थे...
कल 2020 में किसान आंदोलन से एक वीडियो आया...जिसमें कुछ महिलायें "मर जाए मोदी" पर ताली और ढोल पीट रहीं थी...अब मोदी से कोई इतनी नफरत करने लगे कि वो उनके मरने की दुआ कर नाचने लगे तो जरूर कुछ तो है जो इस देश की बाकी जनता को समझ नहीं आ रहा है....
वैसे ठीक भी है....ये आदमी 2001 से 2014 तक गुजरात का CM रहा...2014 से अब तक दो बार PM रह लिया...और आज भी कुल संपत्ति जितनी तनख्वाह मिलती है उतनी ही है....क्या फायदा ऐसे जीने का...
मां बेचारी गुजरात के एक छोटे से घर में रहती है...और भाई एक साधारण सी दूकान चलाता है....क्या फायदा हुआ उन्हें जो उनका बेटा भाई प्रधानमंत्री बना....यहां आदमी एक बार पार्षद बन जाए तो दूर के रिश्तेदार तक बड़ी गाड़ियों में दिखते हैं...और एक ये हैं...जिनके परिवार को देश जानता तक नहीं है...
न होली पे घर जाता...दिवाली भी हर साल बॉर्डर पर जवानों के साथ मनाता है....न थाईलैंड में छुटियाँ मनाता...न गोवा में हॉलिडे करता.....क्या फायदा ऐसे आदमी का प्रधानमंत्री बनने का...
सब्सिडी सीधे खातों में डालता है....राशन पेंशन सिलिंडर की व्यवस्था आसान कर दी...घर घर में शौचालय बनवा के जीवन का आनंद ही खत्म कर दिया....कितना अच्छा टाइम था जब अँधेरे में घर की महिलायें जंगल, झाड़ी के पीछे डब्बा लेकर बैठती थीं....ऐसे आदमी को क्यों जिन्दा रहना चाहिए....
पहले आये दिन आसमानी किताब से प्रेरित जिहादियों द्वारा हुरों की चाहत में बम ब्लास्ट होते थे...इसी बहाने हमको मोमबत्तियां जलाने को मिलती थीं...टीवी पर बॉलीवुड के सेलेब्रिटी अमन की आशा गा कर समस्याओं का समाधान कर देते थे...और एक ये हैं जो इन मासूम आतंकियों और जिहादियों को पाकिस्तान से 72 हुरों की चाहत लिए कश्मीर में घुसते ही मार देते हैं....हुंह...ये भी कोई तरीका हुआ भला...क्या फायदा इनके प्रधानमंत्री बनने का...
12 साल पहले पाकिस्तान आसमानी किताब से प्रेरित "गजवा-ऐ-हिंद" के लिए मुंबई तक में हमें घुस कर मार रहा था...और अब हम घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करते हैं...जिस आदमी को अपने पडोसी की फ़िक्र न हो...ऐसा आदमी देश का भला आखिर सोच भी कैसे सकता है....है न...
कश्मीर में कितना अमन चैन था...इस आदमी ने आकर धारा 370 हटा दी...बताइये...
नार्थ ईस्ट में इंसर्जेन्सी थी...इस आदमी ने तमाम सड़कें और पुल बना कर उन्हें देश से जोड़ने का पाप किया...
अच्छा ख़ासा चीन को अक्साई चीन गिफ्ट करके हमर चाचा जी गए थे....इस आदमी ने गलवान में उनका भी गला पकड़ लिया...बताइये कोई हक़ है इस आदमी को जीने का....
एक ये आदमी है २० साल से संवैधानिक पदों पर रहते हुए भी फ़कीर है...और एक वो थे बाबर के पुर्वज लंपट नेहरू गांधी परिवार जिन्होंने अपनी जिहादी मानसिकता को सार्थक करते हुए दामादों को भी चक्रवर्ती सम्राट बना दिया....आप ही बताइये कौन बेहतर हुआ...
बेचारे मासूम से बच्चे बस नारे ही तो लगा रहे थे कि भारत तेरे टुकड़े होंगे और हर घर से अफजल निलेगा....इस आदमी से वो तक नहीं देखा गया...
अब जब उन मासूमों की रिहाई के लिए लोग किसान भाइयों के कंधे पर रख कर बन्दूक चला रहे हैं तो इसमें गलत क्या है...
मोदी जी कहाँ चक्करों में पड़े हैं....कुछ तो अपने से पहले वाली सरकारों से सीखिए.....वो खाते भी थे...और अपने साथ वालों को खाने भी देते थे...
आप काहे चचा विंस्टन चर्चिल को गलत साबित करने पर अड़ गए हैं...
ब्यथित मन से,
ठाकुर की कलम से
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