अटूट रिश्ता

अटूट रिश्ता                                                                          एक देश में अकाल पड़ गया । लोग भूखे मरने लगे । नौकरियां चली गई ।बहा एक परिवार रहता था जिसमें एक लड़का अपनी दो बहनों और बूढ़े मां बाप के साथ रहता था ।लड़का जिद करने लगा कि दूसरे देश जाऊंगा और कमा कर लाऊंगा । परिवार नहीं मान रहा था बाप कहता हमारे पास खाने को बहुत कुश हे हमें इस अवस्था में मत छोड़ना हम तुम्हारे बिना नहीं जी सके गे। बेटा लड़ झगड़ कर गुस्से से घर छोड़ के चला गया फिर एक दिन उस देश के हालात अच्छे हो गए। बहन को नौकरी मिल गई । बेटा जहां गया था वहां नौकरी नहीं मिली । उसके हालात और खराब हो गए ।सोचता हे अब किस मुंह से घर जाऊं घरवाले तो घुसने नहीं देंगे क्योंकि जब उनको मेरी बहुत जरूरत थी मैं उनको छोड़कर आ गया था। रोज-रोज उसकी हालत खराब हो रही है दूसरे मजदूर उसे कहते कर चला जाए मगर वह कहता कि अगर घर वालों ने घुसने नहीं दिया तो मैं जीते जी मर जाऊंगा । उसके साथ काम करने वाले एक बुजुर्ग ने उससे कहा बेटा यहाँ मरने से अच्छा हे एक काम करो अपने घरवालों को संदेशा भेजो कि मैं 10 तारीख को आपके पास आ रहा हू और अगर आप चाहते हो कि मैं आऊं तो घर के बाहर जो पेड़ है उसके ऊपर एक हरे रंग का कपड़ा बांध  देना मैं समझ जाऊंगा कि आपने मुझे माफ कर दिया। ठीक 10 तारीख को वह रेलगाड़ी में सवार हो गया जो उसके घर से गुजरती थी मगर डर था कि अगर कपड़ा नहीं मिला तो मेरा क्या होगा इसलिए उसने अपने साथ बैठे मुसाफिर को सारा किस्सा सुनाया और कहा कि मेरे में इतनी हिम्मत नहीं कि मैं घर की तरफ देखूँ मगर तुम देखना कि मेरे घर के पास जो पेड़ है उस पर हरा कपड़ा बंधा हुआ हे। जब गाड़ी उसके घर के पास से निकली तो उसने मुसाफिर से पूछा कि तुम्हें कहीं हरा कपड़ा दिखा मुसाफिर ने बताया कि एक पेड़ जो पूरा ही हरे कपड़ों से भरा हुआ था मगर आप का हरा कपड़ा कौन सा था यह मुझे नहीं मालूम । बेटे की आंखों में आंसू आ गए और रोने लगा । उसको समज में आया कि कि बच्चे मां बाप को छोड़ सकते हैं लेकिन मां-बाप बच्चों को कभी नहीं छोड़ सकते।

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