भारत कालरात्रि के पथ पर

भारत कालरात्रि के पथ पर

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मैं आज कुछ ऐसा कहना चाहता हूँ जो मेरे लिए बड़ी गंभीर है। यह इसलिये गंभीर है क्योंकि मेरा अपना आंकलन, मुझे 2019 से हो रही अनुभूतियां, वर्तमान के वैश्विक व राष्ट्रीय परिदृश्य, से मिल रहे संकेतों के वह अनुरूप है। मैं पहले इसको सार्वजनिक रूप से लिख कर परिहास का कारण नहीं बनना चाहता लेकिन जब इस विषय पर परिवार और कुछ इष्ट मित्रों के बीच चर्चा की तो मुझे यह आभास हुआ कि कोई भी आंकलन, भले ही भविष्य में कितना ही गलत सिद्ध हो जाये लेकिन यदि उस पर स्वयं का अटूट विश्वास है तो लोगों को पहले से ही आगाह करना कर्तव्य होगा। 

मुझे मालूम है बहुतायत में लोग मेरे आंकलन को ज्यादा गंभीरता से नही लेंगे लेकिन मुझे लगता है कि आगे आने वाले समय की भयावहता को देखते हुए, कुछ बातों को गंभीरता से लेना होगा। मैं गंभीरता से इसलिए ले रहा हूँ क्योंकि मेरे वैश्विक भूराजनैतिक आंकलन के हिसाब से, जिस द्रुतगति से विश्व अपना कलेवर बदल रहा है और उससे वर्तमान, इतनी दिशाओं में संकेतों को प्रेषित कर रहा है कि भविष्य एक पहेली बनती जा रही है। 

यदि हम आज भारत को देखे तो भारत एक ज्वालामुखी पर बैठा दिखाई दे रहा है। भारत में तो नवंबर-दिसम्बर 2019 से ही जिहादियों द्वारा आग लगाई जा रही है। कांग्रेस, लिबेरल्स व जिहादी वामपंथियों द्वारा प्रयोजित शाहीनबाग़ का धरना एक आरम्भ था, जिसका नेतृत्व बाद में कट्टर अरबी जिहादियों के हाथ मे चला गया था। सीएए के विरोध में बैठे इस धरने की पुनरावर्ती, देश के कोने कोने हुई और अंतोगत्वा इन शक्तियों ने दिल्ली में हिंदुओं की जान और माल को जला देने के लिए दंगे किये थे। दिल्ली के साथ उत्तरप्रदेश को भी दंगे की आग में झोंकने की कोशिश हुई थी लेकिन योगी जी के प्रशासन की आक्रमकता के कारण वह सफल नहीं हो पाया। उसके तुरंत बाद ही भारत मे चीनी वायरस कोरोना ने पैर पसार कर जन जीवन को ही ठप कर दिया। भारत कोरोना की महामारी से अभी जूझ ही रहा था कि जून 2020 में लद्दाख में भारत की सीमा पर स्थित गलवान घाटी में चीन की सेना ने घुसपैठ किये जाने पर रक्तिम संघर्ष हो गया। उसके बाद से भारत चीन की सीमा पर स्थिति बिगड़ती ही जा रही है। मेरे लिखने तक स्थिति विस्फोटक ही प्रतीत हो रही है। अब तक सीमा पर हो रहे सैन्य दांवपेंच में भारत आक्रमक दिख रहा है और चीन धमकी देने में लगा है। भारत की सेना द्वारा जो स्थिति बनाई हुई है उसके अनुसार मेरा मानना है कि सितंबर 2020 के बाद कुछ बहुत बड़ा होना चाहिए। 

भारत में गृह युद्ध के स्तर के सरकार विरोधी/धार्मिक दंगे होंगे। मुझे नही लगता कि ये दंगे हिन्दू मुसलमान से शुरू होंगे। आज की स्थिति में चीन, भारत से सीमा पर युद्ध की शुरुवात करने से पहले भारत को आंतरिक रूप से झझकोर देना चाहेगा। उसके लिए वह परोक्ष रूप से, भारत में स्थित, भारत की वर्तमान नरेंद्र मोदी जी की सरकार के विरोधियों व चीन के कथानक को बढ़ावा देने वाले अभिजात वर्ग के लिबेरल्स, राजनैतिज्ञों, बुद्धजीवियों और पत्रकारों पर भारत मे आंतरिक उथल पथल कराने के लिए दबाव बनाएगा। मुझे चीन के इस प्रयास की सफलता पर कोई संदेह नहीं है क्योंकि भारत मे राजनैतिक व सामाजिक वातावरण इस तरह का बन चुका है, जहां राष्ट्र के हितों से ऊपर व्यक्तिगत स्वार्थ स्थायित्व प्राप्त कर चुका है। 

मुझे लगता है कि जिस प्रकार से सुशांत सिंह राजपूत व दिशा हत्याकांड को महाराष्ट्र सरकार व पुलिस द्वारा दबाने व उसकी जांच को कलुषित करने की हठधर्मिता दिखाई है, वह आगे आग लगाएगी। सीबीआई व ड्रग एनफोर्समेंट की जांच में जो परते खुल रही है और जिस प्रकार से अरबी जेहादी शक्तियों के साये में मुम्बई फ़िल्म की हस्तियों, राजनैतिज्ञों व ड्रग्स अंडरवर्ल्ड का गठजोड़ सामने आया है, उसकी रक्तिम प्रतिक्रिया अवश्य होगी। इस हत्याकांड का अन्वेषण, शीघ्र ही जब अपनी परिणीति पर कुछ शक्तिशाली नामों के साथ पंहुचेगा तब इसकी बड़ी संभावना है कि मुम्बई में स्वयं महाराष्ट्र सरकार, अरबी जिहादी अंडरवर्ल्ड के सहयोग से अराजकता फैलाएगी। जिस तरह से कंगना रनौत को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने शासकीय तंत्र द्वारा वैधिक व संविधानिक मर्यादाओं को तार तार कर अपने अराजक चरित्र का परिचय दिया है उसी तरह से एक व्यक्ति विशेष को बचाने के लिए, केंद्र सरकार को अराजकता के द्वारा घुटने पर लाने के लिए प्रयास किया जाएगा। उद्धव ठाकरे द्वारा प्रयोजित इस अराजकता का पूर्व के भांति, पूरा फायदा वामपंथी व कट्टर इस्लामिक शक्तियां उठाएंगी। मुम्बई जलेगा और इसको चीन पोषित मीडिया वर्ग व मोदी विरोधी शक्तियों द्वारा और भड़काया जाएगा। यह अराजकता, पूरे देश में, विभिन्न अंचलों में भड़केगी। यह बहुत कुछ बाबरी मस्जिद की घटना के बाद जलने वाले भारत की पुनरावृत्ति होगी लेकिन यह ज्यादा रक्तिम और ज्यादा विध्वंसक होगी। इसी के साथ, 1993 व 2008 में हुए मुम्बई धमाके के सदृश, एक से ज्यादा बड़ी घटना होगी जिसमें बहुत लोग मारे जाए
भारत जब इस आंतरिक दवानल में उलझा होगा, तभी चीन, सीमा पर आक्रमक होगा जो एक रक्तिम युद्ध मे भी परिवर्तित हो सकती है। यह सब यदि 2020 में होना होगा तो नवम्बर तक हों जाना चाहिए नहीं तो, फरवरी 2021 तक चीन को रुकना होगा क्योंकि यह चीन के साथ पाकिस्तान के लिए श्रेष्ठ अवसर होगा। 

इसी के साथ डब्लू एच ओ ने पिछले दिनों एक दूसरी आने वाली महामारी का संकेत दिया है, उससे लगता है कि चीन के शीर्ष नेतृत्व (पोलित बयूरो) में सब कुछ ठीक नही है। सत्ता में बने रहने के लिए शी के पास, हर हालत में जीत के निकलने के अलावा कोई विकल्प नही रह गया है। मुझे लगता है कि इन परिस्थितियों में चीन का नया वायरस इटली की जगह भारत में, अरुणाचल के रास्ते आएगा। अभी हाल में अरुणाचल के सीमावर्ती क्षेत्र से 5 लोगों को चीन ने अगवा किया था, जिसे पहले चीन ने इनकार किया था और बाद में भारतीय सेना को सौंपा दिया था। मुझे इसकी प्रबल संभावना लग रही है कि इन ऐसी घटनाओं द्वारा चीन भारत के लोगो में वायरस पहुंचा सकता है।

मैं जानता हूँ कि मेरा यह लेख नकरात्मकता से लिप्त है लेकिन मुझे इसका बराबर आभास हो रहा है कि भारत (शेष विश्व भी) के लिए अगले 8/9 महीने बहुत बुरे गुजरने वाले है। हम लोग लॉकडाऊन से कहीं ज्यादा बुरा समय देखेंगे। मेरी तो यही सलाह होगी कि अपनी पूंजी संचित रखिये, स्थायी खर्चो को ज्यादा मत बढ़ाइए, अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाइये और जब भारत जल रहा हो तो सरकार द्वारा सुरक्षा दिए जाने की आस में मत रहिए, उसको कोसने की जगह, स्वयं सड़क पर उतर कर अराजकता पर प्रतिघात कीजिये। मेरा मानना है कि जून 2021 तक जो अपने अस्तित्व को संभाल लेगा, उसी का ही भविष्य है।

ब्यथित मन से,
ठाकुर की कलम से

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