जरा ध्यान से देखिए इस मूर्ति को... क्या कुछ खास दिखा???
आप विश्वास करेंगे कि जो इस मूर्ति पर घूंघट है वह उसी पत्थर का बना है जिस पत्थर से मूर्ति बनी है!!!!!
ये राजस्थान के कारीगरों द्वारा बनाई गई मूर्ति श्रेष्ठ भारतीय वास्तुकला का जीता जागता सबूत है!!!
लेकिन आपको हमारे पाठ्यक्रम में पढ़ाए जा रहे उसी वामपंथी इतिहास को मान लेना चाहिए, जो कहता है कि.. "भारतीय तो असभ्य थे, यह को भी कुछ बनाया गया है , मूर्तिया , मंदिर , नक्काशी सब छैनी हथौड़ी से बनाया है , हमारे पास तो कोई कला थी है नहीं"!
और हमारे भूतपूर्व प्रधानमंत्री के ऑक्सफोर्ड में जाकर दिए हुए भाषण को भी सही ही मान लेना चाहिए कि..
"हम अंग्रेज़ो के आभारी हैं कि वो भारत में आए , वरना हम कभी सभ्य ना हो पाते" क्या सच में????
ये सब इसीलिए क्योंकि आपको आपका इतिहास मालूम नहीं है, और जानने में रुचि भी कम ही है, तो को जैसा बताया, पढ़ाया गया वही सही मान लिया!!
क्योंकि अगर आपको आपका इतिहास नहीं मालूम होगा, तो कुछ लोग आपको, आपका ही इतिहास बताने के लिए बैठे ही है!!!!!
बहुत सुन्दर प्रस्तुति दी है आपने, बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं।
ReplyDeleteदोस्त, लगभग चालिस बरस पहले से ही, कला में रूचि और विज्ञान का छात्र होने से फोटोग्राफी सिखने केे लिए बहुत समय व पैसा ख़र्च किया था। Photography का सारा ज्ञान English में हीं उपलब्ध था। मुझ जैसे हिंदी मिडियम केे लोगों के
बड़ा मुश्किल था।
आज 40 वर्षो की तपस्या केे बाद बहुत समय और धन खर्च करने केे बाद जो भी सीखा और सीख रहा हुं, अपने हिंदी ब्लॉग केे माध्यम से हिंदी माध्यम केे लोगों के लिए पैश कर रहा हूं।
Comment Boxes में जाकर आप जो भी विषय सम्बंधित सवाल करेंगें, मैं जवाब देने केे लिए हाजिर हुं।
www.Film-Visualizer.com
(Hindi Writer for Film and Media)
www.film-visualizer.com
(Advertising-Writing)
With Regards
हेमन्त मोढ़, इंदौर