जॉर्ज सोरोस: भारत तोड़क समूह का एक अहंकारोउन्मादी अरबपति अन्नदाता
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मैने अमेरिका की सड़कों पर फैल रही अराजकता व भविष्य में उसका सीधा प्रभाव भारत मे पड़ने की आशंका को लेकर अंग्रेज़ी में लेख लिखा था और उसमे बताया था कि भारत में होने वाली अराजकता को चीन व जॉर्ज सोरोस का सीधा समर्थन प्राप्त होगा। इसको यह भी कह सकते है कि यह इन्ही दोनो द्वारा प्रयोजित होगा।
यहां पर यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह जॉर्ज सोरोस कौन है और इसका भारत के राजनैतिक व सामाजिक व्यवस्था को कैसे प्रभावित कर रहा है? एक हंगेरियन अमेरिकन यहूदी अरबपति, जिसको जनवरी 2020 से पहले भारत के वित्तीय बाजार के पंडितों के अलावा भारत मे कोई जानता नही था, वह भारत के वर्तमान में कैसे हस्तक्षेप कर रहा है?
इन प्रश्नों का उत्तर अरबपति जॉर्ज सोरोस की राजनैतिक दर्शन में छिपा है। पाश्चात्य जगत में सोरोस अपनी प्रगतिशील व उदारपंथी राजनैतिक चिंतन के लिए जाना जाता रहा है और अपने इन्ही विचारों को बढ़ावा देने के लिए, विभिन्न व्यक्तियों व संस्थाओं को बड़े बड़े दान देता है। जॉर्ज सोरोस ने विश्व भर में अपने विचारों को प्रतिस्थापित करने के लिए एक एनजीओ, 'ओपन सोसाइटी फाउंडेशन' बनाई, जिसके द्वारा वह ऐसे लोगो को धन देता है। सोरोस अपने इस फाउंडेशन द्वारा अब तक 70 देशों में, 32 बिलियन डॉलर( करीब 24 लाख करोड़ रुपये) दान में दे चुका है। सोरोस सिर्फ पर्दे के पीछे से ही सक्रिय नही है बल्कि खुल कर जहां अपनी विचारधारा के समर्थक राजनैतिक दलों व राजनीतिज्ञों की सहायता करता है वही पर उसकी राजनैतिक चिंतन के विरोधियों के विरुद्ध लोगो को धन से सशक्त भी करता है। अमेरिका में 2008 2012 के राष्ट्रपति पद के चुनाव में ओबामा व 2016 में हेलरी क्लिंटन के चुनावी अभियान को बड़ा चंदा दिया था।
भारत मे सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन बहुत पहले से सक्रिय रही है और यूपीए सरकार के काल मे, सोनिया गांधी समर्थित एक्टिविस्ट व एनजीओ को धन देती रही है। यूपीए काल मे असंवैधानिक रूप से गठित नेशनल एडवाइजरी कौंसिल में शामिल लोगों की एनजीओ को यह फाउंडेशन धन से सहायता करती थी। इस कौंसिल में सोनिया गांधी के बेहद करीबी पूर्व आईएएस हर्ष मन्धार भी थे जो जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के भारतीय हितों को देखते है। इस फाउंडेशन का मोदी जी की सरकार से टकराव 2016 से शुरू हुआ जब, भारत सरकार इन इस एनजीओ की गतिविधियों को संदिग्ध मानते हुए 'वाच लिस्ट' में डाल दिया था। भारत मे रोहंगिया मुस्लिमो को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमे में यही फाउंडेशन रोहिंग्या मुसलमानों के पक्ष में, भारत सरकार के विरुद्ध मुकदमा लड़ रही है। भारत मे हिंदुओं को धर्मांतरण करा कर ईसाई बनाने वाली ज्यादातर संस्थाओं व व्यक्तियों को यही फाउंडेशन विभिन्न रूप से पोषित करती है। जॉर्ज सोरोस भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का मुखर विरोधी रहा है और सीएए बिल लाये जाने का विरोध किया था। इसी वर्ष जनवरी 2020 में दावोस, स्विट्ज़रलैंड में हुई वर्ल्ड इकनोमिक फोरम में जॉर्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री मोदी जी पर 'हिंदू राष्ट्रवादी देश' बनाने का आरोप लगाया था। उसने मोदी जी की आलोचना करते हुए कहा था मोदी जी ने 'एक मुस्लिम बहुल अर्ध-स्वायत्त कश्मीर पर दंडात्मक उपाय किए है और लाखों मुसलमानों को उनकी नागरिकता से वंचित करने की धमकी दे रहे हैं।' सोरोस का मोदी विरोध यहां तक है कि उसका मानना है कि हिन्दू राष्ट्रवादी विचारधारा के नरेंद्र मोदी का भारत में लोकतांत्रिक तरीके से फिर से चुना जाना, उसकी प्रगतिशील व उदारपंथी विचारधारा के लिए धक्का है।
भारत मे 2014 से भारत में सक्रिय टुकड़े टुकड़े गिरोह व मोदी विरोधियों को जॉर्ज सोरोस व उसकी ओपन सोसाइटी फाउंडेशन का प्रत्यक्ष रूप से समर्थन रहा है और इसी क्रम में दावोस में सोरोस ने, विश्व के राजनैतिक पटल से राष्ट्रवादिता की विचारधारा को समूल रूप से नष्ट करने के लिए 1 बिलियन डॉलर देने का संकल्प किया है। मैं यहां एक 10 मिनिट का वीडियो डाल रहा हूँ, जो भारत व उसकी हिंदुत्व के साथ राष्ट्रवादिता की विचारधारा के विरुद्ध खड़े जॉर्ज सोरोस व उसके द्वारा भारत मे पोषित लोगो पर प्रकाश डाल रहा है।
निकट भविष्य में भारत का अराजकता की अग्नि में जलना, यथार्थ होने वाली संभावना है।
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