*ये लेख टुकड़े दल का डिजिटल प्लेटफार्म @thequint.com का है जो नैरेटिव सेट करना और प्रोपेगैंडा फैलाने में माहिर है उसको मेरा जवाब*

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स्वतंत्र भारत के पहला डकैत लुटेरा परिवार नेहरू गांधी के गुलाम चरणवंदक चाटूकारों ने हर  प्रकार का देशविरोधी, समाज विरोधी, परिवार विरोधी कार्य कर थक गए, तब अब सनातन रक्षकों, राष्ट्रवादियों पर नैरेटिव गढना, मनगढंत प्रोपेगैंडा फैलाना, अपने कलुषित व गुलाम मानसिकता लिए लेखन द्वारा समाज में विषवमन करना यही कार्य रह गया है।

गद्दारों, देशद्रोहियों सावधान! 
     अब समय बदल गया है, समाज के निचले तबकों में भी जागरूकता आ गई है। वे अपना भला बुरा, नफा नुकसान समझने लगे हैं।
चार पीढीयों द्वारा एक हीं जूमला  गरीबी मिटाओ नारा का खामियाजा भुगत चुके हैं, इन नारों के पीछे गरीबों को और गरीब करने का षडयंत्र देख चुके है। गरीबी मिटाओ नारों का सपना दिखाने वाली लुटेरे नेहरू गांधी परिवार को फर्श से अर्श पर चढते और अपने सपनों को पैरों तले रौंदते, कुचलते अपने लुटते, मिटते सपनीली आँखों से मंजर इन अकलियतों, आश्रितों ने देखा है।

इन परिवार विशेष के गुलामों की बवासीर उभरने का असली कारण मोदी नहीं, बल्कि जागरूक होती आम जनता है। इन देशद्रोहियों का असली मकसद जनता को अनपढ और गुलाम बनाए रखना है।

1962 में लंपट रसिक नेहरू ने अपनी विलासिता और ऐय्याशी के कारण सेना को पंगु बनाकर रखा, सैनिकों के लिए अस्त्र शस्त्र, गोला बारूद नहीं खरीदा, हर मंच चाहे वो देश हो या विदेश हर मंच पर कहता भारत सबसे सुरक्षित देश है। इसे किसी से खतरा नहीं। चीन में जाकर हिंदी चीनी भाई भाई का नारा दिया और कट्टर राष्ट्रवाद से पोषित चीनी राष्ट्रपति "माओ" को देश में बुलाकर सभी गोला बारूद बनाने वाली फैक्ट्री चाहे वो कानपुर की हो या जबलपुर की सबमें घुमाया और उनसे खुलेआम कहा की हम ये सभी फैक्ट्री बंद करनेवाले हैं। हमारे देश को किसी से खतरा नहीं, हम शांति के पक्षधर हैं, इसलिए हमें सेना की जरूरत नहीं। लंपट नेहरू की ऐसी अदूरदर्शी भाषण सुन "माओ" चीन पहुंचते हीं महीने भर के अंदर भारत पर हमला करता है और अरूणाचल प्रदेश से लेकर काश्मीर, मानसरोवर लाखों हेक्टेयर किलोमीटर जमीन कब्जा कर लिया और आज भी उसपर काबिज है।

ऐसे अदूरदर्शी लंपट ऐय्याश प्रधानमंत्री को अगर देशभक्त अटल जी ने सवाल किया मर्यादा में रहकर तो इसमें गलत क्या है। हर राष्ट्र भक्त को राष्ट्रविरोधियों से सवाल करने का पूरा हक है।

ठाकुर की कलम से

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