ब्यक्ति और विचारधारा

किसी एक व्यक्ति के न रहने से विचारधारा कैसे अपना स्वरूप बदल कर, नेपथ्य में जाकर अस्तित्वहीन बन जाती है यह हमे इतिहास बार बार बता चुका है। मेरा शुरू से ही यह मानना रहा है कि विचारधारा व्यक्ति से जरूर बड़ी होती है लेकिन विचारधारा की अमरता व्यक्तित्व आधारित होती है। हमे इतिहास यही बार बार बताता रहा है लेकिन फिर भी हम ज्ञान की चकाचौन्ध में देखना नही चाहते है। 

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# विचारधारा और सोच निःसंदेह व्यक्ति से बड़ी होती है पर उसे वहन करने की सामर्थ्य रखने वाले व्यक्तित्व के अभाव में वह सिर्फ एक विचार बन कर इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाती है जैसे बिना शरीर के आत्मा प्रेत बनकर खंडहरों में भटकती है। 

1761ई. में पानीपत के मैदान में कई #सोचें थीं।

-- एक सोच सदाशिव राव भाऊ की थी जो उन्हें शिवाजी और अपने ताऊ बाजीराव 'महान' से #हिंदू_पदपादशाही के स्वप्न के रूप में मिली थी जिसका तात्कालिक अंत #एक_व्यक्ति भाऊ की मृत्यु के साथ हो गया। 

-- एक सोच मालवे के मल्हार राव होल्कर की भी थी जिसे हर पल लगता था कि उसे उतना #सम्मान और #जागीरें नहीं दिया जा रहा है जिसके वह #योग्य था। मल्हारराव की सोच भाऊ को बेवकूफ और एहसानफरामोश मानती थी और यह भी की चूँकि उसने अतीत में मराठा साम्राज्य की बहुत सेवा की है इसलिये उसकी "सलाहों" को भाऊ द्वारा तुरंत माना जाना चाहिये।
 
#दूसरी_सोच ने मल्हारराव को गद्दार बना दिया। यह सोच #नजीबुद्दौला जैसे घोषित राष्ट्रशत्रु की संरक्षक बनी। इसी देशघाती सोच ने "हिंदू पद पादशाही" के विचार को शताब्दियों के लिये नेपथ्य में डाल दिया जिसका कारण "निर्णायक युद्ध" में एक स्वार्थी सोच के व्यक्ति द्वारा किया देशद्रोह था।

एक व्यक्ति की मौत ने पानीपत का युद्ध हरवा दिया।
एक व्यक्ति की मौत के साथ हिंदू पद पादशाही का विचार 
शताब्दियों के लिए विलुप्त हो गया।

हिंदुओ, पानीपत का तीसरा युद्ध एक बार फिर तुम्हारे सामने है। 

पानीपत 2019 में फिर से तुम्हारे सामने है। 

तुम्हारे सामने सदाशिव राव भाऊ भी हैं और हमारी सेना में छिपे मल्हारराव भी।

पहचान सकते हैं तो पहचान लीजिये क्योंकि बड़ी सोच का वहन बड़े व्यक्ति ही कर सकते हैं 'क्षणे रुष्टा क्षणे तुष्टा' की बचकानी सोच रखने वाले हल्के स्तर के व्यक्ति नहीं। 

--क्योंकि 2019 के पानीपत में युद्ध  भाऊ मारे गए या हार गए तो "विश्वास भी मर जायेगा" व विचार भी और तब आने वाली शताब्दियों में ईरान के पारसियों की तरह लिखा जाएगा--

"There was a religion in India which was called Hinduism."

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