हमारी पहचान क्या है ??
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वो टोपी दाढ़ी लगाये तो सेकुलर
हम चोटी, कलावा, तिलक लगाये तो साम्प्रदायिक।
वो हर बात में अल्ला अल्ला करे।
तो सेकुलर।
हम राम राम बोल दे तो साम्प्रदायिक
वो मंदिरो को तोड़कर मस्जिदे बनाये तो सेकुलर
हम सिर्फ राम मंदिर की बात करे तो साम्प्रदायिक
वो हमारी गाय को काट कर खाये फिर भी सेकुलर
और हम अपनी गऊ माता को बचाये फिर भी साम्प्रदायिक
वो देश में हुए हर दंगा, जिहाद, बलात्कार, नरसंहार के जिम्मेदार फिर भी सेक्युलर
और हम आत्म रक्षा में हथियार उठाये तो साम्प्रदायिक।
वो 100 करोड़ हिन्दुओं को 15 मिनट में काटने की बात कहे फिर भी सेक्युलर।
और हम आतंकवादियों को मारने की बात करे तो साम्प्रदायिक।
वो रोज तिरंगे को जलाकर पाकिस्तानी झंडा फहराये फिर भी देश भक्त।
और हम अपनी भारत माँ को हमेशा बचाने की बात करे फिर भी भगवा आतंकवादी।
वो अमरनाथ में हिन्दुओं के
खाने की व्यवस्था ध्वस्त कर दे। फिर भी सेक्युलर।
और हिन्दू इनके लिए रोज इफ्तार की दावते रखे फिर भी साम्प्रदायिक
वो कभी मंदिरों की तरफ मुँह न करे तो सेक्युलर।
और हिन्दू इनकी दरगाहों पर माथा फोड़े फिर भी हिन्दू साम्प्रदायिक।
जय श्रीराम ।
जय महाकाल ।
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