"गांधी की विरासत" कोई आपके गाल पर एक थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दे "

*अभी तक संभवतः भारतीय सेना पहले आक्रमण न करने की नीति पर ही चलती हैं ?
दुश्मन सेना घात लगा कर हमला कर देती हैं ? किसी न किसी सीज फायर का उल्लंघन करके !

अब जब पहले न आक्रमण करने वाली सेना पर घात लगा कर हमला कर दिया जाता हैं ..तो पहले पंक्ति में खड़े शुरक्षा बलो की कुछ न कुछ क्षति होती ही हैं !?

ये ठीक वैसा ही हैं जैसे कि आप शांत खड़े रहे कोई अचानक आपको थप्पड़ मार दे ! अथवा
आप आपने घर पर खड़े हो कोई आप पर पत्थर मार दे !

अब जब आपको कोई पहले थप्पड़ मार दे ..या आप जब घर में खड़े हो पत्थर मार दे तो आपकि प्रतिक्रिया क्या होगी ??
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भारत जब स्वतंत्रत हुआ तो उस समय भारत के राजनीतिक कर्णधारो ने एक दर्शन का प्रचार प्रसार कर दिया कि " कोई आपके गाल पर एक थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दे "

" ये थप्पड़ खाकर गाल आगे करने की थ्योरी व्यक्तिगत स्तर से आगे बढ़ा कर सामुदायिक स्तर पर भी पहुचाने की कोशिश की गयी थी। "
जब काबयलियो के वेश में पाकिस्तान सेनिको ने 1947 मे आक्रमण कर दिया था तो पाकिस्तानी सेना के आगे निहत्थे होकर लेट जाने और अपने प्राण न्यौछावर कर देने तक का उपदेश तक दे दिया गया था।
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अब ऐसे दर्शन का प्रभाव क्या पड़ा ?
जगह जगह से अपने दावे / हक छोड़ कर मामले को दबाने का चलन बढ़ गया !
देश में एक ऐसे बुद्धिजीवियों का प्रभुत्व बढ़ गया जो ..देश के हर उस चीज से , जिसको किसी ने विवादित बना दिया हो , दावा छोड़कर या ऐनकेन प्रकारेण विवादित बन गये मामले को दबा देने की प्रवृत्ति वाले का गुणगान करते रहे ..और जो दावा न छोड़ने प्रतिउत्तर देने की बात करता उसकी तरह तरह से आलोचना करने लगे ?
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कश्मीर में घात लगा कर शत्रु सेना या आतंकवादी हमले हो गये थे जिसमें कुछ जवान शहीद हो गये !

एक 75 वर्षीय बुजुर्ग , जो रिटायर्ड अध्यापक थे ,  बहुत दुःखी हुए कहने लगे कि " सेना के जवान शहीद हो गये ..मोदी जी को कुछ करना चाहिए "
सेना के शहीद होने पर दुःख तो हमे भी था ..तो पूंछा कि " क्या करना चाहिए मोदी सरकार को ?"
तो आगे कुछ न बोले !
तो मैने विकल्प दिया कि ..
1- क्या मोदी सरकार को सीज फायर करने वाले देश पर आक्रमण करने का आदेश देना चाहिए ?
( आक्रमण से युद्ध होगा और जवान हताहत होंगे ? )
अथवा
2- जिस भूमि को लेकर पड़ोसी देश सीज फायर का उल्लंघन करता हैं उस पर से दावा त्याग देना चाहिए ?
( और यदि ऐसा करते हैं तो .देश के कितने भू-भाग से दावा का त्याग करते रहेंगे ..कोई निश्चित है ? आज कश्मीर हैं , कल अरुणाचल होगा ,परसो उत्तराखण्ड होगा नरसो उत्तर प्रदेश भी हो सकता हैं ?)

बुजुर्ग ने उक्त विकल्पों में से किसी का उत्तर न दिया ..फिर बोले की " मोदी को शुरक्षा बलो  की शुरक्षा का इंतजाम करना चाहिए ! "'
अब बुजुर्ग का ये सुझाव तो ..कुछ ऐसा ही हैं जिसे अंततः हर बुद्धिजीवी उठाता है !
तो मैने आगे पूंछा कि ..." शुरक्षा बलो के जवानो के लिये क्या दूसरी शुरक्षा बल को खड़ा करना चाहिए ?"
तो फिर जब उस दूसरी शुरक्षा बलो के जवानो को क्षति होगी तो ..उनकी सुरक्षा के लिये तीसरा  शुरक्षा बल ??

या सेना के सुरक्षा के लिये आगे बुढ़े मंत्रियो की फौज खड़ी कर दे ?? लेकिन फिर क्या होगा बूढ़े मंत्रियो के मरने के बाद ??
आप जो कह रहे है ..उसका मतलब भी जानते हैं ?
देश के नागरिक समाज ,देश की सम्पत्ति की सुरक्षा के लिये ही देश के नागरिको मे से कुछ को सुरक्षा का दायित्व सौंपा जाता हैं ! जिसको दायित्व सौपा जाता हैं उसे प्रशिक्षण दिया जाता हैं हथियार दिये जाते हैं !?
युद्ध कोई एक बार होकर सदा के लिये समाप्त होने वाला घटक नहीं है।
सतत् चलता रहेगा !
अब चीन का ही उदाहरण ले ..1962 मे चीन ने आक्रमण करके उसको जितनी भूमि कब्जानी थी ..कब्जा करके एक तरफा सीज फायर कर दिया !
क्या 1962 में चीन भूमि पर कब्जा करके शांत होकर बैठे गया ??
नहीं ...बल्कि सिक्किम व अरुणाचल में नजर गड़ा दिया !

भारत के ही एक वर्ग ने भारत की भूमि लेकर पाकिस्तान बना लिया ..क्या पाकिस्तान बना कर वो शांत हो गया ?
नहीं कश्मीर पर नजर गड़ा दिया !

अब बुजुर्ग ..कूटनीति की बात करने लगे , बातचीत से मामला सुलझाने को कहने लगे !
तो मैने कहा कि आपको लगता हैं कि अब तक सत्तर वर्ष से बातचीत नहीं हुई होगी ??
बातचीत के बाद ही संघर्ष विराम होता हैं ..!
लेकिन ..वो संघर्ष विराम फिर टूटता है !

फिर बुजुर्ग बोले कि " स्थायी समाधान " निकालना पड़ेगा !

मैने पूंछा कि " क्या स्थाई समाधान ।"
तब कुछ नहीं बोले !
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बुजुर्ग जैसी मानसिकता आज बहुतो की हैं ! बोलना चाहता है। अपना ज्ञान बघारना चाहता है। लेकिन क्या बोले वो स्वयं को पता नहीं है !
अपनी अपनी प्रवृत्ति के अनुसार ..सुझाव दे देगा !
परंतु सत्य यही है कि .." कोई स्थायी समाधान नहीं है ..संघर्ष न होने देने का ..ये सतत् चलने वाली प्रक्रिया है। "
आज आप जिससे दोस्ती का दम भरते हैं कल उससे भी संघर्ष करना पड़ सकता हैं !
आप जहां भाग कर जायेंगे वहाँ भी संघर्ष करना पड़ेगा ..।
इसलिये अच्छा यही है कि युद्ध को तैयार रहो ..बिना परिणाम की चिंता किये !
आक्रमण न करने पर आपका वश हैं ..परंतु आप पर कभी आक्रमण ही न हो ..ये आपके वश में नहीं है।
और जो लोग आप आक्रमण होने पर..आपको ही दायी मान कर आपकी आलोचना करने लगे ! उनसे मूर्ख दुनिया में कोई नहीं है।

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