भारत चीन से घिर जाएगा,वो अपनी गलतफहमी दूर कर ले,
देश मे नेहरू की नही मोदी सरकार है!!
1962 में हम से हिंदी चीनी भाई भाई के नारे लगवाए गए,इन सबके बीच चीन अंदर आया उसके बाद जो हुआ वो सबको पता है!!
1962 के बाद से चीन अपनी सीमाओं की तरफ सड़क से लेकर नेपाल से रेल लाइन बिछाने के समझौते करता रहा, अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाता रहा, हम तब क्या कर रहे थे??
आप चौंक जाएंगे 2012 में इंस्टिट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस जिसे मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस द्वारा फंड किया जाता है,
जो डिफेंस मिनिस्ट्री के लिए स्ट्रेटेजिक सर्वे करके उन्हें रिपोर्ट देती है,उनकी एक रिपोर्ट सामने आई जिसमे ये कहा गया कि भारत ने सिक्किम, अरुणाचल, लद्दाख की तरफ कोई डेवलमेंट इसलिए नही किया कि अगर चीन दोबारा हमला करे तो अपनी बॉर्डर तक आये और भारत की ओर आगे कोई सड़क या रास्ता न होने कारण वापस लौट जाए, ये कांग्रेस रणनीति थी जो भारत को दुनिया के सामने दीनहीन बनाकर रखती थी!!
सड़क मत बनाओ, पुल मत बनाओ तो हमारी दीन हीन हालत देखकर कोई अंदर आएगा ही नही,
वाह रे कायर भीरू घटिया लोगो!!
आपको लग रहा कि ये मजाक है तो 2012 की उस रिपोर्ट का नाम "Strategic road building along the india china border" है, ये रिपोर्ट आपको गूगल में मिल जाएगी, खोजकर पढ़ लीजिएगा!!!
अब जिनको लगता है मोदी ने क्या किया,
आगे पढ़िए तब समझ आएगा सिर्फ पिछले एक साल में ही मोदी ने क्या किया!!
जिन रणनीतिक मोर्चो पर 60 साल राज करने के बाद भी कांग्रेस और इस देश का समूचा विपक्ष फेल रहा, मोदी सरकार ने उन सभी मोर्चो पर भारत को जबरदस्त तरीके से मजबूत कर रही,इस क्रम में भारत सरकार ने सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर प्रोजेक्ट संपर्क शुरू किया गया जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक भारत की पहुँच सुदृढ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप किये गए,इसका जिम्मा बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन(BRO) को सौंपा गया !
बीआरओ ने हर अंतराष्ट्रीय सीमा पर रिकार्ड समय पे कई रणनीतिक पुल बनाए जिस से भारत को किसी भी आपात स्तिथी में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीमाओं पर सेना और आर्टिलरी की तैनाती करने में कम से कम समय लगे और उन क्षेत्रों तक विकास कार्य पहुँचा कर बाकि भारत से उन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सुदृढ की जा सके,
इस क्रम में प्रोजेक्ट संपर्क के तहत
जुलाई 2019 में भारत पाक सीमा पर उझ नदी में उझ ब्रिज जिला कठुआ जम्मू कश्मीर में बनाया गया जिसकी लंबाई लगभग 1किमी है,बसंतर ब्रिज जिला साम्बा, जम्मू कश्मीर में बनाया गया जिसकी लंबाई लगभग 650 मीटर है,और ये ब्रिज मानसून में कम्प्लीट किये और इस काम को रोकने पाकिस्तान की तरफ से लगातार धुंआधार फायरिंग होती रही,
नक्शे में कठुआ और साम्बा की लोकेशन देखिए,हमारी सीधी सड़क मार्ग से भारत पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा तक की कश्मीर से पहुँच बन गयी!!
अक्टूबर 2019 में लद्दाख में कर्नल चेवांग रिनचेन सेतु का निर्माण श्योक नदी पर पूरा किया गया,श्योक नदी का बहाव असामान्य रूप से तेज रहता है इस वजह से उसे रिवर ऑफ डेथ कहा जाता है,
कर्नल चेवांग सेतु आल वेदर हाईएस्ट एल्टीट्यूड ब्रिज है, मतलब यह हर मौसम में चालू रहने वाला दुनिया का एकमात्र ऐसा ब्रिज है जिसकी लंबाई 400 मीटर और समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 15000 फ़ीट है,
इस ब्रिज का सामरिक महत्व ये है कि ये भारत चीन सीमा से मात्र 45 किमी दूर है,
ये सरहदों को अक्साई चीन पे मजबूती तो दे ही रहा है,साथ ही इसने लद्दाख को बाकि भारत से जोड़ दिया, इस से सियाचिन में जाने के रास्ते खुल गए,
कर्नल चेवांग रिनचेन का भी नाम अधिकतर लोगों ने सुना भी नही होगा,कर्नल चेवांग का जन्म 11 नवम्बर 1931 को नुब्रा घाटी में हुआ था,कर्नल चेवांग को लद्दाख का शेर कहा जाता है, कर्नल चेवांग भारत के उन छह सैनिकों में से एक है जिन्हें दो बार के महावीर चक्र से सम्मानित किया गया है!!
सिसेरी रिवर ब्रिज(अरुणाचल प्रदेश)
इसका निर्माण नवम्बर 2019 में बीआरओ द्वारा पूरा किया गया,ये ब्रिज सिकांग नदी पर दिबांग घाटी में बना,ये दिबांग घाटी से सियांग को जोड़ता है!!
इन सबके बीच चीन को सबसे ज्यादा मिर्ची लगी अरुणाचल में डापोरिजो ब्रिज के बनने से,सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक ब्रिज जो बना है वो है ब्रम्हपुत्र नदी पर डापोरिजो ब्रिज,
जो अभी अप्रैल 2020 में बन कर तैयार है, इसका निर्माण मात्र 27 दिन में बीआरओ ने पूर्ण कर दिया जो कि एक रिकॉर्ड है,
ये भारत की कनेक्टिविटी भारत और चीन के लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल तक सीधे जोड़ता है, इसकी क्षमता 40 टन की है, जिस से राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आर्टिलरी गन्स ट्रांसपोर्ट की जा सके, औऱ बॉर्डर पर तैनात की जा सके!!
रणनीतिक महत्व का एक और महत्वपूर्ण ब्रिज जैसे बोगिबिल ब्रिज असम, डिब्रूगढ़ जिला,
ये रेल रोड ब्रिज है, इसके नीचे की लेन पे दो रेलवे ट्रेक और ऊपर तीन लेन की सड़क है, इसकी लंबाई 4.9किमी है, इसकी ब्रिज को भूकंप वाले क्षेत्र में बनाया गया है इसलिए इसमें यूरोपीयन स्टैण्डर्ड फॉलो किये गए हैं, ये रिक्टर पैमाने पे 7 तीव्रता तक के भूकंप को झेल सकता है, और इसकी सड़क पर आपात स्तिथी में फाइटर प्लेन लैंड कराये जा सकते है,ये असम और अरुणाचल की दूरी को 170 किमी कम कर देता है!!
ये ब्रिज घोषणा के बाद 1997 से पेंडिंग था,
जिसका 2002 में स्व अटल जी की सरकार ने निर्माण शुरू करवाया, फिर इसे यूपीए सरकार ने रूकवाया,फाइनली इस ब्रिज को मोदी सरकार ने 5000 करोड़ की लागत से पूरा करवायाअटल जी के जन्मदिवस 25 दिसंबर 2018 को इसे जनता को लोकार्पित कर दिया गया, उस दिन से ये ब्रिज वर्किंग है!!
इसे लाइफ लाइन ऑफ असम कहा गया है!!
असम और अरुणाचल को जोड़ता डोलासदिया ब्रिज जो असम के सदिया से अरुणाचल के डोला को जोड़ता है, इसकी लंबाई 9.3किमी है!!जिसे भूपेन हजारिका ब्रिज कहा जाता है, लोहित तिगारो ब्रिज,
ऐसे कई ब्रिज और सड़के भारत के द्वारा पिछले एक साल में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बनाये गए हैं!!
इन सबके बीच भारतीय रेल भी दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज जम्मू कश्मीर के बीच बनाने जा रही है जो इस साल के अंत तक वर्किंग कंडीशन में होगा,एफिल टावर की ऊंचाई 324 मीटर है इस ब्रिज की ऊंचाई 359 मीटर होगी,चेनाब नदी पर कटरा और बनिहाल के बीच बनने वाला यह ब्रिज आर्च ब्रिज है, मतलब इसे बीच मे किसी कॉलम का सपोर्ट नही है,
इसका आर्किटेक्चर ऐसा है कि ये खुद को सपोर्ट करेगा और बस साइड से सपोर्ट मिलेगा,
ये भारतीय इंजिनयरिंग का एक अद्भुत उदाहरण बनेगा,अभी तक जम्मू के कटरा से आगे कोई ब्रॉड गेज रेल लाइन नही थी,
ये कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक को ब्रॉड गेज रेल लाइन से जोड़ देगा!!
ये सारे ब्रिज वर्किंग हैं और जो एक बहुत महत्वपूर्ण ब्रिज बन रहा वो असम के धुबरी से मेघालय फुलबारी तक ब्रम्हपुत्र नदी में फोर लेन ब्रिज का काम शुरू है जिसे 2026 27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी लंबाई लगभग 19.5 किमी होगी!!
यकीनन इसमे से 80% जगहों का बहुतो ने नाम भी नही सुना होगा,
ये मोदी सरकार का सिर्फ नॉर्थ ईस्ट, भारत चीन सीमा और भारत पाक सीमा का सिर्फ नेशनल सिक्योरिटी बढ़ाने को लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्यौरा है,
इसके बाद भी अगर लगता है कि चीन पाकिस्तान मिलकर भारत का कुछ बिगाड़ लेंगे, तो यकीनन गद्दार हो तुम,
इतना करने के बाद भी तुमको नए भारत की नीति पर शक होता है,
चीन पाकिस्तान की हरकतों पर तुम्हे खुशी होती है
तो यकीनन घटिया इंसान हो तुम,
आठवी फेल होकर डायनेस्टी छाप नेताओ के तलवे चाटकर तमन्ना अगर नेता बनने की है भी,
तो कम से कम नेशनल सिक्योरिटी पे ज्ञान नही पेला करते,
ये नया भारत है,
न भूलता है न छोड़ता है,
जय हिंद
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