#युद्ध_हमें_चुन_रहा_है : #अंतिम_चरण_का_शंखनाद।
#हाफिज़_सईद अंडरग्राउंड,
#मसूद_अजहर गायब,
#सैयद_सलाउद्दीन गायब
और अब
#दाऊद की कोरोना से मौत की खबर आई है।
पाकिस्तान अपने पाले अनुपयोगी हाथियों से हाथ धो रहा है।
आपको ज्यादा खुश होने की आवश्यकता नहीं है।
हम इन लोगों को नहीं मार पाए इसका अफसोस होना चाहिए।
ज्यादा चिंतनीय बात ये लग रही है कि इन बेकार हाथियों को मारने के पीछे एक वजह ये भी हो सकती है कि आईएसआई के पास ज्यादा घातक और कम प्रसिद्ध लड़ाकों की फौज तैयार हो सकती है जिसे संचालित करने के लिए इन लोगों की आवश्यकता नहीं है।
ये फौज मात्र पाकिस्तानी जिहादियों की नहीं होगी। इसमें आपके देश में बैठे जिहादियों की भी भर्ती हो चुकी होगी।
इनसे लड़ाई साधारण दंगे फसाद के स्तर पर नहीं होगी।
हमारी पुलिस संवैधानिक बंधनों में इनसे निपटने में सक्षम होगी इसमें संदेह है।
सीमा पर हमारी सेना चीन को भी चुनौती देने में सक्षम है। किंतु अंदर और बाहर संघर्ष छिड़ता है तो सेना के लिए मुश्किल हालात होने वाले हैं।
चीन के साथ पाकिस्तान भी सीमा पर हरकतों को बढ़ा देगा।
इधर अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य कुछ ऐसा बन रहा है कि पश्चिमी देशों के साथ ऑस्ट्रेलिया भी चीन को घेरने की तैयारी में है।
रूस इस खेल में तबतक नहीं बोलेगा जबतक चीन निपटा नहीं दिया जाता।
रूस के होते हुए चीन विश्व शक्ति बनने की हिमाकत कर रहा है ये रूस के लिए भी नाक कटने वाली बात है।
किंतु, अभी रूस के हालात भी ऐसे नहीं हैं कि वो तृतीय विश्वयुद्ध के नेतृत्व का जोखिम उठाने की सोचे।
इसलिये रक्षा विशेषज्ञों के पिछले दो साल के चिंतन के आधार पर मुझे लगता है कि रूस इस खेल में कूटनीति को प्राथमिकता देकर चीन को निपटवाएगा।
चीन के ध्वस्त होने के साथ ही एशिया में शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा जिसे संतुलित करने के नाम पर रूस पश्चिमी देशों को रोकने आगे आएगा और एक छोटी मोटी नूराकुश्ती के बाद अमेरिका सहित सभी मित्र देश पीछे हट जाएंगे।
विश्व में शांति स्थापना की नौटंकी बहुत ढोल नगाड़े बजाकर की जाएगी और चीन की लाश में सभी अपना अपना हिस्सा नोचकर निकल लेंगे।
अब एशिया में रूस और पश्चिम में अमेरिका, फिर से दो ध्रुवीय शक्तियों के रूप में उभरेंगे।
शेष विश्व इन दोनों को सम्मान देते हुए अपनी भूमिका तय करेगा।
शीतयुद्ध वाली मूर्खता अमेरिका फिर से नहीं करेगा क्योंकि रूस के टुकड़े करने की कवायद में ही उसने ग्लोबल जिहाद का राक्षस जाग्रत कर दिया था जो आज उसी का रक्त पीने को आतुर है।
अब यदि ये सब ठीक वैसे ही होता है जैसा मेरा अनुमान है तो प्रश्न है कि
इसमें हमारी क्या भूमिका होगी और हमारा परिणाम क्या होगा ?
जैसा कि बहुत बार कहा है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध और अराजकता की स्थिति में
#भारत_सीमा_पर_युद्ध_और_भीतर_गृहयुद्ध_एक_साथ_लड़ेगा।
इस बार सीमा के बाहर और भीतर भारत का निर्णायक युद्ध होगा जो भविष्य में एक हजारों वर्षों की संस्कृति के अस्तित्व का निर्णय करेगा।
व्यक्ति, संगठन, मठ, गृहस्थ, साधु सन्यासी यहाँ तक कि सनातन धर्म में उत्पन्न अपराधी को भी अपने अस्तित्व के संघर्ष के लिए आगे आना ही होगा।
#जो_सोएंगे_उन_पर_भविष्य_में_सियार_और_कुत्ते_रोएंगे।
इसलिये अब हर व्यक्ति युद्ध में है और उसे किसी न किसी स्तर पर स्वयं को योद्धा मान लेना चाहिए।
बचकर निकल भागने के लिए पश्चिम के रास्ते भी बंद हो रहे हैं।
या तो आप लड़ेंगे या नहीं लड़ेंगे, किंतु दोनों स्थितियों में बचने की संभावना महाकाल के ही हाथ में है।
#युद्ध_आपको_और_हमको_चुन_चुका_है।
जितना जल्दी समझ में आएगा कल्याण है।
नहीं बचे तो भी भावी पीढ़ियों के लिए हजारों वर्षों की धरोहर सुरक्षित रखने के प्रयास में अपनी आहुति देने से बड़ा पुण्य अब शायद ही कोई और हो।
ठाकुर की कलम से
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