*"डकैत और लुटेरे नेहरू गांधी परिवारों के गुलाम चरण चाटूकारों का दर्द"*
तत्कालीन सरकार द्वारा बीस लाख करोड़ का पैकेज आत्मनिर्भर भारत के तरफ बढने के दिशा में एक कदम है जो मील का पत्थर साबित होगा। हमें यकीन है हमारी सरकार ने जो भविष्य का आर्थिक प्रारूप बनाई है वो सशक्त भारत, समृद्ध भारत की दिशा तय करेगी।
तत्कालीन सरकार ने यह कदम स्वतंत्र भारत के अबतक के इतिहास मेंं पहली बार एक अखंड भारत, सशक्त भारत और समृद्ध भारत के दिशा में महत्वाकांक्षी तथा दूरदर्शी कदम है।
विश्व के कई विकसित देशों ने कोरोना महामारी के दौर मेंं अपने नागरिकों को एकमुश्त रकम दिये। भारत में भी भारत तेरे टुकड़े होंगे गैंग, वामपंथी जिहादी गैंग तथा सेकुलर गुंडों का गैंग भी चाहता है कि तत्कालीन भारत सरकार भी अपने नागरिकों को एकमुश्त रकम दे।
उपरोक्त ये वो राष्ट्रीय गद्दार जिहादी गैंग है जो भयंकर से भयंकर राष्ट्रीय आपदाओं में चाहे वो तमिलनाडु का सुनामी हो, बिहार का प्रलंयकारी बाढ हो, 2013 केदारनाथ में आई भयंकर आपदा हो या काश्मीर में जेहादियों द्वारा हिंदुओं का नरसंहार हो कभी भी अपने सरकारों से राहत या मदद की बात नहीं की बल्कि आपदा राहत कोष में नागरिकों से प्राप्त धन का भी मनमाफिक लूट मचाई।
इस उपरोक्त गैंग ने कभी अपने देशद्रोही परिवारों से ये नहीं पूछा कि चीन ने मानसरोवर, आधा अरूणाचल प्रदेश और लद्दाख का आधा हिस्सा कैसे कब्जा किया। पाकिस्तान पीओके पर कब्जा कैसे किया। 1971 के युद्ध में 90 हजार बंदी पाकिस्तान के सैनिकों के बदले पीओके वापस क्यों नहीं लिया । ये वो देशद्रोही गद्दार परिवार है जो अपने नाकामी में भी अवसर ढूंढता रहा और भारत को हर बार एक से बढकर एक घाव देता रहा। इन नेहरू गांधी परिवारों ने वो हर घिनौना कार्य किया जिससे राष्ट्र शर्मसार हुआ।
उपरोक्त देशद्रोहियों की पार्टी जो साठ सालों तक देश पर एकक्षत्र राज किया उनमें विश्वप्रसिद्ध अर्थशास्त्री रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य रहा इस देश का कि इन महान अर्थशास्त्रियों ने नेहरू गांधी परिवार की चरणवंदना को प्राथमिकता दिया देश को गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और सीमाओं पर तबाही दी। इन अर्थशास्त्रियों ने देशभक्ति के जगह परिवार भक्ति को अपना प्रथम दायित्व समझा।
स्वतंत्र भारत से दो साल बाद स्वतंत्र हुआ चीन, आज हमसे मीलों आगे हैं कारण एक मात्र नेहरू गांधी परिवार की चरणवंदना रही। नेहरू गांधी परिवार से मिले चांदी के चंद टुकड़ों के लिए इन अर्थशास्त्रियों, रक्षा मंत्रियों, विदेश मंत्रियों ने देश को अपने कुकर्मों से देश को शर्मसार किया।
तत्कालीन सरकार ने इन तीन महीनों (मार्च, अप्रैल और मई) में करोड़ों मजदूरों के अकाउंट में पैसा डाला, करोड़ों जनधन खातों में एकमुश्त रूपये डाले, करोडों किसानों के खातों में रूपये डाले, करोड़ों महिलाओं को उज्जवला योजना के तहत घरेलू सिलेंडर गैस मुफ्त दिये। इसके अलावा कारोबारी समुदाय के टैक्स राहत, लोन राहत, यही लोन राहत मध्यमवर्गीय परिवार के लिए भी।
नेहरू गांधी परिवार के गुलाम चरण चाटूकारों ने कभी अपने डकैत आकाओं से ये नहीं पूछा की 60 सालों के शासन में इन डकैत परिवारों ने आम नागरिकों का बैंक अकाउंट क्यों नहीं खोला, इन आम नागरिकों को स्वावलंबन के दिशा में कार्य क्यों नहीं किया।
इन डकैत लुटेरे परिवारों ने आम जनता को चौतरफा लुटने के लिए फावड़ा चलाने का "मनरेगा" योजना चलाया, और आम जनता की भावनाओं के दोहन की आड़ में अरबों खरबों का गोलमाल किया।
स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे लूटपाट से भरपूर इस "मनरेगा" योजना का कायाकल्प इस तत्कालीन सरकार ने किया। इस योजना के लाभान्वित अपने आधार आधारित बैंक अकाउंट में डायरेक्ट पैसा पाते हैं और ग्रामीण विकास कार्य की पारदर्शिता भी बनी रहती है। लूटपाट भ्रष्टाचार सब बंद, बस यही तकलीफ इन लुटेरे डकैत परिवारों की है। माल, मलाई अब मिल नहीं रहा तो जनता को भ्रमित करो।
देश के गद्दारों, विभीषणों!
ये मोदी का भारत है, ये आज के स्वालंबी युवाओं का भारत है, ये देश के अंदर के आस्तीन के सांपों और देश के बाहर के दुश्मनों को जड़मूल से मिटाने में सक्षम मोदी का भारत है।
याद रखना साठ साल के पापों का हिसाब अभी भी देना है, किसी भ्रम में नहीं रहना।
ब्यथित मन से,
ठाकुर की कलम से
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