कोरोना महामारी के दौड़ में हमें इत्मिनान से अपने कर्मकांड की दशा और दिशा के बारे में सोचना चाहिए

इस लोकडाउन में हमें कुछ बातों पे इतमीनान से सोचना चाहिए.... 
 
वजह चाहे लोकडाउन ही है लेकिन कुछ अच्छा भी हो रहा है..... 
लोकडाउन में शराब पे कुछ हद तक रोक लगी है जो पूरी तरह से लगनी चाहिए.... 
नशे से नाश होता है हर तरह का नशा मुक्त होना चाहिए हमारा देश.... 
अभी लोकडाउन के चलते मृत्यु भोज पे रोक लगी है जो बिल्कुल सही है.... 
अभी कोई कहीं नहीं जा सकता तो.... किसी की मृत्यु पे कोई हरिद्वार भी नहीं जाता... फिर भी कोई दिक्कत नहीं है... 
शादी हो नहीं रही ज्यादा लेकिन अगर कोई 1% हो रही है तो वहाँ कोई पंडित नहीं, कोई बैंड बजा नहीं, 5-10 लोग होते हैं बिलकुल साधारण तरीके से हो रही है किसी तरह का कोई आडंबर नहीं हो रहा... 

भ्रष्टचार में भी गिरावट आई है क्यों कि दलालों की दुकान बंद है लोकडाउन में.... 

इससे साफ जाहीर होता है कि गंगा जमुना में पैसे देकर मुक्ति खरीदी नहीं जाती इसकी बजाय हमें पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति करनी चाहिए...... 

सतभक्ति करेंगे तो ना मृत्यु भोज करेंगे ना करायेंगे.... 
देश दहेज मुक्त होगा.... 
आडंबर रहित होगा.... 
भ्रष्टाचार मुक्त होगा.... 
नशा मुक्त होगा.... 

पूरी तरह साफ हो गया है हमें जरुर सोचना चाहिए... सब गलत तौर तरीकों को, रिवाज़ जो सिर्फ़ समाज में चले आ रहे हैं जो गलत है उनको पूरी तरह से बंद करने का अभी बिल्कुल सही वक़्त है... 

सभी मिलकर नशा, मृत्यु भोज, दहेज, भ्रष्टाचार आदि को हमेशा के लिए बंद करें और परमात्मा की भक्ति करे.. 

🙏🙏🙏🙏

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