... हम कब संतुष्ट होंगे.................

................ हम कब संतुष्ट होंगे.................                           जिस समय सरकार बोली जो जहाँ है वही रहे। लोग पैदल ही घर के ओर चल दिये। जब ट्रेन, बस से भिजवाया तो राज्य सरकार विचलित होने लगी। कोरोन्टाईन सेंटर की व्यवस्था बिगड़ने लगी। घर भेजा जाने लगा, तो सामाजिक बहिष्कार शुरु हो गया। याद रखें हमारे बीच के ही चुनें हुये लोग सरकार चलाते है। हम तो सिर्फ सामने जो समस्या आई, उसे ही देख पाते है लेकिन सरकार को आगे-पीछे, सब देखकर काम करना होता है। इसलिए हमें आगे आनेवाले समस्या के बारे मे ध्यान आकृष्ट कराना चाहिए। सबके सहयोग के बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है। दिमाग सिर्फ सरकार के पास है, ऐसा नहीं है। हाँ उनके पास संसाधन है जिसका सही उपयोग का रास्ता कोई भी समझा सकता है। रोने से कुछ नहीं होने वाला है, आँसू पोछने की कोशिश हो। 

इन सारी बातों के पीछे सेक्युलर जेहादी नेताओं की बहुत बड़ी सोची समझी साजिश है। सरकार के कहने पर लोग रुकने वाले थे लेकिन ऐसा इन जेहादियों द्वारा होने नही दिया गया। इन जेहादियों को तो रोहिंग्या जो बसाना था, वोट बैंक जो बनाने थे।

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