*अपनी जिहादी सोच और बर्बर चालों में वे स्वयं फँस चुकें हैं"*
कल दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय मुख्यमंत्री केजरीवाल जी ने जनता से कहा है कि हमे कोरोना के साथ जीना पडे़गा (मस्त फिल्मी डायलॉग था ) और लाकडाउन मे ढील देने की सिफारिश करते हुए कहा है कि सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र मे कुछ प्रतिशत कर्मचारी काम पर लौट सकते है।
हकीकत में शाजिश रचने वाले फंस चुके हैं इसलिए ये उनका अंतिम प्रयास है,
#आइये_शाजिश_को_समझते_हैं
जिहादी पाठशाला और सुसाइड बंबर (कोरोना बम) से संचालित तबलीगी जमात दिल्ली में किसके संरक्षण में थी ये किसी से छिपा नहीं है।
तबलीगी मरकज का केस तब जाकर उजागर हुआ था जब दिल्ली विधायक अमानतुल्लाह खान ने अपने घर में एक प्रोग्राम करवाया था।
तबलीगी मजहबी मौलाओं के बीच और कोरोना का पहला केस बगैर ट्रैवल हिस्ट्री वाला शाहीनबाग से ही मिला था आपको याद तो होगा ही, वो महिला मरकज के प्रोग्राम में शामिल हुई थी।
अमानतुल्लाह के घर में
तब जाकर सरकार को पता चला था कि मरकज मे दो हजार लोग एकसाथ मौजूद हैं और आनन फानन मे धर पकड़ चालू हुई और तब तक देर हो गयी और तबलीगी देशभर के कोने कोने मे पहुंच चुके हैं।
उसके बाद ही मुंबई, इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद, कोलकाता लखनऊ, आगरा में केस बढना शुरू हुए।
मोदी सरकार स्थिति भाँपते हुए पहले हीं लाकडाउन कर ही चुकी थी, लेकिन शाहीनबाग वाले उठने को तैयार नहीं थे, जबतक उनके बीच कोरोना का केस नहीं मिल गया। ये भी याद होगा ही,
लाकडाउन से एक चीज बहुत अच्छी हुयी कि जो तबलीगी जहां थे जिन मोहल्लों मे थे वहीं फंसकर रह गये और इनकी धरपकड़ चालू हो गयी और साथ में उनके मोहल्लों से पत्थरबाजी भी शुरू हुयी इनको बचाने के लिए इसी बीच पूरे देश ने देखा कि कैसे वो लोग सब्जी, भाजी फल, फ्रूट, करेंसी नोट आदि पर थूंक लगाकर बेंच रहे थे।
खैर,
लेकिन तबतक ये अपने मोहल्लों मे कोरोना बांट चुके थे।
अब आइये असली #मुद्दे पर #राहुल गांधी और #सोनिया गांधी का बयान शुरुआत में आपको याद होगा ही कि मोदी सरकार ने लाकडाउन में जल्दीबाजी कर दी और #तबलीगी के बारे मे जब जनता बोलने लगी तो आरोप मढ दिया कि मुसलमानों को परेशान किया जा रहा है।
खैर दुनियाभर की पंचायत हुई।
अब आते हैं मूल मुद्दे पर, #शतरंजी चाल और शह मात के खेल पर,
केजरीवाल और सोनिया गांधी को अंदाजा नहीं था की जनता इतना लंबा लाकडाउन मानेगी।
इसीलिए दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों मे मजदूरों के नाम पर भींड़ को इकट्ठा किया गया माहौल बनाया गया।
सोनिया और केजरीवाल ने नहीं सोचा था कि मोदी सरकार लाकडाउन बढाती रहेगी और जनता मानती रहेगी।
केजरीवाल और सोनिया गांधी ने सोचा था कि जब नौकरी और रोजगार बंद पडे़गा तो एक सीमा के बाद लोग सड़कों पर निकल पडे़ंगे और फिर शुरू होगा कोरोना का फैलना व्यापक तौर पर,
लेकिन मोदी सरकार ने देश की और जनता ने अपनी जान की परवाह करते हुए लाकडाउन का पालन करते हुए इनकी करतूतों पर पानी फेर दिया।
एक महीना होने को आया है।
मुस्लिम मोहल्लों में मामला तो अब बिगड़ना शुरू हुआ है, पहले डेली एक हजार केस आ रहे थे लेकिन पिछले 3 दिनों से कोरोना मरीजों का आंकड़ा अचानक से दो हजार हो गया है।
और इधर मोदी सरकार ने लाकडाउन 17 मई तक बढा दिया है।
पिक्चर समझ आई मित्रों ,
कोरोनो मरीज वाले हाटस्पाट आलरेडी सील किए जा चुके हैं ,
मैंने 20 दिन पहले ही बता दिया था कि मुस्लिम मोहल्लों में कम्यूनिटी स्प्रेड हो चुका है,
जिस आबादी ने इसको फैलाया और छिपाया वो आबादी अब फंस चुकी है।
इतना समझ लीजिए
इसीलिए केजरीवाल और सोनिया गांधी फड़फड़ा रहे हैं और केजरीवाल लाकडाउन खोलने का माहौल बना रहा है ताकि कोरोना को फैलाने की शाजिश सफल हो जाए।
130 करोड़ की आबादी वाला भारत इसको झेल नहीं पाएगा।
अभी तो मरीज कम हैं इसलिए आराम से इलाज हो रहा है लेकिन बाद मे नहीं होगा,
इटली, अमरीका, स्पेन, ईरान सब उदाहरण आपके सामने हैं।
अरूंधती राय का जो बयान विदेशी मीडिया को दिया गया है कि मोदी सरकार मुसलमानों का सामूहिक नरसंहार करवाना चाहती है वो यूं ही नहीं दिया गया है।
राहुल गांधी आरोग्य सेतु ऐप के खिलाफ क्यूं भौंक रहा है इसका आपको अंदाजा भी नहीं है।
फेसबुक पर जो लोग कोरोना को हल्का फुल्का रोग समझ रहे हैं वो निरा मुर्ख हैं।
जहां तक मै समझता हूं कोई भी अपने बच्चों और बूंढो को इस रोग कि गिरफ्त मे नहीं आने देना चाहेगा।
ये जो मजदूरों की वापसी हो रही है ना वो ऐसे ही नहीं हो रही है।
मै फिर कहता हूँ, ये भारत विरोधी तत्वों और भारतीयोँ दोनो के अस्तित्व की अंतिम लडाई है।
ये शाजिशों का दौर है,
सतर्क रहे जागरूक रहें,
आशा करता हूँ मेरी बात आप सबको समझ आ रही होगी।
अंतिम बात आप सबने 40 दिन लाकडाउन मे गुजारे, 30 दिन और गुजार लीजिए आपके सामने पूरी पिक्चर आ जाएगी, अकेले हमारा ही नुकसान नहीं हो रहा है पूरी दुनिया बंद है चाहे अमरीका हो या इटली हो या रुस या ब्रिटेन हो।
हर हर महादेव
"ठाकुर की कलम से"
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