“#ब्रेस्ट_टैक्स” की झूठी कहानी का सच !

“#ब्रेस्ट_टैक्स” की झूठी कहानी का सच !
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पिछले लगभग चार वर्षों से मेरा ध्यान इस कहानी पर रहा है. यदि, आपको समय मिले तो आप बस एक बार #विकिपीडिया के इस पेज पर जाकर देखें. तो आप पाएंगे कि मात्र पिछले तीन वर्षों में इस विषय पर अचानक से बहुत सारे #वामपंथी न्यूज पोर्टल पर यह पब्लिश की गयी हैं. 

https://en.wikipedia.org/wiki/Breast_Tax

इस विषय पर, मै आप सबके साथ कुछ विश्लेष्णात्मक “तथ्य” साझा करना चाहता हूँ। 

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प्रश्न: यह कहानी क्या है? 
उत्तर: दरअसल, जैसा कि इन समस्त वामपंथी न्यूज पोर्टल पर दिखाया या बताया जा रहा है, इसके अनुसार केरल के त्रावणकोर के #राजा_वर्मा ने, एक विशेष जाति के समूह ‘#Nadar’ एवं '#Ezhava’ के महिलाओं के उपर अपने #स्तन को ढंकने के लिए #टैक्स लगाया था. जिसके तहत उस जाति की महिलाओं को अपने स्तन ढकने के लिए, टैक्स अदा करना पड़ता था। 1810s के आसपास, एक दिन, #नागेली, में उस जाति की एक महिला ने टैक्स देने से मना कर दिया था, और विरोध में अपने स्तन को ही काट डाला था। अंततः उसकी मृत्यु हो गयी थी। 

इस कहानी को सबसे पहले #TOI ने मार्च २०१६ में छापा था, विजय सिंह नामक व्यक्ति ने इस पर स्टोरी की थी.[1]
[1]https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/She-died-fighting-breast-tax-her-name-lives-on/articleshow/51283819.cms

इसी स्टोरी की उठाकर अन्य सभी न्यूजपोर्टल ने  छापा । निश्चित रूप से वे ऐसा करेंगे ही। सारे के सारे इसी तरह कहानी की प्रतीक्षा में रहते हैं। जैसे भूखे शेर होते हैं। ऐसे ही समस्त वामपंथी न्यूजपोर्टल एवं उनके जर्नलिस्ट। #BBC, #The_Viar SCROLLED, The Anti Hindu इत्यादि।[2] 
[2] https://www.bbc.com/news/world-asia-india-36891356 

इसपर तो किसी वामपंथी ने एक #फ़िल्म भी बना डाली है। इसमें आश्चर्यचकित होने वाली बात नही है, इन सबने झूठी फिल्म भी बना ली. 
 
उद्देश्य क्या है?

वही मिशनिंरियों के प्रोपगैंडा को आगे बढ़ाना। शोषित वंचित पीडितो की असत्य प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाना. 

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प्रश्न: क्या इस कहानी में सत्यता है? 
उत्तर: एक रत्ती भर की भी सत्यता नही है। यदि आप, इस कहानी की तथ्य एवं तह तक जाएंगे तो आप पाएंगे कि, कोई ईसाई मिशनिंरी के Hardgrave Robert एवं R. N. Yesudas के द्वारा लिखित पुस्तक हैं, जो  सन 1969 और 1980 ई में लिखी गयी है. [3-4] 
[3] The Nadars of Tamilnad, Hardgrave, Robert L, page 50-70, 
https://archive.org/details/nadarsoftamilnad0000hard/page/58/mode/2up
[4] The History of the London Missionary Society in Travancore, 1806-1908, page 19 https://books.google.co.in/books?redir_esc=y&id=0oscAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=tax

किंतु जब आप इन पुस्तक के मूल स्रोत को क्रॉस चेक करेंगे तो आप पाएंगे कि, यह सब के सबका सब बकवास एवं झूठी कहानी है। एक रत्ती भर की सत्यता नहीं थी। इन सबका स्त्रोत वही लंदन मिशनरी स्कूल के पत्र हैं. 

[संलग्न चित्र १ एवं २ को देखें.] 

सबसे ज्यादा हास्यास्पद बात यह है कि इनके पास 1870-80 ई में, 1830s ई में हुई घटना के बारे में लिखते हैं। वह भी बिना कोई प्रमाण के। जैसा कि अधिकतम, एट्रोसिटी लिटरेचर के तहत, समस्त मिशनरी कार्य करती है। 

प्रश्न: यह टैक्स का क्या मामला है? क्या स्तन को ढकने के लिए टैक्स लगाया गया था? 
उत्तर: नहीं। यह दोनो भिन्न भिन्न घटनाएं हैं। इस टैक्स, का स्तन ढकने से कोई सम्बद्ध नहीं है। 

आप सब जब मूल स्त्रोत को पढ़ेंगे तो आप पाएंगे त्रावणकोर में रानी भी अपने स्तन को नहीं ढकती थी। बल्कि स्तन ढकना, ऐसा कोई कांसेप्ट भी नहीं था। आपको कुछ प्रमाण दिए रहा हूँ. 
17वीं शताब्दी में एक डच यात्री William Van Nieuhof आया था, उसके द्वारा एक लिखित पुस्तक है जिसमें उसने बस समय “अस्वथी थिरूनल उमायामा रानी” के पहनावे के बारे में कहता है, "मुझे उनके सम्मुख पेश किया गया था। उसके लिए 700 से अधिक नायर सैनिकों का एक पहरा था। रानी की पोशाक उसके मध्य के चारों ओर लिपटे कॉलिको के टुकड़े से अधिक नहीं है, उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा नग्न भाग में दिखाई देता है।'आप सब उसके द्वारा चित्रित घटना को इस लिंक पर देख सकते हैं।
http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00routesdata/1700_1799/malabar/quilon/nieuhofqueen.jpg

उसके द्वारा चित्रित दूसरी एक महिला पुरुष को देख सकते हैं
http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00routesdata/1700_1799/compendia/nieuhof/malabarcouple.jpg

राजा रवि वर्मा द्वारा निर्मित पेंटिंग महरानी भरनी थिरूनल पार्वती बाई की पेंटिंग (1850-1900) https://www.pinterest.com/pin/180636635029050604/
आप इण्डिया ने 'Scroll'' नामक न्यूज़ वेबसाइट को इसी विषय पर एक्सपोज़ करते हुए कई अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।। जिसमें ब्राह्मण एवं नायर (क्षत्रिय) परिवार के महिला सदस्यों का पहनावा बिल्कुल सामान्य जनता की तरह है। 
https://www.opindia.com/2018/01/the-recurring-myth-of-breast-tax-doesnt-seem-to-die-down-this-time-propagated-by-scroll/amp/

यह सब Modesty, Morality का कॉन्सेप्ट #ईसाइयत के आगमन के पश्चात शुरू हुआ। 

दरअसल, #टीपू_सुल्तान के आक्रमण से बचाने के लिए एवं अपनी सेना को मजबूत करने की आपूर्ति हेतु, वहाँ #राजा_मार्तण्ड_वर्मा (1729-1758) ने बहुत सारे छोटे छोटे चीज़ों पर टैक्स लगाया था। जैसे: उदाहरण के लिए उन्हें कुप्पाकजा (एक झोपड़ी में रहने वाले कर), तालककर्म (प्रधान कर), मणिपोनोन्नु (आभूषण कर), एझापुटी (ताड़ी का दोहन कर), मीशाश्रम (मूंछ कर), तारियारा (हथकरघा पर उपकर), मेचिक्करम का भुगतान करना पड़ा। मवेशी पालन), मीनपट्टम (मछली पकड़ने का कर) इत्यादि। 

ऐसे ही उसमें से ब्रेस्ट टैक्स या फिर 'मुलक्करम' था, जो किसी महिला की आयु 14 वर्ष होने के बाद, मैनुयल कार्य करने हेतु टैक्स देना पड़ता था। इसी तरह, 14 वर्ष आयु होने पुरुषों को भी हेड टैक्स या थलक्करम टैक्स देना पड़ता था। ब्रेस्ट टैक्स का वास्तविकता में उसे ढकने पर कोई टैक्स नहीं था। 

[वैसे ध्यान दें, आज, क्या आप ये सब टैक्स नहीं देते हैं?]

स्त्रोत: A Social History of India By S. N. Sadasivanm, Page 393
https://books.google.co.in/books?id=Be3PCvzf-BYC&printsec=copyright&redir_esc=y#v=onepage&q=tax&f=false

रही बात स्तन को ढकने की कहानी की, तो जब मिशनरियों ने एक विशेष जाति का धर्मांतरण करवा दिया तो, वे लोग अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को ढकना शुरू, जिसका विरोध नायरों ने किया। उनका विरोध उनके धर्मानन्तण को लेकर था, तथा स्वयं की जाति से भिन्न पहनावे को लेकर था। 

[नागेली की महिला द्वारा अपने स्तन को काट देने की घटना, झूठी एवं काल्पनिक है. यह कोई तो कृष्णनन ने 1960 ई में इस पर मन गढ़न्त कहानी लिखी। #ब्यूरोक्रेट था। वामपंथी। ]

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प्रश्न: फिर न्यूज़ पोर्टल ने इसके बारे में क्यों छापा? 
उत्तर: यह बेहद रोचक है। अब चूंकि वहाँ का राजा ब्राह्मण था, अतएव इससे बेहतर मसाला अपने प्रोपगैंडा फैलाने के लिए नहीं मिल सकते। 

इसकी सबसे पहले स्टोरी टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी थी। मार्च 2016 में। 

जब उस पत्रकार विजय सिंह से किसी ने ट्विटर पर पूछा इस विषय के बारे में पूछा गया था, तो उसने अपने उत्तर में कहा कि, उसने इस स्तन काटने वाली स्टोरी को, किसी आर्टिस्ट द्वारा बताए गए कहानी के अनुसार लिखा। वहाँ पर उनके वंशज भी रहते हैं। जब उससे पूछा कि आप क्या इस स्टोरी में सुधार नहीं करना चाहते, तो वह कहता हैं कि इस पर रिसर्च करने की आवश्यता है। और कुछ भी आगे नहीं कहता। वह अपने स्टोरी को इस आधार पर 'डिफेंड' करता है क्योंकि वहाँ के कुछ लोगों ने उसके बारे में उसे यही बताया। 

आप ट्विटर पर आज भी उसके द्वारा दिया हुआ उत्तर देख सकते हैं:
https://twitter.com/vijaysinghTOI/status/1260621320011649024?s=20

इमेज 3 में, उन पत्रकार महोदय का उत्तर है। 

यह है एक पत्रकार का बौद्धिक स्तर! सॉरी यही उसका पेशा है। 

जैसा कि ऊपर लिखा हूँ, इसी स्टोरी की उठाकर, अन्य सभी न्यूजपोर्टल, ने स्टोरी छाप दी। निश्चित रूप से वे ऐसा करेंगे ही। सारे के सारे इसी तरह कहानी की प्रतीक्षा में रहते हैं। जैसे भूखे शेर होते हैं। ऐसे ही समस्त वामपंथी न्यूजपोर्टल एवं उनके जर्नलिस्ट। BeBC, The Liar, The Anti Hindu इत्यादि। 

इसपर तो किसी वामपंथी ने एक फ़िल्म भी बना डाली है। 

उद्देश्य क्या है?

वही मिशनिंरियों के प्रोपगैंडा को आगे बढ़ाना।

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#CBSE ने कुछ वर्ष पूर्व इस घटना को अपने पाठ्यक्रम से बाहर निकाला था।

https://www.outlookindia.com/website/story/ncert-becomes-party-to-an-attempt-to-wipe-out-memory-of-caste-oppression/297532

दलितों के नाम पर इस महाझूठ को फैलाने का काम कांग्रेस-जेहादी कर रहे हैं और मूर्ख तथाकथित दलित हिन्दु बन रहा है।
सत्ता और न्यापालिका को समाज विभाजनकारी झूठ को रोकना चाहिए दुर्भाग्य से सत्ता और न्यायपालिका अबतक इस विषय में पंगु साबित हुए हैं।

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