गांधी परिवार का गुलाम चरण चाटूकार भूतपूर्व चीफ जस्टिस मार्कंडेय काटजू तथा जिहादी वामपंथी, गद्दार कांग्रेसी मुगलों के हरम की उपज मीम और साऊथ अफ्रीकी मायावती वाले भीम इसीलिए वीर सावरकर को अंग्रेजो का एजेंट बताते है क्योंकि....
गांधी परिवार का गुलाम चरण चाटूकार भूतपूर्व चीफ जस्टिस मार्कंडेय काटजू तथा जिहादी वामपंथी, गद्दार कांग्रेसी मुगलों के हरम की उपज मीम और साऊथ अफ्रीकी मायावती वाले भीम इसीलिए वीर सावरकर को अंग्रेजो का एजेंट बताते है क्योंकि....
1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई है?
2. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ..!
3. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में 7 अक्तूबर 1905 को वीर सावरकर ने जलाई थी…! (सोलह साल बाद 11 जुलाई 1921 को गाँधी ने इसकी नकल की थी). इस घटना के बाद बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी... जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र ‘इन्डियन ओपीनियन’ में गाँधी ने निंदा की थी…!
4. विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के कारण सावरकर को 1905 में पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया था और दस रूपए का भारी जुर्माना किया गया था. इसके विरोध में कॉलेज में हड़ताल हुई… स्वयं तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर के पक्ष में सम्पादकीय लिखा…!
5. वीर सावरकर भारत के ऐसे पहले बैरिस्टर थे जिन्होंने 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफ़ादार होने की शपथ नहीं ली… इस कारण आगे उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नहीं दिया गया…!
6. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे, जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा "ग़दर" कहे जाने वाले संघर्ष को ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ नामक ग्रन्थ लिखकर सिद्ध कर दिया…!
7. सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी लेखक थे जिनके लिखे ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक पर ब्रिटिश संसद ने प्रकाशित होने से पहले ही प्रतिबन्ध लगा दिया था…
8. ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विदेशों में छापा गया, और भारत में भगत सिंह ने इसे छपवाया था जिसकी एक एक प्रति उन दिनों भी तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी…! भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी… पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी…!
9. वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी और भारत के पहले राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने "दो-दो आजन्म कारावास" की सजा सुनाई थी…!
यह सजा सुनते ही सावरकर हंसकर बोले - “चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया”…!
10. वीर सावरकर पहले राजनैतिक बंदी थे, जिन्होंने काला पानी की सज़ा के समय 10 साल से भी अधिक समय तक आज़ादी के लिए कोल्हू चलाकर 30 पौंड तेल प्रतिदिन निकाला…!
11. वीर सावरकर कालापानी में पहले ऐसे कैदी थे जिन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकर कोयले से कवितायें लिखीं और रोज लिखकर-मिटाकर ये 6000 पंक्तियाँ याद रखी.. जिन्हें वर्षों बाद पुस्तक का रूप दिया गया.
12. वीर सावरकर पहले देशभक्त लेखक थे, जिनकी लिखी हुई पुस्तकों पर "आज़ादी के बाद भी कई वर्षों तक" (नेहरू सरकार में) प्रतिबन्ध लगा रहा…!
13. वीर सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे, जिन्हें आजादी के बाद भी 1948 में नेहरु सरकार ने गाँधी हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा, पर न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया… देशी-विदेशी दोनों सरकारों को उनके राष्ट्रवादी विचारों से डर लगता था…।
14. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे, जब उनका 26 फरवरी 1966 को उनका स्वर्गारोहण हुआ तब भारतीय संसद में कुछ सांसदों ने शोक प्रस्ताव रखा तो यह कहकर रोक दिया गया, कि वे संसद सदस्य नही हैं... जबकि इसी संसद में विंस्टन चर्चिल की मौत पर शोक मनाया गया था…।
ब्यथित मन से,
ठाकुर की कलम से
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