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आप जब कोई प्रोडक्ट खरीदते हैं तो उस पर लगा "ISI" मार्क अवश्य देखते होगे. लगभग सभी प्रोडक्ट्स की गुणबत्ता के लिए भारत सरकार के एक संस्थान "इंडियन स्टैण्डर्ड इंस्टीट्यूट" ने कुछ मानक निर्धारित किये है. जो प्रोडक्ट उन मानकों पर खरा उतरता है उनको ISI मार्क मिलता है. ISI मार्क वाले प्रोडक्ट की गुणवत्ता सरकार सुनिशिचत करती है.
आपको शायद जानकार हैरानी होगी कि - भारत में इसके समांतर में एक ऐसी गैर सरकारी व्यवस्था खड़ी की जा रही है, जो केवल यह ध्यान रखती है कि - प्रोडक्ट इस्लामी तौर तरीके से तैयार हुआ है या नहीं. हो सकता है देखने में आपको यह मामूली बात लगे लेकिन भविष्य में इसके जो दुष्परिणाम आने वाले है इसका अंदाजा आप लगा सकते है.
इस सार्टिफिकेट को नाम दिया है "हलाल सर्टिफाइड". भारत सहित दुनिया भर के मुसलमानो से कहा जा रहा है कि - केवल वही प्रोडक्ट खरीदे जिस पर "हलाल सर्टिफाइड" का लोगो लगा हो. कई सारी मुस्लिम धार्मिक संस्थाए यह सार्टिफिकेट जारी कर रही है. ये संस्थाए सर्टिफिकेट देने की फीस भी लेती है और उन फैक्ट्री की निगरानी भी रखती है.
अपना प्रोडक्ट मुस्लिम को बेचने की खातिर गैरमुस्लिम निर्माता भी ये सार्टिफिकेट ले रहे हैं. इसके लिए हलाल सार्टिफिकेट जारी करने वाली गैर सरकारी संस्थाए मोटी फीस भी लेती है और अपनी शर्तें भी थोपती है इसके आलावा इनके द्वारा नियुक्त किये गए निजी इंस्पेक्टर फैक्ट्री की निगरानी करते है और निर्माण प्रिक्रिया को चेक करते है.
अभी हाल में कुछ हिन्दुओं द्वारा अपनी दूकान पर हिन्दू शब्द लिखने पर, हिन्दुओं पर कानूनी कार्यवाही हो गई थी लेकिन इस प्रकार की इस्लामी व्यवस्था बनने पर किसी को कोई ऐतराज नहीं है. अगर कोई यह कहता है कि - हिन्दू केवल हिन्दू से खरीदे तो वह अपराधी हो जाता है लेकिन "हलाल मार्क" लगाने पर कोई कार्यवाही नहीं होती है.
चलो ये मान लेते है कि - मुस्लिम्स के यहाँ मांस खाने के लिए जानवर को क़त्ल करने के लिए अपने कुछ नियम है इसलिए जानवर के मांस को "हलाल" सुनिश्चित करने के लिए ऐसा किया होगा. लेकिन ऐसा नहीं है बल्कि मांस के अलावा भी अन्य प्रोडक्ट के साथ ऐसा किया जा रहा है जो सीधे सीधे सरकारी व्यवस्था को एक चुनौती है.
मिठाई, नमकीन, चॉकलेट, अनाज, तेल, साबुन, काजल, नेलपॉलिश, लिपस्टिक, शहद, टूथपेस्ट, जूते, कपडे, आदि से लेकर होटल, हॉस्पिटल, बैंक, डेटिंग वेवसाइट, रिहाइशी कालोनियों आदि को भी "हलाल सर्टिफाइड" का प्रमाणपत्र जारी हो रहा है. इनको किस आधार पर ये सार्टिफिकेट जारी होता होगा इसका अंदाजा भी आप खुद लगा सकते है.
भारत में हलाल प्रमाणपत्र देनेवाली अनेक निजी संस्थाएं हैं, उनमें से कुछ प्रमुखता से निम्नांकित संस्थाएं अंतर्भूत हैं –
* हलाल इंडिया प्रा. लिमिटेड
* हलाल सर्टिफिकेशन सर्विसेस इंडिया प्रा. लिमिटेड
* जमियत उलेमा-ए-हिन्द हलाल ट्रस्ट
* जमियत उलेमा-ए-महाराष्ट्र
* हलाल काऊन्सिल ऑफ इंडिया
* ग्लोबल इस्लामिक शरिया सविर्र्सेस
* इत्यादि
इस बिषय पर आँखे बन्द करने से काम नही चलेगा. एक तरफ़ तो ये लोग "हलाल सर्टफाइड" के नाम पर वैश्विक अर्थव्यवस्ता का इस्लामीकरण करना चाहते है और दुसरी तरफ कोई हिन्दू अपनी दूकान के बोर्ड पर हिन्दू शब्द लिखता है तो उस पर भेदभाव करने का आरोप लगाने की शिकायत करते है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.
मांसाहारी खाद्द्य पदार्थ के अलावा किसी भी अन्य प्रोडक्ट पर इस तरह का मजहबी का मार्क लगाना और मुसलमानो से इस मार्क को देखकर खरीदने को कहना, साम्प्रदायिकता को बढ़ाबा देना है. भारत में इस पर जल्द रोक नहीं लगाईं गई तो यह व्यापार का साम्प्रदायिक करण कर देगी जिसकी परिणीति अलगाववाद के रूप में सामने आएगी.
इस साम्प्रदायिकता के खिलाफ लोगों को जागरूक करना होगा. कल को हिन्दू , सिक्ख , ईसाई, यहूदी, बौध्द, इत्यादि सभी धर्मो की धार्मिक संस्थाये, मुसलमानो की तरह, ऐसे सार्टिफिकेट देने लगीं और अपने धर्म के लोगों से उस सार्टिफिकेट को देखकर प्रोडक्ट खरीदने को कहने लगीं तो सारी दुनिया का व्यापार ही साम्प्रदायिक हो जाएगा
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