पिज्जा नही आलू पराठे खाएंगे
बर्गर नही रसगुल्ले उड़ायेंगे
बर्थ डे नही अब जन्मदिन मनाएंगे
पार्टी नही अब सत्संग कराएंगे
चीन के माल को अब हाथ न लगाएंगे
देशी है कसम से अब स्वदेशी ही अपनायेंगे
अब न चीन से माल खरीदेंगे न अमेरिका जायेगे
मिलकर सभी अब यही स्वर्ग बनाएंगे
आपस मे खरीदेंगे आपस मे बिक़बायेंगे
बस चंद वर्षों में हम आत्मनिर्भर हो जायेगे
देश के पैसों को अब देश मे रोकना होगा
चीन से आयात करने वाले व्यापारियों को टोकना होगा
अपना माल कुछ मंहगा भी हुआ तो संभाल लेंगे
घी खिचड़ी में ही गिरेगा मिलकर झेल लेंगे
हाथ से हाथ पकड़ हमे चलना होगा
देश हित मे अपने स्वार्थ से आगे बढ़ना होगा
व्यापारी भाइयो को भी देश भक्ति का जज्बा दिखाना होगा
चीनी समान को अब सिरे से किनारा करना होगा
जो 20 लाख करोड़ आया है उसका सही इस्तेमाल करना होगा
लूटेरो की लूट से देश बचाना होगा
हमे सजग ,सचेत रहना होगा
राजनेता अफसर ओर उद्योपतियों से देश का धन बचाना होगा
किसान,मजदूर ओर जरूरत मंद तक उनका हक पहुँचना होगा
4 रोटी तीन भाइयों में बाट कर खाएंगे
हर पेट को निवाला खिला कर सुलायेंगे
बस एक सक्षम को तीन जरुरतमंदों को संभालना होगा
तभी जाकर देश आत्मनिर्भर और स्वावलम्बन होगा
विषम परिस्थिति में विश्व भारत के मार्ग से चलेगा
तभी जाकर भारत अब विश्व गुरु बनेगा
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