थूकने वालों का गणित समझिए :
कोरोना तो फैलेगा ही, साथ ही लॉक डाउन बढ़ने के कारण आर्थिक जिहाद का मकसद भी पूरा होगा। इन थूकने वाले जिहादियों का देश की तरक्की में कोई योगदान तो होता नहीं है, और गरीब होने का फ़ायदा उठाकर, दोनों समय मुफ्त भोजन सरकार के साथ मिलकर हमारी स्वयं सेवी संस्थाएं दे ही देती हैं। लिहाजा अपना जिहाद फैलाकर अपने जन्नत की व्यवस्था करना इनका एकमात्र उद्देश्य रह जाता है।
दूसरी तरफ इनके थूकने से प्रभावित होने वाले वर्ग की देश की तरक्की और समाज में सौहार्द की बड़ी जिम्मेदारी होती है। लॉक डाउन के कारण व्यापार ठप्प होगा, सरकार की टैक्स आपूर्ति कम होगी, विकास पिछड़ेगा, तरक्की रुकेगी, और दुश्मन को बल मिलेगा।
बस ! और क्या चाहिए, इन जाहिल थूकने वालों को। यदि बिना किसी लागत के सिर्फ थूकने, से दो जिहादी उद्देश्यों की पूर्ति हो तो भला इन समाज के कीड़ों को इससे सस्ता सौदा कुछ और क्या मिलेगा।
इसलिए इनके आत्मघाती और विश्वासघाती इरादों को पहचानिए।
इन्हें गिरफ्तार कर के, रासुका लगाकर भी नही सुधारा जा सकता।
इसलिए राज ठाकरे को समर्थन देते हुए, इन थूकने वालों का इलाज एकमात्र विकल्प, गोली मारना ही है।
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