धर्मों रक्षति रक्षितः 🚩🚩🚩

🚩 कोई बताएगा कि हमें कब तक ये अपमान सहना होगा?

#अज़ानास्त्र

🚩 भारत में ग़ज़वा-ए-हिन्द को असली जामा पहनाने के लिए भारत सहित दुनिया भर के मुसलमान सैकड़ों वर्षों से तरह-तरह के जिहाद मुकम्मल अता फ़रमा रहे हैं। इस्लामी प्रैक्टिसेज़ के तहत कुल-मिलाकर 6,666 तरह के छोटे-बड़े जिहाद हैं। इन्हीं जिहादों में दो जिहाद- "धर्म स्थल जिहाद" एवं "शोर जिहाद" भी आते हैं। आज इस पोस्ट में हम हम शोर जिहाद की "मास्टर की" यानी कि "इस्लामी अज़ान" के विषय में चर्चा करेंगे।

🚩 माना कि भारत का संविधान हर किसी को अपने मज़हब और धर्म पर चलने की पूरी इजाज़त देता है लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल भी नहीं कि कोई मज़हबी उन्मादी जमात किसी दूसरे मज़हब या धर्म के लोगों और उनके ईश्वर को जानबूझकर सरेआम गाली देने की चेष्टा करे।

🚩 भारत में मस्जिदों से दिन में 5 बार ऊंची आवाज में अज़ान दी जाती है। यह अज़ान मुसलमानों के लिए इस्लामी नमाज़ की तैयारी का अहम हिस्सा भले ही हो लेकिन यह अज़ान प्रत्यक्ष रूप से बहुसंख्यक हिंदुओं के ईश्वर को गाली देने और उनको ज़लील करने का एक अहम ज़रिया भी है।

🚩 भारतीय मस्जिदों में लाउडस्पीकर से दिन में 5 बार अरबी भाषा में जो अज़ान दी जाती है, भारत का बहुसंख्यक हिंदू समाज उसके अर्थ को न तो जानता है और न ही उसको जानने का प्रयास करता है। भारत का अधिकांश बहुसंख्यक हिंदू समाज 1,000 वर्ष की इस्लामी और अंग्रेज़ी गुलामी में रहते-रहते इतना ज़लील और कायर हो चुका है कि उसे अज़ान के रूप में अपने धर्म और अपने ईश्वर के लिए गालियां सुनना भी सामान्य सी बात लगती है।

🚩 अरबी भाषा में दी जाने वाली इस्लामी अज़ान का खुल्लम-खुल्ला मक़सद दूसरे मज़हब और धर्म के लोगों के ईश्वर को अप्रत्यक्ष रूप से गाली देना ही है। इसको समझने के लिए आपको अरबी भाषा में दी जाने वाली अज़ान का अर्थ समझना होगा-

#इस्लामी_अज़ान 🇲🇷

अल्लाहु अकबर 
अल्लाहु अकबर 
अल्लाहु अकबर 
अल्लाहु अकबर

(अल्लाह सब से महान है)
(अल्लाह सब से महान है)
(अल्लाह सब से महान है)
(अल्लाह सब से महान है)

अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह
अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह

(मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के काबिल नहीं)
(मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के काबिल नहीं)

अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह

(मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद सल्ल. अल्लाह के रसूल हैं)
(मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद सल्ल. अल्लाह के रसूल हैं)

ह़य्य 'अलस्सलाह
ह़य्य 'अलस्सलाह

(आओ इबादत की ओर)
(आओ इबादत की ओर)

ह़य्य 'अलल्फलाह
ह़य्य 'अलल्फलाह

(आओ सफलता की ओर)
(आओ सफलता की ओर)

अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम*
अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम *

(नमाज़ नींद से बहतर है*)
(नमाज़ नींद से बहतर है*)

अल्लाहु अकबर (अल्लाह सब से महान है)
अल्लाहु अकबर (अल्लाह सब से महान है)

🇲🇷🔥 ला-इलाहा इल्लल्लाह 🔥🇲🇷
(अल्लाह के सिवा कोई इबादत के काबिल नहीं)

*यह अल्फ़ाज़ सिर्फ सुबह की नमाज़ में कहे जाते हैं।

🚩 अब मेरा भारत के सभी हिंदुओं से यह प्रश्न है कि इस्लामी अज़ान में लाउडस्पीकर से दिन में 5 बार चिल्ला-चिल्ला कर 🇲🇷🔥"ला इलाहा इलल्लाह.. "🔥🇲🇷 कहना यानी कि हिंदुओं को जबरदस्ती ये सुनाना कि उनका ईश्वर "इबादत के क़ाबिल नहीं ❌❌❌ है", क्या यह हिंदुओं और हिंदुओं के ईश्वर का अपमान नहीं है??? 

🚩 यदि हिंदू समुदाय दिन में 5 बार लाउडस्पीकर से हिंदी में उद्घोष करके देकर चिल्लाने लग जाए कि उनके भगवान के अलावा कोई भी दूसरा ख़ुदा या अल्लाह इबादत के काबिल नहीं है, तो क्या मुस्लिम समाज हिंदुओं के इस अर्चन-उद्घोष को स्वीकार कर लेगा???

🚩 3 लाख से अधिक मस्जिदों द्वारा 1 दिन में 15 लाख से अधिक बार भारत की धरती पर भारत की बहुसंख्यक आबादी को उनके ईश्वर के लिए खुलेआम गाली सुनाना, भारत के इस्लामी समुदाय का एक मज़हबी आतंकवादी कृत्य है। 

🚩 इस मज़हबी आतंकवाद के प्रति भारत के हिंदुओं को एकजुट होना चाहिए अथवा नहीं, सारे हिंदू समाज को इस बात पर विचार अवश्य करना चाहिए!

धर्मों रक्षति रक्षितः 🚩🚩🚩

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