*बाबा साहब अंबेडकर जी का भारतीय चिंतन*

*बाबा साहब अंबेडकर जी का भारतीय चिंतन* 

*श्रीमान प्रफुल्ल केतकर जी द्वारा लिए गए विषय के मुख्य बिंदु:-*

• बाबा साहब एक अच्छे अर्थशास्त्री प्रखर वक्ता कानून के विशेषज्ञ एक अच्छे समाज शास्त्री शिक्षाविद और विदेश नीति में उत्कृष्ट चिंतक एवं एक सिद्ध पत्रकार थे
• अपनी पुस्तक ... in Hinduism मैं बाबा साहब ने कम्युनिस्टों के भारत विरोधी षड्यंत्र का उल्लेख किया है
• 1891 से लेकर 1956 तक बाबा साहब के जीवन में तीन पड़ाव थे
• 1960 तक उच्च शिक्षा में जाकर लेखन कार्य किया सवर्ण जातियों का मेरे जीवन में योगदान
• 1907 से लेकर 1920 तक व्यक्तिगत जीवन के संघर्ष का कालखंड
• 1920 से लेकर सामाजिक संघर्ष का कालखंड
• बाबा साहब संपूर्ण समाज का चिंतन करते थे वे समाज की व्याख्या करते हुए कहते कि सामाजिक व्यवस्था को जिस प्रकार की है कि एक जाति में जन्म लेने के बाद दूसरी जाति में परिवर्तन करने का अवसर नहीं मिलता
• बहुत कम लोग ऐसे थे जो स्वतंत्रता के बाद के समाज की संरचना के विषय में सोच रहे थे जिनमें बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के साथ संघ के संस्थापक परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी भी यही सोच रखते थे। उनका सोचना था स्वतंत्रता मिलने के बाद क्या हमारा समाज और स्वतंत्रता को बनाए रख पाने के योग्य होगा
बाकी लोग सोच रहे थे हम स्वतंत्र कैसे हो, परंतु बाबा साहब और पूज्य डॉक्टर साहब सोचते थे कि हम गुलाम हुए कैसे

• डॉक्टर हेडगेवार और बाबा साहब ने समाज परिवर्तन के लिए क्योंकि एक सा ही कार्य किया था इसलिए वे परस्पर एक दूसरे के पूरक थे ना कि विरोधी
• बाबा साहब ने एक पुस्तक शूद्र कौन थे लिखते हुए अपने चिंतन की कार्य पद्धति विकसित की
• वे संपूर्ण समाज को समग्र रूप से देखते थे जाती पाती की समस्या भी किसी एक जाति के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण समाज के लिए मानते थे
• बाबा साहब ने 3 लोगों को गुरु कहां बुद्ध कबीर और ज्योतिबा फुले तीनों ही सनातन परंपरा के वाहक हैं इसलिए बाबा साहब की दृष्टि में हिंदुत्व का स्थान उच्च था
• बाबा साहब जिस पत्रिका का संपादन करते थे उस पत्रिका के प्रमुख पृष्ठ पर जय भवानी लिखा होता था यह बाबा साहब के हिंदुत्व के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है
• विभाजन के बाद भारत से बाहर पाकिस्तान में गए हुए दलितों के लिए उनकी अपील थी कि वे भारत में वापस आ जाएं
• बाबा साहब ने अपने लेखन में कभी भी दलित शब्द का प्रयोग नहीं किया उसके स्थान पर डिप्रेस्ड सोसाइटी का प्रयोग किया
• बाबा साहब कहते थे कि हम मुस्लिम लीग पर विश्वास नहीं कर सकते क्योंकि वे कभी भरोसेमंद allies नहीं हो सकते।
• Pakistan or partition of India मैं उन्होंने लिखा है कि वे लोग राष्ट्र से ऊपर मजहब को रखते हैं। वे विभाजन के दौरान पूरी जनसंख्या के आदान-प्रदान के पक्ष में थे
• वे कहते थे कि सवाना समाज के विरोध में मेरा संघर्ष नहीं है केवल उनकी मानसिकता बदलने के लिए मेरा संघर्ष है।
• वह क्रिस्चियन मिशनरियों को दोष देते हुए कहते थे कि आपके यहां पर भी छुआछूत है तथा पैसे और सत्ता के दम पर आप धर्म परिवर्तन कराते हैं
• उन्होंने कहा कि मैंने परिवर्तन के लिए अपने 20 वर्षों तक संघर्ष किया परंतु में सफलता नहीं प्राप्त कर सका इसलिए मैं गांधी जी को दिए गए वचन के अनुसार बौद्ध धर्म में परिवर्तित होंगा ऐसे धर्म में में परिवर्तन करूंगा जिससे हिंदू धर्म को कोई हानि न पहुंचे
• 1965 तक कम्युनिस्टों ने बाबा साहब को वर्ग संघर्ष का सबसे बड़ा शत्रु कहा
• अपनी पुस्तक बुद्धा और कार्ल मार्क्स में बाबा साहब लिखते हैं कि कार्ल मार्क्स की समानता का चिंतन केवल आर्थिक है कार्ल मार्क्स यह नहीं जानते कि व्यक्ति केवल आर्थिक नहीं होता बल्कि उसमें अध्यात्म मानवीय मूल्यों का भी समावेश होता है।
• बाबा साहब कहते हैं कि मैं कुछ भी हो सकता हूं लेकिन कम्युनिस्ट कभी भी नहीं हो सकता
• पंचशील समझौते के दौरान बाबा साहब नेहरू जी को चेताते हुए कहते हैं कि माओ की विचारधारा हिंसा की है यह लोग समझौते का पालन करने वाले लोगों में से नहीं है
• वे कहते हैं कि कम्युनिस्ट कभी समाज को सामान बनाने के लिए नहीं बल्कि वर्गों में बांटने के लिए काम करते हैं। न्यायमूर्ति रानाडे से अरे उल्लेख करते हैं कि इनकी भूमिका समाज में कभी सकारात्मक नहीं हो सकती।
• उन्होंने संविधान सभा में संविधान लिखने के दौरान सोशलिज्म और सेकुलरिज्म जैसे शब्दों को देश के लिए हानिकारक बताया
• उन्होंने संविधान के भीतर केवल 3 शब्दों का उल्लेख प्रस्तावना में किया था जस्टिस लिबर्टी एंड इक्वलिटी
• बाबा साहब साथ ही यह बात कहते थे कि इन तीन शब्दों के साथ संविधान की प्रस्तावना में बंधुता भी होना चाहिए
• बाबा साहब कहते थे समरसता का अर्थ होता है समानता सहित बंधुता
• वे नेहरू जी की कश्मीर नीति के कट्टर विरोधी थे
• वे कहते थे कि कबीर की वाणी में समरसता के साथ बंधुता भी है
• हैदराबाद के निजाम से मुसलमान बनने के लिए एवं क्रिश्चियन मिशनरी ओं से क्रिस्टियन बनने के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव मिले परंतु सब को ठोकर मार कर गांधी जी के वचनों का स्मरण करते हुए उन्होंने ऐसे धर्म को अपनाया जिससे हिंदू समाज का अहित न हो इसलिए उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया
• वे जानते थे कि मिशनरियों वंचित समाज का फायदा उठा सकती हैं इसलिए भी वंचित समाज को मिशनरियों से सावधान करते हुए बौद्ध धर्म की ओर ले जाते थे


बाबा साहेब आंबेडकर जी और नेहरू जी के मध्य निरन्तर शीत युद्ध चलता रहा जानिए कुछ तथ्य 
1. बाबा साहब प्लानिंग मंत्रालय चाहते थे किन्तु नेहरू जी ने उन्हें कानून मंत्रालय ही दिया ।
2. बाबा साहब विदेश व रक्षा समिति में सदस्यता चाहते थे जो नेहरू जी ने स्वीकार नहीं की ।
3. बाबा साहब हिन्दुओं में सामाजिक अधिकार और महिलाओं को सम्पत्ति अधिकार के लिए *हिन्दू कोड बिल* लाना चाहते थे जिसे नेहरू जी ने उनके रहते आने नहीं दिया ।
4 बाबा साहेब नेहरू की की विदेश नीति से भी असहमत थे ।
                           किस प्रकार डॉ भीमराव अम्बेडकर जी की सत्य बातों को आज तक छुपाया गया , आधुनिक भारत के निर्माण में आज बाबा साहब उच्च जीवन को केवल जातियों की सीमाओं में बांधना और केवल दलितों का उद्धारक कहना यह उनकी *राष्ट्र निष्ठा के साथ अन्याय* होगा ।

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