शस्त्र_लाईसेंस_के_लिए_बदले_नियम#आर्म्स_रखने_के_लिए_ऐसे_करें_आवेदन

#शस्त्र_लाईसेंस_के_लिए_बदले_नियम
#आर्म्स_रखने_के_लिए_ऐसे_करें_आवेदन

यह सर्वविदित है कि शास्त्र और शस्त्र हम जमदग्नि ऋषि के वंशज अयाचक ब्रह्मर्षियों की पहचान है।

किंतु आज बड़े ही दुःख के साथ कहना पड़ता है कि इसी बात में हमलोग बर्बाद हो रहे हैं।
ज्ञात हो कि हम सामंतों के उपर आर्म्स एक्ट के तहत हजारों के दर्ज हैं अधिकतर केस हथियारों के शौक के चलते हमारे गले की हड्डी बने हुए हैं।

अपने शौक के मद में चूर आज भी उत्तर प्रदेश एवं बिहार के बाभण परिवार में नई पीढ़ी के बच्चे मुंगेर एवं अन्य स्थानों से हथियार खरीदकर बचपने और आल्हड़फन में बेफिक्री से रखते हैं किन्तु यह उनके कैरियर और परिवार की प्रतिष्ठा के लिहाज से कितना घातक हो सकता है इसका लेस मात्र भी भान ना तो उनके अभिभावकों को है और ना ही परिजनों को।

ज्ञात हो कि अगर आर्मस एक्ट के तहत आपके आवास से बरामत अवैध हथियारों में पुलिस को प्रतिबंधित बोर के हथियार (सेना और पुलिस से लूटा गया हथियार) बरामद होता है तो मौजूदा शस्त्र कानून के आधार पर १४ साल कैद ए बामुसक्कत की सजा का प्रावधान है।

अब चूंकि डिजिटल युग में जब देशभर में कुल 35.8 लाख लाइसेंसी हथियार ही हैं और अपराध में नवंर वन और टू यूपी बिहार में आसानी से मिल सकता है हथियार लाइसेंस तो फिर क्यों ना और हम घर में कानूनी रूप से वैध हथियार खरीदकर रखें ताकि हम परशुरामजी के वंश बेलों का शान और सम्मान दोनों बढ़े।

सूचित किया जाता है कि गृह मंत्रालय (एमएचए) ने एक अधिसूचना जारी की और विगत वित्त वर्ष में सभी हथियार लाइसेंसधारकों (नए या पुराने दोनों) के लिए एक हथियार लाइसेंस प्रणाली बना दिया जिसमें राष्ट्रीय हथियार डेटाबेस बनाया जा रहा है।

इस प्रणाली में हथियार धारक को एक 1 अप्रैल, 2019 से एक यूनिक पहचान संख्या (UIN) भी जारी की जा रही है इस पहल के पीछे सरकार का मकसद यह है कि सरकार जानना चाहती है कि देश में किस-किस व्यक्ति के पास किस-किस प्रकार के हथियार हैं?

आइए अब आपको यह बताते हैं आपको कि कैसे हथियार का लाइसेंस लिया जा सकता है?

किस-किस को मिल सकता है नेशनल ऑर्म्स लाइसेंस

सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी स्टेट के ऑर्म्स लाइसेंस को नेशनल लाइसेंस में तब ही बदला जा सकेगा जब लाइसेंस धारक का वास्तव में अलग-अलग शहरों में आना-जाना होता हो. डीएम इसकी अपने स्तर से गहन जांच भी कराते हैं।

रिश्तेदारी में, घूमने, प्रदर्शन या शौक पूरा करने वालों के ऑर्म्स लाइसेंस नेशनल लाइसेंस में नहीं बदले जाते हैं। सिर्फ सांसद, केन्द्रीय मंत्री, रिटायर्ड डिफेंस अफसर, सभी सेवाओं के अधिकारी, खिलाड़ियों को नेशनल ऑर्म्स लाइसेंस जारी किए जाते हैं. इसके अलावा पब्लिक सेक्टर की कंपनी के अधिकारियों को अपनी जरूरत दिखानी होगी तभी उन्हें नेशनल लाइसेंस मिलेगा. अगर कोई व्यापारी देश के विभिन्न जिलों में कारोबार करने के सबूत देता है तो उस पर भी विचार किया जाता है।

शस्त्र नियम में संशोधन होने से उन व्यक्तियों को हथियार लाइसेंस मिलने की संभावना ख़त्म हो जाएगी जिनके पूर्वजों का ट्रैक रिकॉर्ड ठीक नहीं था. हालाँकि यदि किसी लाइसेंस धारक की मृत्यु हो जाती है तो अधिकारी उसके लीगल उत्तराधिकारी ने नाम पर लाइसेंस जारी कर सकेंगे।

शस्त्र अधिनियम की धारा 3 के तहत, किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी हथियार को रखने, लाने और ले जाने के लिए एक सक्षम लाइसेंसिंग प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया लाइसेंस रखना अनिवार्य है।

लाइसेंस के लिए जरूरी दस्तावेज
लाइसेंस आवेदक के आपराधिक रिकार्ड के बारे में आस पास के थानों से जानकारी ली जाती है. आवेदक का चरित्र वेरीफिकेशन (आवेदक की आपराधिक छवि जानने के लिए) भी पुलिस व खुफिया विभाग से कराया जाता है. आवेदक को मुख्य चिकित्साधिकारी से फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करना होता है. आवेदक के पूर्णतः स्वस्थ होने पर ही लाइसेंस दिया जा सकता है. यदि आवेदक का कोई अंग भंग है या फिर कोई दृष्टि दोष है तो उसे लाइसेंस नहीं दिया जा सकता है. आवेदक को अपना आइडेंटिटी प्रूफ, निवास प्रमाण पत्र और फिटनेस प्रमाण पत्र को आवेदन के साथ ही जमा करना होगा.

आवेदक के फार्म पर लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार और एसडीएम की रिपोर्ट ली जाती है. सम्बंधित जिले के एसडीएम और एसपी; आवेदक के पूरे कागजात होने के बाद आवेदक की फाइल को जिलाधिकारी को भेजते हैं. कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद जिलाधिकारी अपने विवेकानुसार शस्त्र लाइसेंस जारी कर देते हैं.

इस प्रकार इस नई प्रक्रिया से स्पष्ट है कि सरकार देश में अवैध हथियारों के बढ़ते प्रचलन और आपराधिक गतिविधियों को कम करने के लिए प्रयत्नशील है. उम्मीद है कि सरकार के इस कदम से देश में अपराधों की संख्या में कमी आएगी।

ज्ञात हो कि कुछ राज्यों में तो नए आर्म्स एक्ट के अनुसार अब आपको अपने घर में तलवार रखनी हो तो उसके लिए लाइसेंस लेना होगा। इसके अलावा संगीन, भाला, बल्लम, कटार रखने के लिए भी लाइसेंस लेना पडे़गा, जिसमें लाइसेंस के समय 500 रुपये की फीस अदा करनी होगी। इस लाइसेंस को हर साल रिन्यू कराना होगा।

इसके लिए 100 रुपये नवीनीकरण फीस देनी पड़ेगी। नए आर्म्स एक्ट के अनुसार 17 तरह की सेवाओं के लिए समय सीमा तय कर दी गई है। अधिकारियों को तय समय में यह काम करना होगा। ऐसा न होने पर अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा। आम्स लाइसेंस के लिए तय सेवाओं में दो दिन से लेकर अधिकतम 60 दिन तक का समय दिया गया है। आर्म्स एक्ट के अनुसार किसी भी काम के लिए दो महीने से ज्यादा का समय नहीं लगेगा।

नए एक्ट के अनुसार अगर आपको अपने लाइसेंस के साथ यात्रा करनी हो तो उसके लिए 500 रुपये फीस अदा करनी होगी। एक लाइसेंस पर तीन हथियार ले सकते हैं। हर एक हथियार के लिए 500 रुपये फीस देने होगी। लाइसेंस के पते में बदलाव के लिए 500 रुपये फीस देनी होगी। गन के लिए तय 120 रुपये, राइफल के लिए 180 रुपये, रिवॉल्वर के 300 रुपये की फीस को बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है।

एनओसी के लिए 500 रुपये फीस तय की गई है। लाइसेंस बुक के लिए 100 रुपये शुल्क देना होगा। लाइसेंस को दूसरे के नाम ट्रांसफर करने के लिए एक हजार रुपये का शुल्क तय किया गया है। लाइसेंस लेने के लिए आवेदन पत्र को शस्त्र अनुभाग में जमा किया जाता है। प्रशासन की ओर से संबंधित तहसील और पुलिस से रिपोर्ट तलब की जाती है। पहले पत्रावली सीओ के पास जाती है और उसके बाद डीसीआरबी।

यहां से सभी थानों से आवेदक के आपराधिक रिकार्ड के बारे में जानकारी ली जाती है। आवेदक का चरित्र वेरीफिकेशन भी पुलिस व खुफिया विभाग से कराया जाता है। आवेदक को मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होता है। स्वस्थ होने पर ही यह लाइसेंस दिया जा सकता है। यदि आवेदक का कोई अंग भंग है या फिर दृष्टि दोष है तो लाइसेंस नहीं दिया जा सकता।

संबंधित तहसील की फाइल पर आवेदक  के फार्म पर हल्का लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार और एसडीएम की रिपोर्ट ली जाती है। एसपी और एसडीएम आवेदक की पत्रावली संपूर्ण होने के बाद आवेदक की फाइल को अलग-अलग कर जिलाधिकारी को भेजते हैं। संपूर्ण पत्रावली पूरी होने के बाद जिलाधिकारी अपने विवेकानुसार शस्त्र लाइसेंस जारी कर देते हैं।

आवेदक फीस जमा करने के बाद शस्त्र लाइसेंस खरीदकर उसको अपने जारी किए लाइसेंस पर शस्त्र की इंट्री कराता है। शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण हर तीन साल बाद कराया जाता है। नवीनीकरण के लिए आवेदक को फीस जमा करनी होती है और फिर संबंधित थाना और एसडीएम की रिपोर्ट तलब की जाती है। रिपोर्ट आने के बाद लाइसेंस का नवीनीकरण कराया जाता है।

कहां-कहां लेकर जा सकते हैं लाइसेंसी हथियार
आम तौर पर आपको हथियार का लाइसेंस सिर्फ आपके राज्य भर के लिए ही मिलता है. इसके मिलने का तरीका ये होता था कि पहले जिले के लिए मिलता था, फिर मंडल और फिर राज्य के लिए जारी होता था. लेकिन आप चाहें तो अब आर्म्स रूल 1962 के रूल 53 के तहत आप इसे पूरे देश के लिए भी बढ़वा सकते हैं. पूरे देश में आप अपना हथियार लेकर कहीं भी आ और जा सकते हैं. हालांकि, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कहा गया है कि वे किसी के लाइसेंस को पूरे देश के लिए एक्सटेंड करने से पहले गृह मंत्रालय को जरूरत अवगत कराए. ज्यादा जानकारी के लिए गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र भी पढ़े जा सकते हैं.

आम जनता के लिए जारी होता है अस्थाई लाइसेंस
ऑर्म्स लाइसेंस लेने वाले कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिन्हें साल में सिर्फ एक-दो बार प्रदेश और देश के विभिन्न जिलों में जाना होता है. ऐसे लोगों के लिए अस्थाई नेशनल लाइसेंस जारी किया जाता है, ये लाइसेंस दो से तीन महीने के लिए होता है।

कारतूस के लिए भी बनाए गए सख्त नियम
लाइसेंस पर जारी होने वाले कारतूस बड़ी संख्या में माफिया और बदमाशों तक पहुंच रहे हैं. ये चर्चा तेज होने के बाद सरकार ने कारतूस की बिक्री के लिए भी नए नियम जारी किए हैं. नई गाइड लाइन के अनुसार अब एक लाइसेंस धारक को एक बार में 10 और सालभर में अधिकत्तम 25 कारतूस मिलेंगे और 25 से ज्यादा कारतूस खरीदने के लिए शासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. नए नियम के तहत अब प्रतिबंधित और स्वीकार्य हथियारों की श्रेणियों के लिए अलग-अलग लाइसेंस बुक बनायीं जाएगी. ही नए कारतूस लेने से पहले आत्मरक्षा में चलाए गए कारतूस के बारे में एफआईआर की कॉपी लगानी होगी।

जय परशुराम 🚩 सादर ब्रह्मेश्वरवाद ⚔️💐

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