*राजनीति न हुई तो राज्यपाल को उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करना चाहिए : संजय राउत*
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के एमएलसी बनने की राह में कानूनी प्रावधानों, व्यावहारिक तकाजों और पक्ष-विपक्ष के तर्कों का तमाशा जारी है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल वैधानिक रूप से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को राज्यपाल द्वारा एमएलसी मनोनीत करने के योग्य नहीं मानते, वहीं शिवसेना के लोकसभा में नेता विनायक राउत, पाटिल के तर्क को खारिज करते हुए कहते हैं कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने वन्यजीवों पर शानदार फोटोग्राफी की है।
वह एक अच्छे फोटोग्राफर रहे हैं। शिवसेना के मुख पत्र सामना के प्रधान संपादक रहे हैं। मुख्यमंत्री की कई पुस्तकें हैं और तमाम पत्र पत्रिकाओं में प्रोफेशनल फोटोग्राफर के रूप में उनके फोटो प्रकाशित हुए हैं। उनकी डिग्री, व्यक्तित्व और जीवन का पिछला हिस्सा राज्यपाल द्वारा एमएलसी के मनोनयन के लिए पर्याप्त है।
उधर, कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास विकल्प है। उद्धव कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के सहयोग से बनी सरकार के मुख्यमंत्री हैं और रहेंगे।
दलगत राजनीति नहीं होनी चाहिए
विनायक राउत ने यह भी कहा कि राज्यपाल को उद्धव ठाकरे के मनोनयन को लेकर कोई राजनीति नहीं करनी चाहिए। राउत ने कहा कि पूरे देश में कोविड-19 महामारी का प्रकोप चल रहा है। मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई जिले इसकी चपेट में हैं।
पूरा महाराष्ट्र उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहता है। उद्धव ठाकरे की महाराष्ट्र में अच्छी फॉलोइंग है। इसलिए यदि ऐसे समय में राज्यपाल या भाजपा के नेताओं ने कोई राजनीति की तो उन्हें राज्य की जनता माफ नहीं करेगी।
मंत्रिमंडल ने ऐसे ही नहीं की है उद्धव की सिफारिश
विनायक राउत का कहना है कि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने के लिए ऐसे ही सिफारिश नहीं की है। राउत का कहना है कि इससे पहले तमाम लोग राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए गए हैं। तमाम लोगों की प्रोफाइल देख लीजिए। कहीं भी उद्धव ठाकरे की प्रोफाइल हल्की नहीं मिलेगी।
उनका प्रोफेशनल कॅरियर शानदार रहा है। राउत ने कहा कि मुझे विश्वास है कि महाराष्ट्र के राज्यपाल उनके एमएलसी मनोनयन की सिफारिश को अपनी मंजूरी दे देंगे। विशेष श्रेणी से एमएलसी का मनोनयन करने के लिए कितने समय का कार्यकाल बचा है, इसका कोई अर्थ नहीं है।
चंद्रकांत पाटिल और भाजपा क्या उठा रही है सवाल
भाजपा के नेताओं का कहना है कि नियम के मुताबिक उद्धव ठाकरे के पास तीन रास्ते थे। वह या तो विधानसभा का चुनाव लड़कर सदन के सदस्य बनते या फिर विधान परिषद में चुनकर आते। तीसरा रास्ता यह है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वी राज चौव्हाण की तरह पद से इस्तीफा देकर और दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते।
चंद्रकांत पाटिल का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों और वैधानिक परंपरा के अनुसार भी उद्धव ठाकरे (राजनीतिक व्यक्तित्व) का एमएलसी के तौर पर विशेष श्रेणी में मनोनयन नहीं किया जा सकता।
हमारे पास विकल्प हैं.. राज्यपाल के निर्णय का इंतजार है
उद्धव ठाकरे के मनोनयन को लेकर कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास विकल्प है। वह कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के सहयोग से बनी सरकार के मुख्यमंत्री हैं और रहेंगे। राज्यपाल का निर्णय आ जाने दीजिए। हमें भरोसा है कि उद्धव राज्यपाल द्वारा एमएलसी मनोनीत हो जाएंगे। न होने पर अन्य विकल्प का प्रयोग किया जाएगा।
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