*"कोरोना वायरस और मुर्दाखोर विपक्ष"*

*"कोरोना वायरस ओर मुर्दाखोर विपक्ष"*

मैंने तय किया था कि कोरोना पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नही करुँगा और आज तक कि भी नहीं लेकिन पिछले कुछ दिनों से विपक्षी दलों द्वारा जो हरकते की जा रही है उससे मन व्यथित हो उठा। 

सम्भव है यह विश्लेषण थोड़ा बड़ा हो जाए लेकिन यदि इन मुर्दाखोरों के षड्यंत्र को समझना चाहते है तो लेख को पूरा पढ़िए।

◆पहले एक ख़बरण्डी टीवी कुछ मजदूरों के पलायन की रिपोर्टिंग करती है, फिर धीरे-धीरे इन चैनलों और पत्रकारों द्वारा एक माहौल बनाया जाता है कि लोग यदि निकल पड़े तो सरकार उन्हें उनके गांव तलक पहुँचा ही देगी।

◆फिर वामपंथी विद्वानों द्वारा सोशल मीडिया पर इस अंदेशे के वीडियो जारी कर अफवाह फैलाई जाती है कि ये लॉकडाउन 2 से 3 महीने तक रहेगा।

◆इसके बाद प्रवासी हिंदू मजदूरों की बस्तियों की बिजली और पानी की सप्लाई रोक दी गई जबकि रोहिंग्या मुसलमानों को सकुशल रखा गया है।

◆फिर दिल्ली सरकार के नुमाइंदे और आप पार्टी के कार्यकर्ता अफवाह फैलाते है कि यदि लोग आनन्द विहार तक पहुँच गए तो उन्हें सरकारी बसों से छोड़ दिया जाएगा।

◆और अचानक से लॉकडाउन की धज्जियाँ उड़ाता, सोशल डिस्टनसिंग का बलात्कार करता हुजूम सड़कों पर दिखाई देता है।

◆DTC की बसों से बिना हरियाणा और उत्तरप्रदेश सरकार को बताए बार्डर पर हजारों लोगों को छोड़ दिया गया।

इस षड्यंत्र को समझने के लिए आपको इसके पीछे की कहानी समझनी होगी। सबसे पहले तो आप ये समझ लीजिए कि आज मोदीजी के खिलाफ पूरा विपक्ष एक जुट है। उन सभी का एक ही कामन मिनिमम प्रोग्राम है।

01】हिंदुत्व (जिसे वह साम्प्रदायिक शक्तियों के नाम से पुकारता है) को हराना। फिर चाहे शिवसेना ओर ओवेसी की पार्टी जैसी कट्टरपंथी पार्टी के साथ गठबंधन करना पड़े।

02】बीजेपी को रोकना, इसके लिए बसपा ओर सपा को साथ आना पड़े, राजस्थान और एमपी में बिना शर्त कांग्रेस को समर्थन देना पड़े, या दिल्ली के चुनावों में कांग्रेस को अपने उम्मीदवारों की जमानत जप्त करवाना पड़े।

03】मोदी को कोसना, इसके लिए चीन और पाकिस्तान की मदद ही लेना पड़े।

अब आप समझिए कि उपरोक्त एजेंडे को लागू करने के लिए इन नरभक्षियों ने क्या षडयंत्र किया।
दुनियाभर में कोरोना के फैलने की रफ्तार, जनसंख्या घनत्व, मेडिकल सुविधाएं, जनजागरूकता को देखते हुए शुरुआत में आंकलन किया गया कि 8वें सप्ताह में कोरोना भारत मे 3री या 4थी स्टेज में पहुँच जाएगा। इस स्थिति में 2 से 5 लाख लोग संक्रमित हो जायेंगे। भारत की अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी और देश बर्बादी की कगार पर आ जाएगा।

इनका यह आंकलन पूरी तरह वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित था, इटली, जर्मनी, फ्रांस और अमेरिका जैसे विकसित देशों की हालत खराब है तो भारत की उससे भी कही ज्यादा खराब होने का अनुमान सही भी था। बस ये लोग नरेंद्र मोदी की नियोजन और नेतृत्व क्षमताओं का सही आंकलन नही कर पाए। देश में 8वा सप्ताह भी आ गया और कोरोना स्टेज 2 में ही वेंटिलेटर पर दम तोड़ने को हुआ।

इनके आलू वैज्ञानिक शुरू में ही बड़ी भविष्यवाणी कर चुके थे, लेकिन ऐसा कुछ हो नही रहा था। उल्टा दुनियाभर के देश और WHO भारत की तारीफ कर रहा था, दुनिया भारत की ओर आशाभरी नजरो के देख रही थी। 

भारत ने इस समय सार्क ओर G20 का आव्हान कर विश्व नेतृत्व की अपनी क्षमताएं दिखाई। इन गिद्धों को यह सब हजम नही हो पा रहा था, ये नरभक्षी चाहते थे कि भारत लाशों के ढेरों से पट जाए, यहां अराजकता फैल जाए, देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाए। फिर ये मुर्दाखोर लाशों के ढेर पर बैठ कर अपनी गन्दी राजनीति करते, अपने उपरोक्त तीनो एजेंडा को सफल बनाते।

भारत लॉकडाउन के दौरान कोरोना से बस जितने ही वाला था कि नरपिशाच केजरी ने अपनी चाले चलना शुरू कर दिया। पहले इन्होंने धरने पर बैठे लोगों को भड़काया की सरकार उन्हें हटाने के लिए अफवाह फैला रही है, कोई डरने वाली बात नही है। कुछ पढे लिखे मुस्लिमों ने भी इस वायरस को फैलाने की अपील की, भारत के तीसरी ओर चौथी स्टेज में जाने की दुआएं मांगी गई। लेकिन जब पुलिस और पैरामिलिट्री ने सख्ती का इस्तेमाल किया तो कोरोना जिहादी थोड़े शांत हुए।

इसके बाद नया खेल शुरू हुआ, इन्हें मालूम था कि जब हजारों लोग एक साथ पलायन करेगे तो इन सभी मे कोरोना का संक्रमण फैल जाएगा। जब ये अपने गंतव्य पर पहुचेंगे तो अपने समुदायों में लाखों लोगो तक ये संक्रमण को फैला देंगे और इस तरह से भारत ये लड़ाई हार जाएगा। बस फिर आगे हमेशा नरेंद्र मोदी को कोसने और चुनाव प्रचारों के लिए एक बड़ा हथियार इन्हें मिल जाएगा। कुछ ही समय बाद बिहार में चुनाव है, पलायन करने वालो में सबसे बड़ी संख्या बिहारियों की है, तो बिहार में जो मौत का तांडव मचेगा वो इन्हें सत्ता की चाबी सौप जाएगा।

हालांकि मोदीजी और योगीजी ने मिल कर इनके षड्यंत्रों को काफी हद तक असफल कर दिया है।

जहां पहले एक ही लैब में टेस्टिंग हो रही थी अब 111 सरकारी और कई निजी लैबो में जांच हो रही है। सरकार ने मुस्तैदी से क्वारन्टाइन सेंटर बनाए है। आइसोलशन यूनिट्स तैयार किए है। दवाओं का इंतजाम किया है। बड़ी संख्या में वेंटिलेटर बन रहे है। लोगो को यूपी में ही रोकने और उनके समुचित जीवन यापन की व्यवस्था करने का काम किया है।

दुर्भाग्य से जब वामपंथी मीडिया पलायन करते कुछ 500-700 लोगों को देख रहा था तब हमारे हिंदूवादी विचार के लोग भी उनके बहकावे में फंस गए और अपनी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने लगे। अभी भी इन वामपंथियों के षड्यंत्र समाप्त नही हुए है दोस्तों, चुनौतियां बहुत बड़ी है साथियों, हमें पूरे ध्येय से, विवेक बुद्धि से अपने नायक पर विश्वास रखते हुए इससे निपटना होगा। खुद जागरूक रहे और अपने आसपास लोगों में जागरूकता फैलाए। हिंदुत्व की चादर ओढ़े किसी वामपंथी भेड़िये की चाल में फंस कर अपने ही विचार को क्षति न पहुचाए।

"ठाकुर की कलम से"

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