क्या #कोविड_19 वायरस से दुनियाँ में तबाही मचाने का ये खेल #दारूल_इस्लाम के हिमायती इस्लामिक कट्टरपंथियों और और आर्थिक महाशक्ति का सपना पाले चीन का कोई सोचा समझा घिनौना षडयंत्र है ?
आप लोगों मे सबसे बड़ी कमी यह है कि आप लम्बी पोस्ट पढते नही।
पूरे प्रकरण को समझने समझाने के लिए विस्तार देना कभी कभी आवश्यक हो जाता है।
खैर आप यह देखिए थोड़ा सब्र रखकर पढ़िए।
क्या #कोविड_19 वायरस से दुनियाँ में तबाही मचाने का ये खेल #दारूल_इस्लाम के हिमायती इस्लामिक कट्टरपंथियों और और आर्थिक महाशक्ति का सपना पाले चीन का कोई सोचा समझा घिनौना षडयंत्र है ?
आंकड़ों पर निगाह डाले तो कुछ ऐसा ही परिदृश्य उभरकर सामने आ रहा है।
आइये जाने भारत और भारत के बहुसंख्यकों के ऊपर हुए उस अटैक के बारे में जिसके बारे में शायद आपको आइडिया ही नहीं है ....
कोविड-19 किसने बनाया, कहाँ बनाया और कब बनाया यह बहस और शोध का विषय हो सकता है।
पर इस वायरस को विश्व में चिह्नित और टारगेटिड लक्ष्यों पर फैलाना....... 9/11 का अमेरिका में वर्ल्ड_ट्रेड_सेंटर पर हमला और 26/11 के मुंबई हमले की याद दिला रहा है।
"टारगेटिड और चिह्नित लक्ष्य".....
जी हाँ वैसे ही लक्ष्य जैसे युद्ध में दुश्मन के किसी लक्ष्य को टारगेट कर के मिसाइल दागी जाती है और जैसे किसी आतंकवादी हमले के लिये किसी जगह को चुन कर फिदायिन भेजे जाते हैं।
फ्रांस, इटली, स्पेन, ब्रिटेन, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्विट्ज़रलैंड, स्वीडन और आस्ट्रिया जैसे छोटे छोटे यूरोपियन देश भी कोरोना के प्रकोप से बर्बादी के कगार पे खड़े हैं। अमेरिका, कनाडा और ब्राजील जैसे देश तो घुटने टेक चुके हैं।
सिर्फ अमेरिका में संक्रमित लोगो की संख्या 7 लाख के पार जा चुकी है। अमेरिका और युरोप में कुल मिलाकर एक लाख तीस हजार से ज्यादा की मौत हो चुकी है।
और पूरे विश्व में कुल मौते कितनी हुई हैं...डेढ़ लाख। मतलब कुल मौतो का लगभग 85% सिर्फ युरोप और अमेरिका के उन देशो में जहाँ 80% से भी ज्यादा आबादी इसाईयो की है।
वे इसाई जो इस्लामिक कट्टरपंथियों के सदियो से निशाने पे रहे हैं। लादेन से लेकर बगदादी तक सब के सब इसाईयो को खत्म कर देने का सपना पालते रहे हैं।
और दूसरी ओर पाकिस्तान और अरब पोषित इस्लामिक आतंकवादी भारत जैसे विशाल देश में गजवा ए हिंद का सपना पाले बैठे हैं। भारत की सीमा के अंदर कि सीमा के बाहर...हर तरह के आतंकवाद से भारत का और भारत के हिंदुओ का जीना मुहाल कर रखा है इन इस्लामिक आतंकवादियों ने।
तो इस्लामिक कट्टरपंथियों का टारगेट पूरे विश्व को दारूल इस्लाम बनाना और विस्तारवादी चीन का टारगेट पूरे विश्व को अपना आर्थिक गुलाम बनाना।
और दोनो के इस टारगेट को पूरा करने के लिए पैदा किया गया कोविड-19 माने कोरोना !!
चीन में कोरोना के सफल टेस्टिंग के बाद कोरोना फिदायिन कट्टरपंथियों को तौयार किया गया। पहला लक्ष्य युरोप फिर अमेरिका और अंत में भारत को टारगेट बनाया गया।
चीन ने #WHO के साथ मिलकर झूठ फैलाया कि इससे घबराने की जरुरत नहीं। इससे मृत्युदर सिर्फ 2 प्रतिशत है और यह मानव से मानव में नहीं फैलता। ताकि विश्व मुगालते में रहे और अधिक से अधिक हानि हो।
और फिर पूरे युरोप और अमेरिका में अपने गले मे कोरोना लिए कोरोना फिदायिनो को उतार दिया गया।
भारत में भी कोरोना फैलाने के लिए विदेशी कट्टरपंथियों को कोरोना फिदायिन की कमान सौंपी गयी। हजारो कट्टरपंथियों की फौज तैयार की गयी और मौलाना_साद जैसो के मार्फत भारत में इनको प्लांट करने का टारगेट सेट कर दिया गया। और इसके लिये 13 मार्च को जानबूझकर जमात का जलसा बुलाया गया। ताकि जलसे के बहाने ज्यादा से ज्यादा विदेशी कट्टरपंथियों को एक जगह इकट्ठा किया जा सके।
सोचिए कि 13 मार्च ही क्यो ?
13 फरवरी क्यो नहीं या फिर 13 अप्रैल क्यो नहीं ? इसके पीछे इन कट्टरपंथियों की शातिर चाल जान पड़ती है। कोरोना के लक्षण 15 से 20 दिन मे दिखने लगते हैं। और 25 मार्च से, मतलब के 12 दिन बाद भारत में नवरात्रे आरंभ हो रहे थे। बस जमात के नाम पे इकट्ठे हुए कट्टरपंथी 25 मार्च से नवरात्रों में मन्दिर मन्दिर और शहर शहर जाकर सिर्फ एक हफ्ते में पूरे देश में ये कोरोना फैला देते। और तब एक महीने के अंदर, यहां भी करोड़ो करोड़ो हिंदुओ को कोरोना का शिकार होने से कोई नहीं रोक सकता था।
मतलब के एक तीर से दो निशाने।
इस्लामिक कट्टरपंथियों का गजवा ए हिंद का सपना भी पूरा और चीन का भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने से रोकने का टारगेट भी पूर्ण !!
किन्तु भारत और भारत राष्ट्र का प्रत्येक राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री श्री नरेंद मोदी जी का आभारी और ऋणी रहेगा जिन्होने चीन और कट्टरपंथियों की इस साजिश को समय रहते ना केवल समझा बल्कि नवरात्रें आरंभ होने से एक दिन पहले ही सम्पूर्ण भारत में #लॉकडाउन लगाकर उनकी इस साजिश को नाकाम करने में भी बहुत हद तक सफलता पायी।
जिससे ये कट्टरपंथी मंदिरो में जाने के बाजाए मस्जिदों में छुपने को मजबूर हो गए।
और शायद यही कारण था कि #सोनिया_गांधी से लेकर कई विपक्षी और लिब्रांडू नेता मोदी जी द्वारा लगाए गए लॉकडाउन को #नोटबंदी और #GST की तरह जल्दबाजी में लिया गया मूर्खतापूर्ण फैसला बता रहे थे।
मैं नीचे कुछ आंकड़े दे रहा हूँ।
इस्लामिक और मुस्लिम बहुल देशो के इन आंकड़ो को देखिए......
ये कल शाम तक के आंकड़े हैं।
सभी मुस्लिम देशों में कुल मिलाकर भी 10 हजार मौते भी नहीं हुई। उनमे से भी आधी सिर्फ इरान में हुई हैं।
27 करोड़ वाले इंडोनेशिया में बामुश्किल 500 जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पांच वक़्त के #नमाजियों के मुल्को में तो गिनती की सौ पचास मौते।
इसके उलट युरोप के छोटे छोटे इसाई बहुल देशो में 10-10 हजार लोग मर गए और मरते ही जा रहे हैं।
और आश्चर्य कि इरान में 78000 संक्रमित में से 52000 ठीक भी हो गए, जबकि अमेरिका में 7 लाख संक्रमित में से सिर्फ 58000 ठीक हुए,वो भी भारत द्वारा भेजी दवाइयो से।
सलाम है इरान की मेडिकल साईंस को।
जरा सोचिए मित्रों।
क्या कारण है कि इस्लामिक मुल्कों में इतनी कम मौते और इतना कम संक्रमण ?
जबकि इसाई देश तबाह हुए जाते हैं ?
क्या इस्लामिक मुल्कों का मेडिकल साइंस रॉकेट हो चुका है या फिर जान बूझकर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इन मुल्को को टारगेट ही नहीं किया ?
जवाब खुद से पूछिये!
"ठाकुर की कलम से"
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