एक राजा था| वह राजा एक बार बड़ी लम्बी यात्रा पर
जा रहा था और राजा को विदाई देने कई लोग आए| जब
राजा के निकने का समय हुआ, तभी राजा का एक
करीबी दोस्त उसके पास आया और कहने लगा – “में तुम्हे
सावधान करना चाहता हूँ एक छोटे व्यक्ति से, जो तुम्हे
यात्रा के दौरान मिलेगा और जो तुम्हे लड़ने के लिए
चुनौती देगा | उस व्यक्ति को तुम्हे समाप्त करके ही आगे
बढ़ना होगा”
राजा यात्रा पर निकल गया और दूसरे ही दिन उसके मित्र
द्वारा कही गयी बात सत्य साबित हुई और उसे एक
बौना व्यक्ति मिला जिसकी ऊंचाई 2 फीट थी| वह एक
कमजोर व्यक्ति मालूम होता था| उस व्यक्ति ने
राजा को लड़ने के लिए चुनौती दी| राजा ने चुनौती स्वीकार
कर उससे लड़ाई की और राजा की आसानी से जीत
हो गयी| लेकिन राजा ने उसकी मृत्यु नहीं की और उसे छोड़
दिया|
एक सप्ताह बाद राजा को वही व्यक्ति वापस मिला लेकिन
अबकी बार उसकी लम्बाई 3 फीट हो गयी थी और वह
पहले से थोडा ताकतवर भी दिखाई दे रहा था| उसने
राजा को फिर से चुनौती दी और राजा ने उसे फिर से
आसानी से हरा दिया, लेकिन राजा ने फिर से उसे छोड़
दिया|
ऐसा 3-4 बार हुआ और हर बार राजा ने उसे आसानी से
हराकर जीवनदान दे दिया लेकिन हर बार वह व्यक्ति पहले
से बड़ा और मजबूत होता गया|
एक समय बाद वह बौना व्यक्ति राजा से भी लम्बा और
ताकतवर हो गया और उसने फिर से राजा को लड़ने
की चुनौती दी| राजा उसे इस अवस्था में देखकर अचंभित
हुआ और राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ| इस बार
राजा ने बड़ी गंभीरता से युद्ध किया और उसे हराकर
मृत्युदंड दे दिया| लेकिन इस बार राजा को बहुत
बड़ी कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि राजा बहुत गंभीर रूप से
घायल हो चुका था|
उस समय राजा को यह बात समझ में आयी कि “हम
समस्याओं (Problems) को जितना छोटा समझकर
अनदेखा करेंगे, वह समय के साथ आगे बढ़कर
उतनी ही बड़ी और जटिल बन जाएगी जो हमें एक
ऐसी परिस्थिति में डाल देगी जिससे बाहर निकलना बहुत
कठिन हो जाएगी|”
दोस्तों हमारे जीवन (Life) में भी कुछ ऐसा ही होता है|
हम छोटी छोटी समस्याओं (Problems)
को अनदेखा (Ignore) कर देते है लेकिन वही समस्याएँ
(Problems) बाद में हमारे लिए बड़ी मुसीबत बन
जाती है| इसलिए जितना हो सके समस्याओं को पनपने न दें
और उसकी प्रारंभिक अवस्था में ही उसे समाप्त कर
देना बेहतर है|
दोस्तों चाणक्य (Acharya Chanakya) ने भी एक बात
कही है जो लगती सरल है पर बहुत गहरी है-
“जैसे ही भय आपके करीब आये, उस पर आक्रमण कर उसे
नष्ट कर दीजिये” – Chanakya चाणक्य
क्योंकि अगर हम अपने जीवन के खरपतवारों को उगने से
पहले ही नष्ट कर देंगे तो यह हमारे जीवन के
खुशियों रुपी पौधे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएँगे
अन्यथा यही खरपतवार (Problems) बड़े होकर
हमारी खुशियों को ही नष्ट कर देंगे|
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