दिल्ली दंगों के पीछे प्रायोजित प्रयोग का आगाज था अंजाम अभी बाकी है

*यदि आप यह समझते है कि दिल्ली में दो समुदायों के बीच दंगे हुए थे...*

तो, मैं आपको बेहिचक मूर्ख कहूंगा...

क्योंकि, दिल्ली में दंगे नहीं हुए थे...

बल्कि, दिल्ली को तीन दिन प्रयोगशाला के लिए बनाया गया था।

जिसमें, यह जांचा गया था कि हम जिस रणनीति पर चल रहे है वह फूल प्रूफ है या नही ?

जिसमें, यह जांचा गया था कि... हिन्दू कितना सावधान, सतर्क है और उसके प्रतिकार का स्तर क्या है ?

जिसमें, यह जांचा गया कि... सरकार का क्या क्या एक्शन हो सकता है ?

जिसमें, यह जांचा गया है कि... इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या हो सकती है ?

जिसमें, यह जांचा गया है कि.... देश में मोदी के प्रति नजरिये में कोई बदलाव आया या नहीं एवं उसकी 56 इंची छवि को ध्वस्त किया जा सकता है या नहीं...?

जी हां...

और भी बहुत कुछ प्रयोग सफलता पूर्व किए गए जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि अभी फाइनल एक्शन ले या थोड़ा और इंतजार करें ???

आदरणीय जितेन्द्रानंद सरस्वती जी जो अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री है उन्होंने इस पर बहुत ही सुंदर विवेचना की है...!

असल में.... दिल्ली दंगों की जड़ें बहुत गहरी हैं...!

अगर हम सभी को यह लगता है कि प्रधान मंत्री, गृह मंत्री क्या कर रहे हैं ...तो, आइये कुछ सूत्र हम बताते हैं कि देश को अस्थिर करने के लिये कांग्रेस किस स्तर पर षड़यन्त्र कर सकती हैं।

और, दिल्ली दंगों की जाँच NIA से करवाना आवश्यक क्यों है ????

क्या आपको पता है कि कांग्रेस ने टर्की में पिछले ११नवम्बर २०१९ को कार्यालय खोला ?

ये आपको भी ज्ञात होगा कि..... पूरे विश्व में भारत के विरुद्ध तीन मुस्लिम नेताओं के सुर एक जैसे हैं।

पाकिस्तानी इमरान खान, मलेशिया के महातिर मोहम्मद एवं टर्की का एर्दोगन।

जिसमें महातिर का त्यागपत्र डोनाल्ड ट्रम्प के भारत में कदम रखते ही हो गया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि... भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार की बात कह कर मुस्लिम देशों से चंदा उगाहने की तैयारी इटैलियन माता की है... जो धन टर्की में सुरक्षित रखा जायेगा।

अमेरिकी डेमोक्रेटिक उद्योगपति जार्ज सोरेश... जो पूरे विश्व में वाम पंथियों को फ़ंडिंग के लिये कुख्यात है उसने अक्टूबर २०१९ में अपने भाषण में कहा कि दुनिया में तीन राष्ट्रवादी शासक हैं जो किसी तानाशाह से कम नही हैं... 

उनके अनुसार.... भारत में नरेन्द्र मोदी, अमेरिका में ट्रम्प,चीन में जीनपिंग को मिटाना होगा।

इसके लिये उसने तीन बिलियन डालर का चंदा दिया जिसमें से एक बिलियन डालर भारत में दंगे फैलाने एवं मीडिया घरानों में नेरेटिव गढ़ने में खर्च करना होगा।

हम हिंदुओं को आतंकवादी बताना भी उसी षड़यन्त्र का हिस्सा है।

इटालियन माता द्वारा सड़कों पर उतरने की अपील भी एवं कोठे के अन्दर बैठे मियाँ लियार्ड भी।

दिल्ली बड़े कोठा के मियाँ लियाड मुरलीधरन की पत्नी एस.रामनाथन अर्बन नक्सली गौतम नवलखा के NGO में काम करती है।

नवलखा के ट्रैंज़िट रिमांड को रोकने से लेकर नाज़फ़ाउंडेशन के समलैंगिक अपराघ एवम् मनीष तिवारी के सहायक और इटालियन गांधी के पर्चा दाख़िला में अधिवक्ता की भूमिका से आप समझिए कि साज़िश कितनी गहरी है।

सरकार के प्रवक्ता ने इस बात का खुलासा किया कि कैसे-कैसे कपिल सिब्बल आदि के एकाऊंट में पैसे पहुँचे।

यह किसी से छुपा हुआ नहीं है कि पूर्वोत्तर भारत में पैसा भेज कर कैसे प्रदर्शन कराये गये।

असल में यह आन्दोलन नहीं है  बल्कि यह भारत और भारतीयता को नष्ट करने का षड़यन्त्र है।

जहाँ तक इसमें प्रयुक्त धन का प्रश्न है तो यह पूरी तरह प्रायोजित लग रहा है।

चाहे हर्ष मंदर हो या कोलिन गुंजाविल्स... ये सभी मानवाधिकार के आड़ में देश-द्रोही को संरक्षण देते नजर आते हैं।

आप जानकर आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि.... अंकित शर्मा जनवरी में जाफराबाद में NIA की रेड लीड करके ISIS का module खत्म करतें  हैं, और फरवरी के दंगे में 400 चाकू मारकर उनकी हत्या कर दी जाती है।

इसीलिए.... दिल्ली दंगा पूरी तरह प्रायोजित नजर आ रही है।

अभी गिरफ़्तारियाँ हो रही हैं और पूछ-ताछ में राज खुलेंगे ही।

शाहीन बाग़ के बहाने मौलानाओं का कथन कि देश को अस्थिर करने से निवेशक नही आयेंगे तो भारत बर्बाद हो जायेगा इसीलिए तिरंगे और संविधान के आड़ में धरना चालू रखो.... बहुत कुछ समझा जाता है।

न मोदी मूर्ख हैं, न अमित शाह और न ही डोवाल।

एक बेहद थकान वाला रास्ता, धरना पर धन खर्च उनका और दंगाई और उनके आका की पहचान कर ली जायेगी।

लेकिन... इटालियन माता की तिलमिलाहट, CWC की बैठक, राष्ट्रपति भवन पर उन सबका मार्च और पुनश्च टर्की में उनका ऑफिस... देश के विरुद्ध षड़यंत्रों की कहानी बयान करने के लिए काफी है।

जय महाकाल...!

"ठाकुर की कलम से"

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