महाराणा प्रताप जब मुगलों के विरुद्ध संघर्षरत थे तब वो अपने अकेले के लिए संघर्षरत नहीं थे बल्कि सम्पूर्ण सनातन के लिए संघर्षरत थे ....
महाराणा प्रताप अकेले भी संघर्षरत नहीं थे बल्कि मेवाड़ की हर जाति वर्ण उनके साथ अपने अपने सामर्थ्यनुसार संघर्षरत था .... जो युद्ध लड़ सकते थे वो युद्ध लड़े और भामाशाहों ने आर्थिक सहयोग दिया तो किसानों ने अन्न से सहयोग किया ....
गाड़िया लुहारों ने लोहे के अस्त्र शस्त्र बना के महाराणा को सहयोग दिया ....
इतना ही नहीं ....
गाड़िया लुहारों ने तो प्रतिज्ञा तक ली कि जब तक महाराणा पुनः चित्तौड़ के सिंहासन पर आरूढ़ नहीं होंगे तब तक वो महाराणा के साथ वन-वन रहेंगे .... घरों में नहीं रहेंगे ....
गाड़िया लुहार विगत 500 वर्षों से महाराणा को दिए अपने वचन का मान रख रहे हैं और आज तक खानाबदोश घुमन्तु यायावर जीवन जी रहे हैं ....
यह राजस्थान का खानाबदोश आदिवासी समुदाय है ....
राजस्थान में ये गांवों ढाणियों शहरों कस्बों के बाहर डेरों/समूहों में रहते हैं .... ऊँट-छकड़ो और बैल-गाड़ियों के नीचे रहते हैं .... सर्दी गर्मी बरसात आंधी तूफान लूओं में रहते हैं .... आज इस गांव कल उस गांव रहते हैं ....
ये लोहे के छोटे उपकरण/औजार बना के अपना जीवनयापन करते हैं ....
आज़ादी के बाद से राजस्थान की विभिन्न सरकारें इनको पक्के मकान बनवा के देने को तैयार है लेकिन ये नहीं लेते मकान ना एक जगह रहते .... डेरों समूहों में छकड़ो (ऊँट-गाड़ों) के नीचे घुमन्तु रहते हैं .... अपने पूर्वजों द्वारा महाराणा को दी प्रतिज्ञा का पालन करते हैं ....
राजस्थान से निकल के अब गाड़िया लुहार दिल्ली उत्तरप्रदेश हरियाणा पँजाब गुजरात मध्यप्रदेश तक रहने लगे हैं और लोहे के उपकरण बना के जीवनयापन करने लगे हैं ....
इन्होंने आजतक ना धर्म परिवर्तन किया है ना इस समुदाय पे चोरी लूट हत्या अपराध के मुकदमे दर्ज है (अपवाद छोड़कर) और ना ये सरकारी सुविधाओं योजनाओ का लाभ ले पाते हैं ....
मेरे शहर (लाडनूँ/नागौर) में एवं राजस्थान में अनेक जगह महाराणा प्रताप जन्मजयंती समारोह में महाराणा के प्रतीक के तौर पे प्रतिवर्ष इनका तिलक एवं सम्मान होता है .... महाराणा के प्रतीक के तौर पे इनको घोड़े पे बैठा के जुलूस निकाला जाता है ....
आउटर दिल्ली में भी छकड़ो के नीचे बहुत गाड़िया लुहार रह के अपना जीवनयापन करते हैं और आंतरिक दिल्ली में भी ....
दिल्ली के जेहादियों ने आज इन वचनबद्ध सनातन धर्म-रक्षकों का आशियाना उजाड़ दिया है .... इनकी सबसे बड़ी पूंजी/सम्पति इनके छकड़े (ऊँट-गाड़े) और बैल-गाड़ियां जला दी है .... 100 से 200 वर्ष पुराने छकड़े जला दिए हैं .... तन ढकने के 2 जोड़ी कपड़े जला दिए हैं .... भोजन बनाने खाने के महज़ 4-6 बर्तन भांडे जो इनपे है उनको तहसनहस कर दिया है ....
सरकारों से इनको ना मालूम कब सहायता मिलेगी और मिलेगी भी या नहीं ....
इनका बैंक एकाउंट भी नहीं होता है ....
ईश्वर इनकी ज़िंदगी को पुनः सुचारू रूप से बहाल करे ऐसी मेरी कामना अपने आराध्यों से हैं !!!! ...
यह गाड़िया लोहार देश भक्ति का भरपूर प्रमाण है यह प्रमाण है महाराणा प्रताप के स्वामी भक्ति का , यह प्रमाण है चित्तौड़ की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर देने वाली कौम के रूप में। नमन है इनको निशब्द हूं इनके देश प्रेम के लिए। यह गाड़िया लोहार एक भरपूर तमाचा है हमारे देश के गद्दारों के मुंह पर। इतनी स्वामी भक्त इतनी देशभक्त और इतनी कर्तव्य परायण इतनी त्यागी मानव जाति का उदाहरण मिलना इस धरती पर दुर्लभ है। इन गाड़ियां लोहारों के लिए मेरे पास शब्द नहीं है आज उनको सब कुछ देने पर भी यह लेने को तैयार नहीं है इनका जो स्वामी महाराणा प्रताप था वह कितना स्वाभिमानी होगा इसका अंदाजा लगाना इस बात से बहुत आसान है। शायद मेरे देश के लोग इस धरती को स्वतंत्र मानकर निश्चिंत बैठे हैं पर गाड़िया लोहार अभी निश्चिंत नहीं हुए हैं। वास्तव में हमारे देश की स्थिति देखकर इस बात का परिचय हमें मिल रहा है। जब तक हमारे देश में देशद्रोही लोग मौजूद है तब तक हम स्वतंत्र कैसे हो सकते हैं हमारी स्वतंत्रता अधूरी है। अपने वचनों को निभाने के लिए दृढ़ता पूर्वक उन पर अमल कर रहे हैं। एक संदेश और भी दे रहे हैं साथ में त्याग पूर्ण जीवन की मानव की जरूरतें तो दो रोटी दो कपड़ा और मकान है पर यह तो उससे भी कम मकान भी नहीं चाहते। एक यायावर जीवन बहते पानी के समान जी रहे हैं दुर्लभ है ऐसे लोग विश्व में।
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