दिल्ली की गद्दी को अपनी बपौती और देश की जनता को अपना गुलाम समझ कर गांधी नाम की पूंछ देश में दंगा और अराजकता फैला रही है

पिछले साल 14 दिसंबर को इटालियन बाई द्वारा आर पार की लड़ाई और सड़कों पर उतरने की बात कहने के पीछे का सच जानते हैं?

असल मे दिल्ली की गद्दी को अपनी बपौती और देश की जनता को अपना गुलाम समझ कर गांधी नाम की पूंछ चिपका कर घूमने वाला परिवार जब दोबारा देश की जनता द्वारा सत्ता से दुत्कार दिया गया तो गांधी परिवार की ही नही बल्कि सात दशकों से मलाई चाटने वाली छद्म सेकुलर राजनीति भी पराजित हो गई। ऊपर से मोदी सरकार द्वारा देशविरोधी हजारों NGO's की मुश्कें कस कर उनसे विदेशी पैसों का हिसाब मांगना...हज सब्सिडी, तीन तालाक और 370 का खात्मा करना.....राम मंदिर पर ऐतिहासिक निर्णय और मोदी द्वारा लाल किले से जनसंख्या नियंत्रण की बात करना....लगातार षडयंत्रों रचने के बाद भी मोदी और जनता के बीच बने विश्वास के संबंध को तोड़ने मे विफल होना.....NRP के बाद आसन्न NRC की आहट को सुनना.........अगर इन सब कारणों को एक सूत्र मे जोड़कर देखा जाए तो CAA को लेकर किये जा रहे उत्पात, उपद्रव और बलवे के साथ सत्ता को वंशानुगत बपौती मानने वाली आत्ममुग्ध किंतु बेबस मैडम फिरंगन की बेचैनी बहुत कायदे से समझी जा सकती है...!!!

उक्त सभी कारणों के साथ प्रधान सेवक मोदी जी की अभूतपूर्व लोकप्रियता और देश की जनता के बीच चल रही विकास और समान नागरिक संहिता की चर्चा ने सियासी-जेहादी और मिशनरी तत्वों मे सिहरन पैदा कर रखी है......सत्ता स्वार्थ की इस लड़ाई को वो अब मजहबी उन्माद, दुष्प्रचार और जातिगत विभाजन के हथियारों से लड़ रहें हैं....पुरानी शराब को नई बोतल मे परोस कर अब भारत विरोधी ताकतें राजनीति, मिशनरी, मजहबी और मीडिया के बल पर बेहद खतरनाक षडयंत्र को अंजाम तक पहुंचाना चाह रही है...इसी कारण मैडम फिरंगन ने मजहबी उत्पातियों, शहरी नक्सलियों, गुलामो, वामपंथियों को आर पार की लड़ाई के साथ सड़को पर उतरने का नारा कम संकेत ज्यादा दिया था...और वो उतरे भी.....फिर दिल्ली जली...साजिश तो देश को जलाने की थी, लेकिन सजग राष्ट्रवादी सरकार ने केवल 36 घंटे मे दिल्ली मे ही इन उन्मादियों पर नकेल कस कर बाकी देश को बचा लिया....!!!

अब जरा इसमे मीडिया की भूमिका देखिये....!!

जब शाहीन बाग से उठी लपटें सब ओर लपक रहीं थीं तब देश के साथ विदेश के मीडिया का एक वर्ग इसे हिंदू द्वारा किया जा रहा दंगा साबित करने मे जुटा था...IB ऑफिसर अंकित और मारे गये अन्य दूसरे हिंदुओं के नामो को छिपा कर केवल मुस्लिम नामो को चैनलो मे बताया और पेपरों मे छापा जा रहा था...जबकि स्थानीय नागरिकों द्वारा छतो पर हथियारो के जखीरो,उपद्रव,पत्थरबाजी,आगजनी करते दंगाईयों के शूट किये गये वीडियों तथा खींची गई तस्वीरों मे दिख रहे मजहबी जेहादियों पर मुंह मे दही जमा लिया गया......इसके विपरीत #न्यूयार्क_टाइम्स,#वाशिंगटन_पोस्ट, #दि_डिप्लोमेट जैसे समाचार पत्र के लेखों मे कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर को खलनायक और दंगो का जन्मदाता तक बना दिया गया था...लेकिन दंगो का सामान इकट्ठा करके हिंदुओ के कातिल AAP के नेता ताहिर हुसैन,15 करोड़ 100 पर भारी कहने वाले वारिस पठान,देश मे शरिया कानून लाने की बात कहने वाले AAP विधायक अमानतुल्लाह, भारत से असम को अलग करने की बात कहने वाले शरजील इमाम, AMU के फैजुल हसन जिसने कहा था कि मुस्लिमों का सब्र टूटा तो देश को बर्बाद करके रख देंगे वगैरह वगैरह जहरीले बोल बोलने वालो पर एक भी लाइन नही लिखी गई........जबकि दुनिया भर के समाचार पत्रों मे लेख लिखने वाले कथित पत्रकार लेखक भारत के ही थे....!!!!

अब जान लीजिये कि समाचार पत्रों मे भारत विरोधी लेख लिखने पर सामान्य से अधिक मिलता है...इस पत्रकारिता जगत मे व्याप्त लेखकीय व्यापारिक गठजोड़ और सौदेबाजी की पोल पिछले दिनो #जे_गोपीकृष्णन नाम के देशभक्त पत्रकार ने अपने ट्विट से खोली कि किस प्रकार लिबरल, सेकुलर, सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट अपने तयशुदा एजेंडे को बढ़ाने के लिये कलम की बोली लगाते हैं, बिकाऊ कलमकारों को खरीदते हैं उन्हें भी खरीदने का प्रयास किया गया.....
ट्रम्प की यात्रा के दौरान एक अमेरिकी समाचार पत्र ने उन्हें सम्प्रदाय विशेष के पक्ष में हजार शब्दों का लिखने के लिये 15 सौ डालर यानी एक लाख रूपये का ऑफर दिया था, जिससे भारत और ट्रम्प की यात्रा यानी दोनों बदनाम हो जाये। जे. गोपीकृष्णन ने पलटकर कर सटीक जवाब देते हुये जवाब दिया कि अब मुझे समझ मे आ रहा है कि तुम्हारे राष्ट्रपति ट्रम्प तुम जैसे मीडिया वालों को प्रेस्टीट्यूट क्यों कहते है....दरअसल अपने देश और विदेश का वामपंथी खेमा और स्वयं को लिबरल प्रोग्रेसिव कहने वाला मीडिया का एक वर्ग ट्रम्प, मोदी, नेतन्याहू आदि राष्ट्रवादी नेताओं को पचा नही पा रहा है और लगातार विषवमन करता रहता है...यह वर्ग भारत की सांस्कृतिक विरासत, हिंदू विचार, RSS, व हिंदू संगठनो का घोर विरोधी है....!!

यह बताने का उद्देश्य केवल इतना है कि लड़ाई लम्बी होने के साथ शातिर संगठित और मक्कार शत्रुओं के साथ है...हमारे आपके पास मोदी जैसे नेतृत्व के प्रति विश्वास रखते हुये आपस मे एकजुटता बनाये रखने का प्रभावी अस्त्र ही है...क्षणिक स्वार्थ मे इसे मत गवां बैठियेगा...क्योंकि तब तक साजिशे होती रहेगी...जब तक गुलाबो चिच्चा के रक्तबीज खुली हवा मे घूम रहे हैं....और नपुंसक हो चुके सूतिया टाइप के हिन्नू उनकी जय जयकार मे लगे रहेंगे...!!

#वन्देमातरम्
"ठाकुर की कलम से"

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