*"यदि आप यह समझते है कि दिल्ली में दंगे हुए थे तो मैं आपको बेहिचक मूर्ख कहूंगा, चौकिएगा नही"*

*"यदि आप यह समझते है कि दिल्ली में दंगे हुए थे तो मैं आपको बेहिचक मूर्ख कहूंगा, चौकिएगा नही"*

*हमारी ये विवेचना कितनी तार्किक है ये तो आपके प्रतिक्रिया से हीं पता चल पायेगा। लेकिन विपक्षियों का पिछले महीनों का हलचल और विश्व बिरादरी का छल, बल, धन को देखकर, हमारी ये पोस्ट अकाटय है।*

दिल्ली को तीन दिन #प्रयोगशाला बनाया गया था।
उसमें यह जांचा गया था कि हम जिस रणनीति पर चल रहे है वह फूल प्रूफ है या नही ?

उसमें यह जांचा गया था कि हिन्दू कितना सावधान, सतर्क है और उसके प्रतिकार का स्तर क्या है।

उससे यह जांचा गया कि सरकार का क्या क्या एक्शन हो सकता है ?

उसमें यह जांचा गया है कि इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या हो सकती है।

उसमें यह जांचा गया है कि देश मे मोदी के प्रति नजरिये में कोई बदलाव आया या नही, उसकी #56_इंची छवि को ध्वस्त किया जा सकता है या नही,,,

जी हां और भी बहुत कुछ प्रयोग सफलता पूर्व किए गए जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि अभी फाइनल एक्शन ले या थोड़ा और इंतजार करें ?

दिल्ली दंगों की जड़ें बहुत गहरी हैं। अगर हम सभी को यह लगता है कि प्रधान मंत्री, गृह मंत्री क्या कर रहे हैं तो आइये कुछ सूत्र हम बताते हैं कि देश को अस्थिर करने के लिये कांग्रेस किस स्तर पर षड़यन्त्र कर सकती हैं।

दिल्ली दंगों की जाँच NIA से हो यह क्यूँ आवश्यक है?

*क्या आपको पता है कि कांग्रेस ने टर्की में पिछले ११नवम्बर २०१९ को कार्यालय खोला? पूरे विश्व में भारत के विरुद्ध तीन मुस्लिम नेताओं के सुर एक है।पाकिस्तानी इमरान खान, मलेशिया के महातिर मोहम्मद, टर्की का एर्दोगन जिसमें महातिर का त्यागपत्र डोनाल्ड ट्रम्प के भारत में कदम रखते ही हो गया।भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार की बात कह कर मुस्लिम देशों से चंदा उगाहने की तैयारी इटैलियन माता की है। जो धन टर्की में सुरक्षित रखा जायेगा।*

*अमेरिकी डेमोक्रेटिक उद्योगपति जार्ज सोरेश जो पूरे विश्व में वाम पंथियों को फ़ंडिंग के लिये कुख्यात है उसने अक्टूबर २०१९ में अपने भाषण में कहा कि दुनिया में तीन राष्ट्रवादी शासक हैं जो किसी तानाशाह से कम नही हैं भारत में नरेन्द्र मोदी, अमेरिका में ट्रम्प,चीन में जीनपिंग इन्हें मिटाना होगा। इसके लिये तीन बिलियन डालर का चंदा दिया जिसमें से एक बिलियन डालर भारत में दंगे फैलाने एवं मीडिया घरानों में नेरेटिव गढ़ने में खर्च करना होगा। हिंदुओं को आतंकवादी बताना भी उसी षड़यन्त्र का हिस्सा है। सोनिया द्वारा सड़कों पर उतरने की अपील भी, कोर्ट के अन्दर बैठे जज भी। दिल्ली हाईकोर्ट का जज मुरलीधरन की पत्नी एस.रामनाथन अर्बन नक्सली गौतम नवलखा के NGO में काम करती है। नवलखा के ट्रैंज़िट रिमांड को रोकने से लेकर नाज़फ़ाउंडेशन के समलैंगिक अपराघ एवम् मनीष तिवारी के सहायक और सोनिया गांधी के पर्चा दाख़िला में अधिवक्ता की भूमिका से आप समझिए कि साज़िश कितनी गहरी है। सरकार के प्रवक्ता ने जब इस बात का खुलासा किया कि कैसे-कैसे कपिल सिब्बल आदि के एकाऊंट में पैसे पहुँचे। मेरे एक मित्र ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत में पैसा भेज कर कैसे प्रदर्शन कराये गये।यह आन्दोलन नही है भारत और भारतीयता को नष्ट करने का षड़यन्त्र है।*

जब दिल्ली जल रही है तो यह पूछना बनता है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवाबजादे ट्यूबलाइट साहब किस वार-रूम में बैठे हैं? यह राष्ट्रीय एकता और अखण्डता का प्रश्न है अतः NIA से जाँच आवश्यक है।

शाहीनबाग वाले मामले की सुनवाई वाली बेंच में खानदानी जज, कैथोलिक ईसाई के. एम. जोसेफ हैं। भारत का पूरा कैथोलिक समुदाय सोनिया के गुलाम की तरह काम करता है। जोसेफ की मानसिकता इस बात से जानी जा सकती है कि उत्तराखंड में जस्टिस राजीव शर्मा ने नदियों को जीवित व्यक्ति के रूप में माने जाने का निर्णय दिया था, जोसेफ ने इसे पलट दिया था।

जहाँ तक धन का प्रश्न है यह पूरी तरह प्रायोजित है। चाहे हर्ष मंदर हो कोलिन गुंजाविल्स ये सभी मानवाधिकार के आड़ में देश-द्रोही को संरक्षण देते हैं। अंकित शर्मा जनवरी में जाफराबाद में NIA की रेड लीड करके ISIS का module खत्म करतें  हैं, और फरवरी के दंगे में हत्या कर दी जाती है।

दिल्ली दंगा पूरी तरह प्रायोजित है। अभी गिरफ़्तारियाँ हो रही हैं। पूछ-ताछ में राज खुलेंगे। शाहीन बाग़ के बहाने मौलानाओं का कथन कि देश को अस्थिर करने से निवेशक नही आयेंगे तो भारत बर्बाद हो जायेगा इस लिये तिरंगे और संविधान के आड़ में धरना चालू रखो।

न मोदी मूर्ख हैं, न अमित शाह और न डोवाल एक बेहद थकान वाला रास्ता, धरना पर धन खर्च उनका और 
दंगाई और उनके आका की पहचान कर ली जायेगी। चलो! दिल्ली बच गयी और सोनिया गांधी की तिलमिलाहट CWC की बैठक, राष्ट्रपति भवन पर कांग्रेसी मार्च और पुनश्च टर्की आफिस देश के विरुद्ध षड़यंत्रों की कहानी बयाँ कर देते हैं।

इसमें FUNDING PATTERN ED देखे। राजनीतिक दलों की PFI से संबधो की जाँच CBI करे।
ब्यथित मन से
"ठाकुर की कलम से"

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